कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को शनिवार को सोनारपुर में उस समय विरोध का सामना करना पड़ा, जब वे कथित तौर पर चुनाव बाद की हिंसा के शिकार एक टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रहे थे। इस दौरान उन्हें कुछ महिलाओं द्वारा थप्पड़ मारे गए। उन पर अंडे फेंके गए और नारेबाजी की गई।
हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद यह अभिषेक बनर्जी की पहली सार्वजनिक उपस्थिति थी। बनर्जी टीएमसी कार्यकर्ता संजू कर्मकार के परिवार से मिलने जा रहे थे, जिनकी कथित तौर पर चुनाव बाद की हिंसा में हत्या कर दी गई थी। इसी दौरान सोनारपुर पहुंचने पर उन पर हमला किए जाने का आरोप है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मोटरसाइकिल पर सवार होकर पहुंचे बनर्जी के साथ धक्का-मुक्की की गई, उनकी शर्ट खींची गई और उन पर पत्थर, जूते तथा अंडे फेंके गए।
बनर्जी के सुरक्षाकर्मी उन्हें भीड़ से बचाने की कोशिश करते नजर आए। बनर्जी बाद में इन हमलों के बीच सुरक्षा के लिए क्रिकेट हेलमेट पहने नजर आए। उन पर अंडे भी फेंके गए और उनकी कमीज के कई बटन तोड़ दिए गए। स्थिति और बिगड़ने के बीच बनर्जी पीड़ित परिवार के घर की ओर बढ़ते रहे।
हंगामे के बीच जिस मोटरसाइकिल पर अभिषेक बनर्जी सवार थे, उसे भी कथित तौर पर गिरा दिया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारी डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी के खिलाफ ‘चोर-चोर’ के नारे लगाते सुने गए।
महिलाओं ने काले झंडे दिखाए
जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर को सीआईडी द्वारा पूछताछ के लिए नोटिस मिलने के बाद अभिषेक बनर्जी अपने कोलकाता स्थित कालीघाट रोड आवास से सोनारपुर के लिए रवाना हुए। रास्ते में कमालगाजी इलाके में कुछ महिलाओं ने उन्हें काले झंडे दिखाकर विरोध जताया।
सोनारपुर पहुंचने पर विरोध और तेज हो गया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, उनके खिलाफ नारेबाजी करने लगे और उन्हें ‘चोर’ कहकर संबोधित किया। इस दौरान अभिषेक बनर्जी अपनी कार से उतरकर एक स्थानीय टीएमसी कार्यकर्ता की मोटरसाइकिल पर सवार होकर आगे बढ़ने लगे।
इसी बीच प्रदर्शनकारियों की भीड़ उनकी ओर बढ़ी। आरोप है कि कुछ महिलाओं ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और थप्पड़ भी मारे। हंगामे के दौरान उनकी शर्ट भी फट गई। सिर पर अंडे लगने के बाद उन्होंने सुरक्षा के लिए क्रिकेट हेलमेट पहन लिया।
भाजपा पर आरोप
घटना के बाद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि हमला भाजपा समर्थित गुंडों द्वारा कराया गया। उन्होंने कहा कि वह अपने पार्टी कार्यकर्ता संजू कर्मकार से मिलने गए थे, जो कथित तौर पर चुनाव बाद हिंसा का शिकार हुआ था। उन्होंने यह भी दावा किया कि हमले के समय वहां पुलिस मौजूद नहीं थी। बनर्जी ने कहा कि हमला करने वालों की कोशिश उन्हें मारने की थी। टीएमसी सांसद ने कहा कि वह इस मामले को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि को भी पूरी घटना की जानकारी देंगे।
इस बीच अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर दौरे पर हमले को लेकर विपक्ष के कई और नेताओं ने भी भाजपा पर निशाना साधा है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने पूरी घटना पर आपत्ति जताई है।
घटना के बाद टीएमसी ने कहा कि भाजपा की राजनीति का असली चेहरा आज बेनकाब हो गया। तृणमूल ने कहा, ‘हमारे राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हुआ हमला यह दिखाता है कि इस बेशर्म शासन के तहत कानून-व्यवस्था कितनी तेजी से बिगड़ी है। अगर विपक्ष के एक मौजूदा सांसद को दिन-दहाड़े निशाना बनाया जा सकता है, तो आम नागरिकों के लिए क्या उम्मीद बाकी है? क्या भाजपा के लिए लोकतंत्र का यही मतलब है? क्या यही वह सुशासन है, जिसके कसीदे पीएम मोदी पढ़ना बंद नहीं करते? हिंसा, डराना-धमकाना और राजनीतिक गुंडागर्दी भाजपा के शासन की पहचान बन गए हैं। जो लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें आज भले ही राजनीतिक संरक्षण मिला हो, लेकिन वे हमेशा के लिए जवाबदेही से बच नहीं सकते। बंगाल देख रहा है। भारत देख रहा है। पूरी दुनिया देख रही है।’
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक्स पोस्ट में लिखा कि बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी के ऊपर जानलेवा हमला करवाकर बंगाल की अराजक भाजपा सरकार ने साबित कर दिया है कि भाजपा नफरत भरी नकारात्मक हिंसक राजनीति के सिवा और कुछ नहीं कर सकती है। इतने संवेदनशील वातावरण में भी पुलिस की व्यवस्था न होना एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करती है। घोर निंदनीय।
वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पोस्ट में लिखा कि सोनारपुर में सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए चौंकाने वाले हमले की हम कड़ी निंदा करते हैं। वे राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित परिवारों से मिलने गए थे। एक प्रमुख विपक्षी नेता को जानबूझकर पर्याप्त पुलिस सुरक्षा न देना भाजपा की बदले की राजनीति और उत्पीड़न की मानसिकता को साफ तौर पर उजागर करता है। पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार को सभी विपक्षी नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और ऐसे हमलों को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।
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