कोलकातांः पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, घटना के बाद उनके इलाज और अस्पताल में भर्ती को लेकर नया राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है। भाजपा ने ममता बनर्जी पर अस्पताल प्रबंधन पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है, जबकि टीएमसी ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है।
गौरतलब है कि शनिवार को अभिषेक बनर्जी चुनाव बाद हिंसा में मारे गए एक टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने सोनारपुर पहुंचे थे। इसी दौरान स्थानीय लोगों के एक समूह ने उनका विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले पर अंडे और ईंट के टुकड़े फेंके तथा नारेबाजी की।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मृतक कार्यकर्ता के घर तक पैदल जाते समय कुछ लोगों ने अभिषेक बनर्जी के साथ धक्का-मुक्की की। आरोप है कि सुरक्षा घेरे के बावजूद कुछ प्रदर्शनकारियों ने उन्हें मुक्का मारने की भी कोशिश की। विरोध करने वालों में कई महिलाएं भी शामिल थीं। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे और पुलिस ने तत्काल जांच शुरू कर दी।
रातभर चला सर्च ऑपरेशन, 6 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, सोनारपुर थाने की टीम ने शनिवार रात व्यापक सर्च अभियान चलाया। घटना के वीडियो फुटेज और स्थानीय सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की जांच के बाद छह लोगों की पहचान की गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस का कहना है कि सभी आरोपी स्थानीय निवासी हैं और घटना के समय मौके पर मौजूद थे। उनसे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस विरोध प्रदर्शन और कथित हमले के पीछे और कौन लोग शामिल थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि शनिवार रात अभियान चलाया गया और रविवार सुबह तक छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। मामले की जांच जारी है।
घटना के बाद सुरक्षा बलों ने अभिषेक बनर्जी को वहां से निकाला और सबसे पहले कोलकाता के ईएम बाइपास स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचाया। बाद में उन्हें मिंटो पार्क के पास स्थित दूसरे निजी अस्पताल ले जाया गया।
दोनों अस्पतालों में चिकित्सकीय जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती करने की आवश्यकता नहीं बताई। अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल प्रमाणपत्र के अनुसार, अभिषेक बनर्जी को कोई गंभीर आंतरिक चोट नहीं मिली थी और उनकी स्थिति स्थिर थी। डॉक्टरों ने कुछ दवाइयां लेने की सलाह दी और ‘भर्ती की जरूरत नहीं’ का प्रमाणपत्र जारी किया।
ममता बनर्जी ने प्रशासनिक दबाव का लगाया आरोप

वहीं, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि दोनों अस्पतालों पर प्रशासनिक दबाव था और इसी कारण अभिषेक बनर्जी को भर्ती नहीं किया गया। ममता बनर्जी ने कहा, “पहले चुनाव में धांधली और गुंडागर्दी हुई, फिर अभिषेक पर हमला कराया गया और अब यह सुनिश्चित किया गया कि उनका उचित इलाज भी न हो सके।”
उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल अभिषेक का इलाज घर पर ही किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें बेहतर उपचार के लिए हैदराबाद ले जाया जा सकता है। ममता ने दावा किया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी उन्हें फोन कर पश्चिम बंगाल के बाहर किसी भी अस्पताल में इलाज की व्यवस्था कराने में सहयोग का आश्वासन दिया है।
भाजपा का आरोप- अस्पताल प्रबंधन पर दबाव बनाया गया
इस बीच पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता देबजीत सरकार ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि ममता बनर्जी अस्पताल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पर अभिषेक बनर्जी को भर्ती करने का दबाव बनाती दिखाई दे रही हैं।
देबजीत सरकार ने आरोप लगाया कि मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोट नहीं मिलने के बावजूद अस्पताल प्रशासन पर राजनीतिक दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा संस्थानों का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं होना चाहिए और डॉक्टरों या अस्पताल प्रबंधन पर किसी भी तरह का दबाव लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के भरोसे को कमजोर करता है।
हालांकि भाजपा के इन आरोपों पर टीएमसी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। फिलहाल अभिषेक बनर्जी अपने दक्षिण कोलकाता स्थित आवास पर हैं और पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।



