Home भारत अल फलाह यूनिवर्सिटी ने NAAC नोटिस का दिया जवाब, ‘चूक’ के लिए...

अल फलाह यूनिवर्सिटी ने NAAC नोटिस का दिया जवाब, ‘चूक’ के लिए मांगी माफी, भ्रामक ग्रेड हटाए गए

NAAC ने यह नोटिस 12 नवंबर को तब जारी किया था, जब जांच में अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के कई डॉक्टर रेड फोर्ट धमाके से जुड़े पाए गए। इस आतंकी हमले में 12 लोगों की मौत हुई थी।

0
Al Falah University, Delhi blast Al Falah University probe, Al Falah University NAAC accreditation, Fake accreditation claims India, Higher education accreditation India, NAAC accreditation expiry issue, Universities without NAAC accreditation, NAAC cautionary note institutions, NAAC misleading information action,

10 नवंबर को दिल्ली कार धमाके के तार फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ने के बाद नेशनल असेसमेंट एंड एक्रिडिटेशन काउंसिल (NAAC) ने मेडिकल कॉलेज को शो-कॉज नोटिस भेजा था। एनएएसी ने एक हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा था। दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया है कि मेडिकल कॉलेज नोटिस का जवाब भेजा है और माफी भी मांगी है।

अधिकारियों के मुताबिक, विश्वविद्यालय ने स्वीकार किया है कि वेबसाइट पर पुरानी मान्यता (एक्रिडिटेशन) दिखाना एक चूक, वेब डिजाइन त्रुटि और अनजाने में हुई गलती थी। विश्वविद्यालय ने इस पर माफी मांगी है और बताया है कि भ्रामक जानकारी हटा दी गई है। अभी फिलहाल एनएएसी किसी कड़े कदम की योजना नहीं बना रहा है।

NAAC ने क्यों नोटिस जारी किया था?

एनएएसी ने यह नोटिस 12 नवंबर को तब जारी किया था, जब जांच एजेंसियों ने अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के कई डॉक्टरों को रेड फोर्ट धमाके से जोड़ा था, जिसमें कम से कम 12 लोगों की मौत हुई थी। एनएएसी ने पाया कि विश्वविद्यालय अपनी वेबसाइट पर “पूरी तरह गलत और भ्रामक जानकारी” दिखा रहा था, जिसमें 2013 में इंजीनियरिंग कॉलेज को मिला ‘A ग्रेड’ और 2011 से टीचर एजुकेशन स्कूल की मान्यता शामिल थी, जबकि एनएएसी की मान्यता सिर्फ पांच साल के लिए मान्य होती है। नोटिस में सात दिनों के भीतर जवाब देने और सभी झूठे दावों को हटाने को कहा गया था।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने लंबा स्पष्टीकरण भेजा है। उनका कहना है कि यह निगरानी से छूटा हुआ वेबपेज था या वेबसाइट डिजाइन की गलती थी, जिसे अब हटा दिया गया है। दूसरे अधिकारी के मुताबिक, जवाब पूरी तरह स्पष्ट नहीं था। विश्वविद्यालय ने कुछ पुराने पेजों और एक कर्मचारी की गलती को जिम्मेदार ठहराया। अधिकारी ने कहा कि हजारों संस्थानों की वेबसाइटों की मैन्युअल निगरानी करना मुश्किल है, खासकर जब ऐसी जानकारी अंदरूनी पेजों में छिपी हो।

25 अन्य संस्थानों को भी NAAC का नोटिस

अल-फलाह केस के बाद एनएएसी ने करीब 25 अन्य संस्थानों को भी नोटिस भेजे हैं, जहां पुरानी या समाप्त हो चुकी मान्यता वेबसाइटों पर दिखाई जा रही थी। इन संस्थानों से तुरंत ऐसी जानकारी हटाने को कहा गया है। एनएएसी ने पहले भी चेतावनी दी है कि पुरानी मान्यता दिखाना स्टेकहोल्डर्स को भ्रमित करने के बराबर है और इससे कड़ी कार्रवाई हो सकती है। मार्च 2018 के एक चेतावनी पत्र में एनएएसी ने इसे गंभीर उल्लंघन बताया था।

गौरतलब है कि शिक्षा मंत्रालय के AISHE सर्वे के मुताबिक 8 जुलाई 2023 तक देश में 690 विश्वविद्यालय और 34 हजार से ज्यादा कॉलेज एनएएसी एक्रेडिटेशन के साथ संचालित हो रहे थे। यूजीसी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, देश में कुल 1,113 विश्वविद्यालय और 43,796 कॉलेज मौजूद हैं, जिनमें से केवल 418 विश्वविद्यालय और 9,062 कॉलेजों को ही एनएएसी द्वारा एक्रेडिटेशन प्राप्त है।

उधर, दिल्ली ब्लास्ट और अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े तार का मामला एक्रिडिटेशन से आगे बढ़ चुका है। 18 नवंबर को ईडी ने अल-फलाह समूह के चेयरमैन जव्वाद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग और कथित फर्जी मान्यता संबंधी वित्तीय गड़बड़ियों के मामले में गिरफ्तार किया। इंडियन यूनिवर्सिटीज एसोसिएशन पहले ही उसकी सदस्यता रद्द कर चुका है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने चार डॉक्टरों- मुअज्जफर अहमद राथर, अदील अहमद राथर, मुझम्मिल शकील गणाई और शाहीन शाहिद को अपने मेडिकल रजिस्टर से हटा दिया, क्योंकि उन्हें रेड फोर्ट धमाके में यूएपीए के तहत आरोपी बनाया गया है।

इससे पहले 12 नवंबर को कुलपति भुपिंदर कौर ने कहा था कि विश्वविद्यालय का इन डॉक्टरों से कोई निजी संबंध नहीं है, वे सिर्फ अपने आधिकारिक पदों पर काम कर रहे थे।

author avatar
अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version