Saturday, May 2, 2026
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बंद हो गई ये एयरलाइन, ईरान जंग में ईंधन की मार के बीच विमानन क्षेत्र में पहला बड़ा नुकसान

ईरान युद्ध ने वैश्विक विमानन क्षेत्र को कोविड-19 महामारी के बाद से सबसे गहरे संकट में धकेला है। इससे एयरलाइंस बढ़ती लागत और परिचालन संबंधी बाधाओं के आगे संघर्ष कर रही हैं।

न्यूयॉर्क: दिवालिया हो चुकी अमेरिका की बजट एयरलाइन स्पिरिट एयरलाइंस (Spirit Airlines) ने परिचालन बंद कर दिया है। यह ईरान युद्ध के बीच पहली बड़ी विमानन कंपनी है जिसे बड़ा नुकसान हुआ है और परिचालन बंद करना पड़ा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार अमेरिकी सरकार समर्थित बचाव योजना के बावजूद लेनदारों का समर्थन हासिल करने में विफल रहने के बाद यह घटनाक्रम सामने आया है।

वहीं, समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार एयरलाइन ने कहा है कि उसने ‘तत्काल प्रभाव से अपने परिचालन को व्यवस्थित रूप से बंद करना शुरू कर दिया है।’ एयरलाइन ने बताया है कि सभी उड़ानें रद्द कर दी गई हैं और यात्रियों को हवाई अड्डों पर न जाने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही इस कम किराये के लिए जानी जाने वाली इस एयरलाइन का 34 वर्षों का सफर समाप्त हो गया। यह कभी अमेरिका की लगभग 5% उड़ानों का संचालन करती थी और लगभग 17,000 लोग इसके लिए काम करते थे।

रॉयटर्स के अनुसार एयरलाइन का बंद होना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी एक झटका है, जिनके प्रशासन ने 90% इक्विटी के बराबर वारंट के बदले 50 करोड़ डॉलर के बेलआउट का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, बातचीत पर कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका।

ईरान जंग से हुए हालात और खराब

रिपोर्ट के अनुसार ईरान संघर्ष के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधा के बाद जेट ईंधन की कीमतों में अचानक हुई वृद्धि एयरलाइंस के बंद होने की तात्कालिक वजह रही। स्पिरिट एयरलाइंस ने कहा है कि ‘तेल की कीमतों में हाल ही में हुई भारी वृद्धि और कारोबार पर अन्य दबावों ने इसकी वित्तीय स्थिति पर बड़ा प्रभाव डाला है।’

रिपोर्ट के अनुसार एयरलाइंस के पुनर्गठन योजना में 2026 में जेट ईंधन की कीमत लगभग 2.24 डॉलर प्रति गैलन रहने का अनुमान लगाया गया था। हालांकि, हालात ऐसे बने कि अप्रैल के अंत तक लागत बढ़कर लगभग 4.51 डॉलर हो गई, जिससे दिवालियापन से बाहर निकलने की इसकी रणनीति प्रभावी रूप से विफल हो गई।

जेट का ईंधन आमतौर पर एयरलाइन के परिचालन खर्चों का लगभग एक चौथाई हिस्सा होता है। ऐसे में छोटी और लो-कॉस्ट एयरलाइंस ईंधन के ऊपर-नीचे होती कीमतों से सबसे अधिक प्रभावित होती हैं।

कोविड के बाद से जूझ रहा एविएशन सेक्टर

ईरान युद्ध ने वैश्विक विमानन क्षेत्र को कोविड-19 महामारी के बाद से सबसे गहरे संकट में धकेला है। इससे एयरलाइंस बढ़ती लागत और परिचालन संबंधी बाधाओं को झेलने के लिए संघर्ष कर रही हैं। स्पिरिट की विफलता इस बात को उजागर करती है कि कमजोर एयरलाइंस सबसे पहले प्रभावित हो रही हैं।

कोविड के दौरान विमानन सबसे बुरे दौर से गुजरने वाले सेक्टर में शामिल था। यात्राएं कम होने से कई देशों में बड़ी एयरलाइंस कंपनियां तक दबाव में आ गई थी। स्पिरिट भी कोविड के बाद से दबाव में थी। यात्रियों ने कम किराए वाली उड़ानों से हटकर अधिक आरामदायक उड़ानों की ओर रुख किया है। इससे अल्ट्रा-लो-कॉस्ट मॉडल कमजोर पड़ गया है। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, इस शटडाउन से हजारों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। स्पिरिट एयरलाइंस ने फरवरी में लगभग 17 लाख घरेलू यात्रियों को यात्रा कराई, हालांकि इसकी बाजार हिस्सेदारी एक साल पहले के 5.1% से घटकर 3.9% रह गई थी।

भारत में भी एविएशन सेक्टर पर भारी दबाव

ईरान जंग का असर भारत में एविएशन सेक्टर पर भी पड़ने लगा है। इसका संकेत में हाल ही में एयरलाइंस कंपनियों द्वारा सरकार को लिखी चिट्ठी से मिला है। दरअसल, कई एयरलाइंस ने सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि ईंधन की ऊंची कीमतों के कारण वे ऑपरेशन रोकने की कगार पर हैं। इन एयरलाइंस में एअर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट शामिल हैं।

इन एयरलाइंस कंपनियों ने सरकार से एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ की कीमतों में बदलाव करने की मांग की है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस यानी एफआईए ने सिविल एविएशन मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा है कि एटीएफ की कीमत में अतार्किक वृद्धि या एड-हॉक प्राइसिंग से एयरलाइंस को भारी नुकसान होगा और विमानों को खड़ा करना पड़ेगा, जिससे फ्लाइट रद्द होंगी।

इस बीच ऐसी भी खबरें हैं कि सरकार अमेरिकी-ईरान युद्ध से सबसे ज्यादा प्रभावित सेक्टरों को राहत देने के लिए एक बड़े पैकेज की घोषणा पर काम कर रही है। इसके तहत विशेष रूप से विमानन क्षेत्र के लिए बड़ी क्रेडिट स्कीम या पैकेज की घोषणा की जा सकती है।

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विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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