नई दिल्ली: अगले साल यानी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी मशीनरी को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। पार्टी ने पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गोवा की राज्य इकाइयों को निर्देश दिया है कि अगर चुनाव तय समय से पहले कराए जाते हैं तो वे इसके लिए तैयार रहें।
इन चार राज्यों के अलावा मणिपुर में भी अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं। हालांकि, फिलहाल यहां की स्थिति पर केंद्रीय नेतृत्व करीबी नजर बनाए हुए है। सूत्रों के मुताबिक, फरवरी 2027 से देशभर में जनगणना का दूसरा चरण शुरू होना है। इस चरण में सामाजिक-आर्थिक, शैक्षणिक और प्रजनन संबंधी आंकड़े जुटाए जाएंगे। संभव है कि इससे पहले विधानसभा चुनाव करा लिए जाएं।
दरअसल, जनगणना और चुनाव, दोनों के संचालन में बड़े पैमाने पर सरकारी कर्मचारियों और प्रशासनिक मशीनरी की जरूरत होती है। ऐसे में दोनों प्रक्रियाओं के एक साथ आने से लॉजिस्टिक चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। इसी वजह से चुनाव कुछ सप्ताह पहले कराए जाने की संभावना पर चर्चा हो रही है।
पश्चिम बंगाल की जीत का भी असर?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से मिले उत्साह को बनाए रखना चाहती है। राज्य इकाइयों को इस उत्साह को बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करने को कहा गया है।
भाजपा नेता के अनुसार पार्टी के भीतर एक बड़ा वर्ग मानता है कि बंगाल में मिली प्रचंड जीत के पीछे हिंदू वोटों का व्यापक ध्रुवीकरण एक महत्वपूर्ण कारण रहा और यही उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी पार्टी की संभावनाओं को मजबूत कर सकता है।
उन्होंने कहा, ‘राजनीतिक तौर पर हम उस गति को बरकरार रखना चाहते हैं जो पश्चिम बंगाल चुनावों से मिली है। राज्य इकाइयों से कहा गया है कि वे पूरी ताकत से तैयारी करें।’
सूत्रों के अनुसार चुनाव वाले राज्यों के बीजेपी कोर ग्रुप को चुनावी तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश, पंजाब और गोवा के भाजपा नेताओं का मानना है कि चुनाव कुछ सप्ताह पहले हो सकते हैं। उत्तराखंड भाजपा अपेक्षाकृत और पहले चुनाव कराने के पक्ष में बताई जा रही है। वहीं, मणिपुर में जारी तनावपूर्ण हालात को देखते हुए पार्टी नेतृत्व वहां की परिस्थितियों की लगातार समीक्षा कर रहा है।
कांग्रेस को लेकर भी बीजेपी सतर्क
सूत्रों के अनुसार भाजपा का मानना है कि दक्षिण भारत के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने कांग्रेस का मनोबल बढ़ाया है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व को लगता है कि अगर चुनाव तय समय से पहले कराए जाते हैं तो कांग्रेस को गठबंधन बनाने और चुनावी रणनीति तैयार करने के लिए कम समय मिलेगा।
बीजेपी नेता ने कहा, ‘दक्षिण भारत के घटनाक्रमों से कांग्रेस का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वह बेहतर स्थिति में है कि गठबंधन करे और चुनाव लड़े। भाजपा किसी भी संभावित चुनौती को कमतर नहीं आंकना चाहती।’
गौरतलब है कि केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने शानदार जीत हासिल की। जबकि तमिलनाडु में पार्टी ने सरकार बनाने के लिए जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) के साथ गठबंधन किया। यही नहीं, कर्नाटक में भी कांग्रेस आखिरकार कई प्रयासों के बाद सत्ता का हस्तांतरण करने में कामयाब रही और मुख्यमंत्री पद पर अब सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार हैं।
पंजाब की स्थिति क्या है?
पिछले सप्ताह आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में एक कार्यक्रम के दौरान संकेत दिया था कि विधानसभा चुनाव नवंबर में भी कराए जा सकते हैं।
वैसे, ये भी है कि बीजेपी नेतृत्व समय से पहले चुनाव कराने को लेकर बहुत उत्साहजनक नहीं नजर आता रहा है। पार्टी के भीतर 2004 के लोकसभा चुनाव की बात अक्सर उठती है, जब निर्धारित समय से पहले चुनाव कराने का फैसला पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हुआ था। अटल बिहार विजपेयी के नेतृत्व को केंद्रीय सत्ता से बाहर होना पड़ा था।
सूत्रों के मुताबिक, पंजाब बीजेपी की कोर ग्रुप बैठक में वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव कार्यक्रम में बड़े बदलाव की संभावना से इनकार किया था। लेकिन जनगणना की परिस्थितियों को देखते हुए कुछ सप्ताह पहले चुनाव कराने की संभावना से भी पूरी तरह इनकार नहीं किया जा रहा। पंजाब बीजेपी के एक नेता के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व ने जीत के लक्ष्य के साथ तैयारियां तेज करने को कहा है। पार्टी को हर स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
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