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बंगाल में अब ₹5 में ‘माछ-भात’, शुभेंदु सरकार का बड़ा ऐलान; शराब दुकानों पर बढ़ाई सख्ती

बंगाल में मछली सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा मानी जाती है। यहां ‘माछे-भाते बंगाली’ कहावत बेहद लोकप्रिय है, जिसका मतलब है कि मछली और भात (चावल) बंगाली जीवनशैली की आत्मा हैं।

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मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के अनुसार सरकार राज्यभर में करीब 400 समर्पित कैंटीन स्थापित करने जा रही है।

कोलकाताः बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री बने शुभेंदु अधिकारी लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं। अब उन्होंने बंगाल में महज 5 रुपये में ‘माछ-भात’ देने की घोषणा की है। गौरतलब है कि बंगाल की राजनीति और वहां की संस्कृति में ‘माछ-भात’ (मछली-चावल) का स्थान केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बंगालियों की अस्मिता और जीवनशैली का हिस्सा है।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के अनुसार सरकार राज्यभर में करीब 400 समर्पित कैंटीन स्थापित करने जा रही है, जहां हफ्ते में दो दिन आम लोगों, दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों और गरीबों को मात्र 5 रुपये में भरपेट ‘माछ-भात’ दिया जाएगा। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को ममता बनर्जी के उस चुनावी डर के खिलाफ बीजेपी का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और राजनीतिक पलटवार माना जा रहा है, जो उन्होंने चुनाव के दौरान फैलाया था।

क्यों खास है ‘माछ-भात’ का फैसला?

दरअसल इसी ‘माछ-भात’ को लेकर साल 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान जो सियासी घमासान छिड़ा था, उसे अब नई भाजपा सरकार ने एक मास्टरस्ट्रोक में बदल दिया है। बंगाल में मछली सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा मानी जाती है। यहां ‘माछे-भाते बंगाली’ कहावत बेहद लोकप्रिय है, जिसका मतलब है कि मछली और भात (चावल) बंगाली जीवनशैली की आत्मा हैं।

इसी वजह से विधानसभा चुनाव के दौरान “माछ-भात” बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कई चुनावी सभाओं में आरोप लगाया था कि अगर बीजेपी सत्ता में आई तो बंगाल में मांस, मछली और अंडा खाने पर रोक लग सकती है। उन्होंने बीजेपी पर खान-पान की राजनीति करने का आरोप लगाया था।

ममता के इस ‘फिश-बैन’ वाले नैरेटिव को काटने के लिए तब बीजेपी के स्टार प्रचारकों को सामने आना पड़ा था। बीजेपी नेता और सांसद रवि किशन ने तो एक रैली में यहां तक कह दिया था कि, “बंगाल के लोग चुनाव नतीजों के बाद चार गुना ज्यादा मछली खाएंगे। जहां-जहां एनडीए की सरकारें हैं, हम वहां से भी शानदार मछलियां लाकर बंगाल के कुएं और तालाबों में डालेंगे।” अब शुभेंदु अधिकारी सरकार का 5 रुपये में माछ-भात देने का फैसला उसी राजनीतिक बहस के जवाब के तौर पर भी देखा जा रहा है।

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ममता सरकार की कैंटीन से आगे बढ़ी योजना

दरअसल, ममता बनर्जी सरकार के दौरान भी राज्य में सब्सिडी वाले सरकारी कैंटीन चलाए जाते थे, जहां दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक और गरीब लोग 5 रुपये में अंडा-भात खा सकते थे।

लेकिन नई बीजेपी सरकार ने उसी मॉडल को आगे बढ़ाते हुए अब उसमें मछली को शामिल कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह कदम बीजेपी की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत पार्टी बंगाल की सांस्कृतिक पहचान के साथ खुद को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

मुख्यमंत्री ने महिलाओं के लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ का भी ऐलान किया है। इसके तहत महिलाओं को हर महीने 3000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार 27 मई से इस योजना के आवेदन फॉर्म जारी करेगी। मुख्यमंत्री का कहना है कि योजना का लाभ सभी पात्र भारतीय महिलाओं को मिलेगा।

इसके साथ ही चिकित्सा क्षेत्र में सुधार करते हुए आयुष विभाग को राज्य के स्वास्थ्य विभाग से अलग (Delink) कर एक स्वतंत्र मंत्रालय/विभाग बनाया जाएगा।

शराब दुकानों पर नई पाबंदी, अवैध घुसपैठ पर सख्ती

राज्य सरकार ने शराब की दुकानों को लेकर भी सख्त फैसला लिया है। नए नियम के मुताबिक स्कूल, कॉलेज और धार्मिक स्थलों के एक किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानें नहीं खोली जा सकेंगी। सरकार का कहना है कि यह फैसला सामाजिक संवेदनशीलता और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर लिया गया है।

मुख्यमंत्री बनने के बाद से शुभेंदु अधिकारी अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर भी लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। उन्होंने जिला प्रशासन को “होल्डिंग सेंटर” बनाने का निर्देश दिया है, जहां पकड़े गए अवैध प्रवासियों को निर्वासन से पहले रखा जाएगा। इससे पहले पुलिस को ऐसे लोगों को हिरासत में लेकर बीएसएफ को सौंपने का आदेश भी दिया गया था।

बीजेपी ने चुनाव में डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट का नारा दिया था और अब सरकार उसी एजेंडे को लागू करती दिखाई दे रही है।

2021 की चुनावी हिंसा की फिर जांच

सीएम शुभेंदु ने 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई राजनीतिक हिंसा के मामलों की दोबारा जांच शुरू करने का भी फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया है कि हत्या और हमले से जुड़े हर मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच की जाए। उन्होंने 2021 के चुनाव को “काला अध्याय” बताते हुए कहा कि राजनीतिक हिंसा के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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