नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) नेता अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक आबकारी नीति मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाही में शामिल होंगे। निचली अदालत द्वारा केजरीवाल और अन्य लोगों को बरी करने के आदेश के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के मामले को अलग करने के बाद आप नेताओं ने सुनवाई में शामिल होने का फैसला किया। इससे पहले जज को अलग करने की मांग की थी। जब जज कांता शर्मा ने खुद को मामले से अलग करने से इंकार किया था तो नेताओं ने कार्यवाही का बहिष्कार करने की बात कही थी। दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई अब जस्टिस मनोज जैन की पीठ कर रही है।
अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने जमा किए वकालतनामा
सीबीआई के वकील डीपी सिंह ने सोमवार (25 मई) को अदालत को बताया कि जस्टिस जैन के समक्ष मामला आने पर तीनों ने अपने वकालतनामा यानी कानूनी प्रतिनिधित्व के लिए प्राधिकरण पत्र दाखिल कर दिए थे। अदालत के कर्मचारियों ने पुष्टि की कि केजरीवाल, सिसोदिया और पाठक ने 25 मई को ये वकालतनामा जमा किए।
अदालत ने घटनाक्रम पर ध्यान दिया और कहा कि सुनवाई की तारीख तय करने के लिए मामले पर 16 जुलाई को सुनवाई होगी। जस्टिस जैन ने कहा कि “…हम अगली तारीख को सब कुछ सुनेंगे। …उन्होंने वकालतनामा दाखिल किया है हम देखेंगे कि कौन सी तारीखें दी जा सकती हैं और मामले की सुनवाई के लिए एक कार्यक्रम तैयार किया जा सकता है।”
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19 मई को जस्टिस जैन ने सीबीआई को केजरीवाल, सिसोदिया और पाठक को सूचित करने का निर्देश दिया कि मामला अब उनके समक्ष सूचीबद्ध है। आबकारी नीति मामले में निचली अदालत द्वारा केजरीवाल और अन्य को बरी किए जाने के बाद जस्टिस शर्मा और केजरीवाल के बीच अभूतपूर्व टकराव शुरू हो गया। 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने सीबीआई अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निचली अदालत के निर्देश पर रोक लगा दी और प्रवर्तन निदेशालय की कार्यवाही स्थगित कर दी।
जस्टिस शर्मा को मामले से हटने की अपील की थी
13 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने केजरीवाल के उस अनुरोध को खारिज कर दिया जिसमें मामले को जस्टिस शर्मा की पीठ से ट्रांसफर करने की मांग की गई थी। इसके बाद आप नेताओं ने जस्टिस शर्मा को अलग करने की अपील की थी। इसे जस्टिस शर्मा ने 20 अप्रैल को खारिज कर दिया था। इसके बाद केजरीवाल और अन्य नेताओं ने 27 अप्रैल को यह सूचना दी कि वह अदालत की कार्यवाही का बहिष्कार करेंगे।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 5 मई को तीनों नेताओं के प्रतिनिधित्व के लिए वरिष्ठ जजों को एमिकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) के रूप में नियुक्त किया लेकिन मामले को तीन बार स्थगित किया गया।
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जस्टिस शर्मा ने 14 मई को अवमानना की कार्यवाही शुरू की। उन्होंने सीबीआई की अपील तथा सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कथित रूप से मानहानिकारक, अपमानजनक और बदनामी भरी सामग्री पोस्ट किए जाने के मामले में अवमानना की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।
जज ने हालांकि शुरुआत में अपने को अलग करने से इंकार किया था। उन्होंने कहा था कि केजरीवाल ने बदनामी और धमकी का रास्ता अपनाया है। यह मामला 19 मई को जस्टिस जैन के समक्ष सूचीबद्ध किया गया। खंडपीठ ने अवमानना के मामले में केजरीवाल और सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज, संजय सिंह और विनय मिश्रा सहित अन्य आम आदमी नेताओं को नोटिस जारी किया है।



