नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने हरियाणा सरकार के विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन से सरकारी निधियों के गबन से जुड़े कथित 661 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के तहत चंडीगढ़, पंचकुला और दिल्ली-एनसीआर में छह स्थानों पर तलाशी ली है। अधिकारियों ने रविवार (7 जून) को यह जानकारी दी। सीबीआई की यह कार्रवाई आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू फाइनेंस बैंक में जमा धनराशि के कथित गबन की चल रही जांच का हिस्सा है।
अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार (5 जून) को की गई तलाशी में हरियाणा कैडर के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, नोएडा स्थित विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड (VCPL) और उसके निदेशक से जुड़े परिसरों को निशाना बनाया गया।
सीबीआई ने बयान जारी कर क्या कहा?
एजेंसी के मुताबिक इस कथित धोखाधड़ी से हरियाणा सरकार के आठ विभाग और चंडीगढ़ प्रशासन की दो संस्थाएं, चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ नवीकरणीय ऊर्जा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संवर्धन सोसायटी (CREST) प्रभावित हुई हैं।
सीबीआई द्वारा जारी बयान के मुताबिक, ” जांच के दौरान ऐसे सबूत सामने आए हैं जिनसे पता चलता है कि सरकारी कर्मचारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत की थी और खाते खोलने, धन हस्तांतरण और बाद में उसके दुरुपयोग में सहायता की थी। “
एजेंसी ने यह आरोप लगाया कि सरकारी कर्मचारियों ने लेन-देन में सहायता करने और अनियमितताओं को उजागर न करने के बदले अनुचित लाभ प्राप्त किए। सीबीआई ने आगे आरोप लगाया कि विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते में अपराध से प्राप्त धनराशि जमा हुई। इसे बाद में उसके निदेशक के निजी खाते में स्थानांतरित कर दिया गया।
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एजेंसी ने कहा कि “तलाशी अभियान के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, संपत्ति संबंधी दस्तावेज और अन्य संबंधित सामग्री जब्त की गई।”
CBI ने दायर किया आरोप पत्र
यह मामला हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार-विरोधी ब्यूरो से स्थानांतरित एक एफआईआर और चंडीगढ़ के आर्थिक अपराध शाखा पुलिस स्टेशन में शुरू में दर्ज किए गए दो मामलों से जुड़ा है। एजेंसी ने बताया कि ये मामले कथित आपराधिक साजिश, सरकारी धन के दुरुपयोग और बैंक अधिकारियों एवं लोक सेवकों की मिलीभगत से किए गए संबंधित अपराधों से संबंधित हैं।
सीबीआई ने पंचकुला की विशेष अदालत में अपना पहला आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। इसमें हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के सरकारी कर्मचारियों की कथित संलिप्तता का विस्तृत विवरण दिया गया है।
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सीबीआई ने बताया कि आरोप पत्र में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू फाइनेंस बैंक में जमा सरकारी धन की हेराफेरी के लिए इस्तेमाल किए गए कथित तौर-तरीकों का भी विस्तृत वर्णन किया गया है।
इसमें आगे कहा गया है कि जांच जारी है और इस मामले में शामिल पाए गए अन्य आरोपियों के खिलाफ और भी आरोपपत्र दायर किए जाने की संभावना है।



