Homeविश्वसलमान रुश्दी पर चाकू से हमला करने वाला आतंकवाद के आरोपों में...

सलमान रुश्दी पर चाकू से हमला करने वाला आतंकवाद के आरोपों में दोषी करार, नवंबर में सुनाई जाएगी सजा

28 साल का हादी मातार पहले ही हत्या के प्रयास के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद 25 साल की जेल की सजा काट रहा है।

लेखक सलमान रुश्दी पर 2022 में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान चाकू से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल करने वाले हादी मातार को अमेरिकी संघीय अदालत (फेडरल कोर्ट) ने आतंकवाद से जुड़े आरोपों में दोषी करार दिया है। अभियोजन पक्ष का कहना था कि यह हमला रुश्दी की विवादित पुस्तक ‘द सैटेनिक वर्सेज’ को लेकर जारी मौत की धमकियों से प्रेरित था।

28 साल का हादी मातार पहले ही राज्य की ओर से हत्या के प्रयास के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद 25 साल की जेल की सजा काट रहा है। अब संघीय अदालत में दोषी ठहराए जाने के बाद उसे अधिकतम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। इस मामले में सजा सुनाने की तारीख 3 नवंबर तय की गई है।

अमेरिकी कानूनी प्रणाली में किसी व्यक्ति पर उसी घटना के लिए राज्य या स्थानीय कोर्ट में उनके कानूनों के तहत और फेडरल कोर्ट में फेडरल कानूनों के तहत भी मुकदमा चलाया जा सकता है।

न्यूयॉर्क के बफेलो स्थित एक अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की जूरी ने करीब दो घंटे तक विचार-विमर्श करने के बाद मातार को सभी आरोपों में दोषी ठहराया। उसे लेबनान के ईरान समर्थित उग्रवादी संगठन हिज्बुल्लाह को सहायता उपलब्ध कराने का दोषी ठहराया गया। अमेरिका काफी पहले ही हिज्बुल्लाह को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है। मातार पर सीमाओं से परे आतंकवाद में शामिल होने सहित आतंकवादियों को सहायता प्रदान करने जैसे आरोप लगाए गए थे।

मुकदमे में सलमान रुश्दी ने भी दी गवाही

पिछले मंगलवार से शुरू हुए इस मुकदमे में 79 वर्षीय सलमान रुश्दी ने भी अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में बयान दर्ज कराया। रुश्दी को उनके 1981 के उपन्यास ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रेन’ के लिए प्रतिष्ठित बुकर पुरस्कार मिल चुका है।

मुकदमे के दौरान बचाव पक्ष ने न तो मातार को और न ही किसी अन्य व्यक्ति को गवाही के लिए अदालत में पेश किया। मतर के वकील नैथेनियल बैरोन ने इस बात से इनकार नहीं किया कि उसने रुश्दी पर हमला किया था। हालांकि उनका दावा है कि हादी मतर ने यह काम अकेले किया, न कि ईरान या हिज्बुल्लाह के साथ मिलकर।

‘द सैटेनिक वर्सेज’ का विवाद

1988 में सलमान रुश्दी के उपन्यास ‘द सैटेनिक वर्सेज’ के प्रकाशित होने के बाद से उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिलती रही हैं। ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता आयतुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी ने भी इस किताब को ईशनिंदा करार दिया था। इसके बाद 1989 में उन्होंने एक धार्मिक आदेश (फतवा) जारी कर मुसलमानों से रुश्दी और पुस्तक के प्रकाशन से जुड़े लोगों की हत्या करने का आह्वान किया था।

इस फतवे के बाद रुश्दी के सिर पर कई मिलियन डॉलर का इनाम घोषित किया गया और हिंसा की कई घटनाएं भी हुईं। इनमें 1991 में उनके जापानी अनुवादक हितोशी इगाराशी की हत्या भी शामिल है।

हालांकि, 1998 में ईरानी सरकार ने खुद को इस फतवे से अलग कर लिया था। हालांकि अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय के अनुसार, 2006 में हिज्बुल्लाह ने इस फतवे का समर्थन किया और 2017 में खोमैनी के उत्तराधिकारी अली खामेनेई ने भी इसकी पुष्टि की।

सलमान रुश्दी पर जब हुआ था हमला

हमलावर के वकील ने कहा कि वह रुश्दी की ईशनिंदा को लेकर बहुत गुस्से में था। फतवा जारी होने के बाद बुकर पुरस्कार विजेता रुश्दी कई वर्षों तक ब्रिटिश सरकार की सुरक्षा में रहे। बाद में उन्होंने सार्वजनिक जीवन में वापसी की और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय से जुड़े रहे।

79 वर्षीय रुश्दी 2022 में न्यूयॉर्क शहर से लगभग 600 किलोमीटर दूर स्थित चौटाक्का इंस्टीट्यूशन में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे। वह लेखकों की सुरक्षा पर बोलने वाले थे, तभी उन पर हमला कर दिया गया। हमले के बाद के अपने अनुभवों पर रुश्दी ने ‘नाइफः मेडिटेशंस आफ्टर एन अटेम्टेड मर्डर’ शीर्षक से पुस्तक भी लिखी है।

सुनवाई के दौरान सहायक संघीय अभियोजक टिमोथी लिंच के अनुरोध पर रुश्दी ने अपना विशेष चश्मा उतारा, ताकि जूरी सदस्य हमले में खोई उनकी आंख को देख सकें। रुश्दी ने बताया कि हमले में उनकी आंख के अलावा उनका बायां हाथ भी गंभीर रूप से घायल हुआ, जिसके कारण वह अब गाड़ी नहीं चला सकते। उन्होंने कहा कि हमले में उनका लिवर भी क्षतिग्रस्त हुआ था।

गौरतलब है कि रुश्दी, जिन्होंने फतवे के शुरुआती दस वर्षों तक छिपकर जीवन बिताया था, उनके सिर, गर्दन, धड़ और बाएं हाथ पर एक दर्जन से अधिक बार चाकू से वार किए गए। इस हमले में उनकी दाहिनी आंख की रोशनी चली गई। हमले में एक अन्य व्यक्ति भी घायल हुआ था।

हमले के दौरान कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने मंच पर दौड़कर हमलावर को काबू में कर लिया था। अमेरिका में जन्मे और लेबनान की नागरिकता रखने वाला हमलावर हादी मातार न्यू जर्सी के फेयरव्यू में रहता था।

बताते चलें कि भारत में एक मुस्लिम कश्मीरी परिवार में जन्मे सलमान रुश्दी बाद में ब्रिटेन और अमेरिका के नागरिक बने। 1990 के दशक का अधिकांश समय उन्होंने ब्रिटिश पुलिस की सुरक्षा में गुप्त स्थानों पर बिताया। बाद में उन्होंने सार्वजनिक जीवन में वापसी की और न्यूयॉर्क शहर में रहने लगे।

(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)

यह भी पढ़ें- ‘भारत-अमेरिका ट्रेड डील का पहला चरण तैयार, लेकिन…’, पीयूष गोयल ने बताया कब तक लागू होगा व्यापार समझौता

author avatar
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular