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छत्तीसगढ़ के बीजापुर में आईईडी ब्लास्ट, घायल हुए 11 सुरक्षाकर्मी

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में आईईडी ब्लास्ट हुआ जिसमें 11 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। यह विस्फोट कर्रेगुट्टा पहाड़ियों के जंगलों में हुआ।

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फोटोः आईएएनएस

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान माओवादियों द्वारा लगाए गए देसी बमों (आईईडी) के फटने से ग्यारह सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। अधिकारियों ने सोमवार, 26 जनवरी को यह जानकारी दी।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि ये विस्फोट रविवार को कर्रेगुट्टा पहाड़ियों के जंगलों में हुए।

पुलिस ने क्या बताया?

उन्होंने बताया कि घायल जवानों में से 10 जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के हैं, जो राज्य पुलिस की एक इकाई है, जबकि एक कमांडो बटालियन फॉर रेसोल्यूट एक्शन (कोबरा – सीआरपीएफ की एक विशिष्ट इकाई) का है। अधिकारी के मुताबिक, घायल कोबरा जवान रुद्रेश सिंह 210वीं बटालियन में सब-इंस्पेक्टर हैं।

उन्होंने आगे कहा कि सिंह और डीआरजी के दो जवानों के पैरों में चोटें आई हैं, जबकि तीन अन्य की आंखों में छर्रे लगने से चोटें आई हैं। उन्होंने आगे बताया कि घायल जवानों को रायपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बीते नवंबर में, सुरक्षा बलों ने कर्रेगुट्टा के उसूर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ताडपाला गांव में अपना शिविर स्थापित किया था, जिसे वरिष्ठ माओवादियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता था।

कैरेगेट्टा पहाड़ियों में 21 दिनों तक चलाया व्यापक अभियान

पिछले साल अप्रैल-मई में केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों ने कैरेगुट्टा पहाड़ियों के आसपास के घने जंगलों में 21 दिनों तक व्यापक अभियान चलाया था, जिसमें 31 नक्सली मारे गए थे।

पुलिस ने बताया था कि उस समय बलों ने 35 हथियार, 450 आईईडी और बड़ी संख्या में डेटोनेटर, विस्फोटक उपकरण और अन्य सामग्रियां जब्त की थीं, जिनमें चिकित्सा सामग्री, बिजली के उपकरण, नक्सली साहित्य आदि शामिल थे।

गौरतलब है कि सुरक्षा एजेंसियां राज्य में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर लगातार अभियान चला रही हैं और अब तक हिडमा समेत कई बड़े ईनामी नक्सलियों को मार गिराया है।

सुरक्षा एजेंसियां छत्तीसगढ़ के साथ अन्य राज्यों में भी सक्रिय हैं और नक्सलवाद के खात्मे को लेकर काम कर रही हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के खात्मे को लेकर 31 मार्च 2026 की डेडलाइन तय की है।

ऐसे में सोमवार को आईईडी फटने की यह घटना दिखाती है कि इलाके में अभी भी नक्सलवाद की जड़ें कायम हैं। छत्तीसगढ़ का बीजापुर इलाका लंबे समय से माओवादियों का प्रमुख केंद्र रहा है। इसके साथ ही सुकमा, नारायणपुर, दंतेवाड़ा जैसे जिले भी नक्सलवाद के सबसे प्रभावित इलाकों में गिने जाते रहे हैं।

सुरक्षाबलों द्वारा बीजापुर में 17 जनवरी को चलाए गए अभियान में एक महिला कैडर समेत 4 माओवादियों के शव बरामद हुए थे। इनके पास से एके-47 समेत अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी।


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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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