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गाजा में सेना भेजना के अमेरिकी दबाव में फंसे पाकिस्तानी जनरल आसिम मुनीर! ट्रंप से रिश्ता भी दांव पर

अमेरिका के दबाव से आसिम मुनीर के लिए हालात ज्यादा नाजुक हो रहे हैं। पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि अमेरिका समर्थित प्लान के तहत गाजा में अपने सैनिकों की भागीदारी से देश की इस्लामी पार्टियों का तेज विरोध भड़क सकता है।

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के सबसे ताकतवर डिफेंस चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को इस्लामाबाद पर अपनी बढ़ती पकड़ के साथ सबसे बड़ी चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, अमेरिका की ओर से पाकिस्तान पर गाजा में अपनी सेना भेजने का दबाव डाला जा रहा है। जानकारों के अनुसार मुनीर इससे दोहरी मुश्किल में हैं, क्योंकि गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स में पाकिस्तानी सैनिकों को भेजने से देश में विरोध शुरू सकता है। दूसरी ओर अमेरिका की ओर से किए आग्रह से पीछे हटने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाराज हो सकते हैं।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक मुनीर के आने वाले हफ्तों में ट्रंप से मिलने के लिए वॉशिंगटन जाने की उम्मीद है। दो सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि यह छह महीनों में ट्रंप और मुनीर के बीच तीसरी मुलाकात होगी, जिसमें शायद गाजा फोर्स पर बात होगी। इनमें से एक सूत्र मुनीर के अमेरिका के साथ आर्थिक संबंधों से नजदीकी से जुड़ा हुआ है।

ट्रंप के 20-पॉइंट वाले गाजा प्लान में मुस्लिम-बहुसंख्यक देशों की सेनाओं से इजराइली सेनाओं के हटने के बाद युद्ध से तबाह फिलिस्तीनी इलाके में पुनर्निर्माण और आर्थिक सुधार के लिए ट्रांजिशन पीरियड की देखरेख करने को कहा गया है। इजराइली सेनाओं और हमास के बीच दो साल से ज्यादा चले युद्ध से गाजा बुरी तरह से तबाह हो चुका है।

हालांकि, कई देश गाजा के इस्लामी ग्रुप हमास को गैर-सैनिक बनाने के मिशन को लेकर सतर्क हैं, क्योंकि इससे वे भी संघर्ष में फंस सकते हैं। यही नहीं, परिस्थिति ऐसी भी बन सकती है कि जिससे इन मुस्लिम देशों में फिलिस्तीन समर्थक और इजरायल विरोधी आबादी नाराज हो सकती है। रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि इस कदम से विदेशी सैनिकों के संघर्ष में और गहराई तक फंसने का खतरा है और इससे देश में फिलिस्तीन समर्थक और इजराइल विरोधी जनमत भड़क सकता है।

आसिम मुनीर पर अमेरिका दबाव, बढ़ रही मुश्किल

अमेरिका के दबाव से मुनीर के लिए हालात ज्यादा नाजुक हो रहे हैं, क्योंकि उन्होंने वॉशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच पिछले कई सालों के अविश्वास को खत्म करने के लिए बेहद अस्थिर स्वभाव वाले ट्रंप के साथ करीबी रिश्ता बनाने की कोशिश की है। इसी साल जून में उन्हें व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ लंच का मौका मिला। यह पहली बार था जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख को अकेले, बिना किसी सिविलियन अधिकारी के होस्ट किया था। जाहिर है मुनीर अभी ट्रंप को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकते।

वॉशिंगटन स्थित अटलांटिक काउंसिल में साउथ एशिया के सीनियर फेलो माइकल कुगेलमैन के अनुसार, ‘गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स में योगदान न देने से ट्रंप नाराज हो सकते हैं, जो पाकिस्तान जैसे देश के लिए कोई छोटी बात नहीं है, जो उनके अच्छे संबंधों में बने रहने के लिए काफी उत्सुक नजर आ रहा है। खासकर अमेरिकी निवेश और सुरक्षा सहायता हासिल करने के लिए।’

वैसे भी पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र मुस्लिम देश है जिसके पास परमाणु हथियार हैं और कई जंगे लड़ चुका है। पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान की भारत के साथ कई भिड़ंत हो चुकी है। साथ ही पाक सेना अपने दूर-दराज के इलाकों में विद्रोहियों से भी निपटने में लगी है। मौजूदा समय में भी पाकिस्तानी सेना इस्लामी आतंकवादियों के साथ एक मुश्किल लड़ाई में उलझी हुई है, जिसके बारे में उसका कहना है कि ये आतंकी अफगानिस्तान से काम कर रहे हैं।

लेखिका और डिफेंस एनालिस्ट आयशा सिद्दीका ने कहा, ‘पाकिस्तान की मिलिट्री ताकत का मतलब है कि मुनीर पर अपनी क्षमता दिखाने का दबाव ज्यादा है।’

पिछले महीने पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने भी कहा था कि इस्लामाबाद शांति बनाए रखने के लिए सैनिक भेजने पर विचार कर सकता है, लेकिन हमास को निहत्था करना ‘हमारा काम नहीं है।’

पाकिस्तान ने सेना भेजी तो देश में होगा विद्रोह?

पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि अमेरिका समर्थित प्लान के तहत गाजा में अपने सैनिकों की भागीदारी से देश की इस्लामी पार्टियों का तेज विरोध भड़क सकता है। ऐसा इसलिए कि ये पार्टियां और कट्टर इस्लामी सोच वाले लोग अमेरिका और इजराइल के सख्त खिलाफ हैं। पाकिस्तान में इन इस्लामवादियों के पास हजारों लोगों को इकट्ठा करने की ताकत है। अभी हाल में एक ताकतवर और हिंसक इजराइल विरोधी इस्लामी पार्टी- तहरीक-ए-लब्बैक, जो पाकिस्तान में बहुत सख्त ईशनिंदा कानूनों को बनाए रखने के लिए लड़ती रही है, उसे अक्टूबर में बैन कर दिया गया था।

अधिकारियों ने बताया कि अधिकारियों ने इसके नेताओं और 1,500 से ज़्यादा समर्थकों को गिरफ्तार किया और चल रही कार्रवाई में इसकी संपत्ति और बैंक खातों को जब्त कर लिया। हालांकि इस्लामाबाद ने इस ग्रुप को गैरकानूनी घोषित कर दिया है, लेकिन इसकी विचारधारा अभी भी ज़िंदा है।

इसके अलावा जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी और उसके समर्थक भी मुनीर के खिलाफ गुस्से में हैं। ऐसी भी आशंका है कि कि अगर गाजा फोर्स के जमीन पर उतरने के बाद हालात बिगड़ते हैं, तो इससे जल्दी ही पाकिस्तान में बड़ी समस्याएं पैदा होंगी। लोग कहने लगेंगे कि आसिम मुनीर अब इजराइल के इशारों पर काम कर रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान में मुनीर की छवि को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है।

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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