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FWICE पर बैन लगाओ…रणवीर सिंह पर कार्रवाई को लेकर राम गोपाल वर्मा ने फेडरेशन पर उठाए कई सवाल

फेडरेशन के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित के अनुसार रणवीर ने शूटिंग शुरू होने से लगभग तीन सप्ताह पहले डॉन फिल्म छोड़ने का फैसला किया, जिससे निर्माताओं को करीब 45 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ।

रणवीर सिंह इन दिनों फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर विवादों में घिरे हैं। रणवीर पर शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले फिल्म को छोड़ने का आरोप है। फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने इसको लेकर उनपर बैन लगा दिया है। अब इस बीच मशहूर फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने फेडरेशन की इस कार्रवाई पर कई सवाल खड़े किए हैं और रणवीर सिंह का समर्थन किया है।

राम गोपाल वर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबी पोस्ट लिखते हुए कहा कि रणवीर सिंह पर लगाया गया तथाकथित “बैन” अंततः खुद FWICE के लिए मजाक बनकर रह जाएगा। उन्होंने साफ शब्दों में लिखा कि प्रतिबंध रणवीर सिंह पर नहीं, बल्कि खुद FWICE पर लगाया जाना चाहिए।

फिल्ममेकर राम गोपाल ने फेडरेशन को ‘आउटडेटेड’ यानी अप्रासंगिक बताते हुए लिखा, “गांधीवादी तरीके से असहयोग या प्रतिबंध लगाने का यह तथाकथित नाटक आखिरकार खुद FWICE के लिए एक बड़ा मजाक बनकर रह जाएगा। यह फिल्म उद्योग या मजदूरों की सुरक्षा के लिए नहीं किया जा रहा है, जैसा कि दावा किया जा रहा है। यह सिर्फ एक पुरानी हो चुकी यूनियन व्यवस्था द्वारा अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए किया जा रहा शक्ति प्रदर्शन है।”

फेडरेशन को बताया ‘कंगारू कोर्ट’

राम गोपाल वर्मा ने FWICE की तुलना एक ‘कंगारू कोर्ट’ (गैर-कानूनी अदालत) से कर दी, जो बिना किसी स्थापित कानूनी नियमों या निष्पक्षता के खुद ही फैसले सुना देती है। उनका आरोप है कि इस तरह के फैसले कुछ एजेंडा-तहत लोग बंद कमरों में पहले से तय कर लेते हैं। उन्होंने यह भी इशारा किया कि रणवीर की हालिया फिल्म ‘धुरंधर’ की मेगा-सफलता से डरे कुछ लोग भी इस साजिश के पीछे हो सकते हैं।

आरजीवी ने कहा कि यह विवाद पूरी तरह से दो पक्षों (निर्माता और अभिनेता) के बीच का एक निजी और दीवानी (सिविल) मामला है। इसे सोशल मीडिया पर मजदूरों की रोजी-रोटी से जोड़कर दिखाना एक बड़ा झूठ है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर किसी तकनीशियन को रणवीर की वजह से नुकसान हुआ है, तो वह सबूत के साथ सामने आए और खुले तौर पर कहे कि वह आगे कभी रणवीर के साथ काम नहीं करेगा।

‘सितारों से चलती है इंडस्ट्री, FWICE से नहीं’

फेडरेशन को कड़ा आईना दिखाते हुए आरजीवी ने लिखा कि कड़वा सच यह है कि थियेटरों में टिकट रणवीर सिंह जैसे सितारों के नाम पर बिकते हैं, न कि FWICE के नाम पर। राम गोपाल वर्मा ने कहा कि रणवीर जैसे स्टार्स ही लाखों मजदूरों के लिए रोजगार पैदा करते हैं। स्टार्स की वजह से ही यह इंडस्ट्री और खुद FWICE वजूद में है।

फिल्ममेकर ने दावा किया कि अगर रणवीर आज हां कह दें, तो उनके घर के बाहर चेक लेकर खड़े निर्माताओं की एक किलोमीटर लंबी लाइन लग जाएगी, चाहे फेडरेशन ने कोई भी चेतावनी क्यों न दी हो। उन्होंने सभी को सलाह दी कि दो पक्षों के निजी विवाद में अपनी ‘बिन बुलाई नाक’ न अड़ाएं।

निर्देशक संजय गुप्ता समेत इन सितारों ने भी दी प्रतिक्रिया

राम गोपाल वर्मा से पहले निर्देशक संजय गुप्ता भी रणवीर सिंह के खिलाफ की गई कार्रवाई पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि किसी बड़े अभिनेता पर प्रतिबंध लगाने का असर सिर्फ उस कलाकार पर नहीं पड़ता, बल्कि उसके साथ काम करने वाले सैकड़ों तकनीशियनों और कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है।

संजय गुप्ता के मुताबिक एक बड़ी फिल्म के सेट पर करीब 300 लोग काम करते हैं, जिनमें स्पॉट बॉय, लाइटमैन, मेकअप आर्टिस्ट, कॉस्ट्यूम स्टाफ, कैमरा टीम और अन्य तकनीशियन शामिल होते हैं। ऐसे में किसी अभिनेता को बैन करने का मतलब उन लोगों की रोजी-रोटी को भी प्रभावित करना हो सकता है जो फिल्म उद्योग पर निर्भर हैं।

वहीं दिग्गज अभिनेत्री और सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) की उपाध्यक्ष पद्मिनी कोल्हापुरे ने भी रणवीर सिंह के प्रति समर्थन जताया है। उन्होंने कहा कि सिंटा को रणवीर के सदस्य होने पर गर्व है और जरूरत पड़ने पर संगठन हमेशा उनके साथ खड़ा रहेगा।

अभिनेत्री पूनम ढिल्लों ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कलाकारों और निर्माताओं के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उनके झगड़े का खामियाजा उन कर्मचारियों को नहीं भुगतना चाहिए जो पर्दे के पीछे मेहनत करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का असर दैनिक वेतनभोगी कामगारों पर नहीं पड़ना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत तब हुई जब डॉन 3 के निर्माता-निर्देशक फरहान अख्तर और निर्माता रितेश सिधवानी ने FWICE से शिकायत की कि रणवीर सिंह ने शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले फिल्म से खुद को अलग कर लिया। निर्माताओं का दावा है कि फिल्म की लोकेशन, होटल बुकिंग, तकनीकी तैयारियों और अन्य प्री-प्रोडक्शन कार्यों पर पहले ही भारी रकम खर्च की जा चुकी थी।

फेडरेशन के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित के अनुसार रणवीर ने शूटिंग शुरू होने से लगभग तीन सप्ताह पहले फिल्म छोड़ने का फैसला किया, जिससे निर्माताओं को करीब 45 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। उनका कहना है कि फेडरेशन ने कई बार अभिनेता से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलने पर ‘नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव’ जारी करना पड़ा।

हालांकि रणवीर सिंह की ओर से जारी बयान में कहा गया कि वह फिल्म बिरादरी और डॉन फ्रेंचाइजी से जुड़े सभी लोगों का सम्मान करते हैं। अभिनेता ने पूरे विवाद पर सार्वजनिक रूप से चुप्पी बनाए रखी क्योंकि उनका मानना है कि पेशेवर और व्यक्तिगत मामलों को गरिमा, परिपक्वता और आपसी सम्मान के साथ सुलझाया जाना चाहिए।

इसे भी पढ़ेंः रणवीर सिंह पर फिल्म इंडस्ट्री की शक्तिशाली संस्था FWICE ने क्यों लगाया बैन? इस कदम के क्या मायने हैं

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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