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अयोध्या दान घोटाले की जांच में 80 लाख रुपये बरामद, गिरफ्तार 8 अभियुक्तों को 3 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया

योध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के कथित गबन के मामले में 25 जून (गुरुवार) को पहली एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के जमा करने के बाद दर्ज की गई है।

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फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

लखनऊ: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में शुक्रवार (26 जून) को स्थानीय अदालत ने गिरफ्तार सभी आठ अभियुक्तों को 3 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 29 जून को कोर्ट के सामने दोबारा पेश होने से पहले सभी जेल में रहेंगे। जांचकर्ताओं ने इस मामले में अब तक 79.85 लाख रुपये बरामद किए हैं।

इस मामले की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू को छोड़कर सभी छह आरोपी एक बैंक की आउटसोर्स कैश मैनेजमेंट एजेंसी से जुड़े थे। इस एजेंसी को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्राप्त धन की गिनती का काम सौंपा गया था।

अयोध्या राम मंदिर दान घोटाले की जांच में क्या पता चला?

जांचकर्ताओं का आरोप है कि जब धन का गबन हुआ तो यह छह लोग चढ़ावे की गिनती में सीधे तौर पर शामिल थे। इस मामले की जांच एसआईटी की तीन सदस्यीय टीम कर रही है।

इससे पहले आज दिन में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख चंपत राय और ट्रस्ट के एक अन्य सदस्य अनिल मिश्रा ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

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यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब एक दिन पहले ही इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार किए गए लोगों में दान की गिनती करने वाले कर्मचारी, गिनती प्रक्रिया के प्रभारी, पूरी प्रक्रिया की निगरानी करने वाले एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी और राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर और करीबी सहयोगी रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं।

गौरतलब है कि अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के कथित गबन के मामले में 25 जून (गुरुवार) को पहली एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के जमा करने के बाद दर्ज की गई है।

इससे पहले 14 जून को श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। इस टीम को मंदिर में चढ़ावे के धन में कथित अनियमितताओं की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी। एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसके दो दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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