ईरान के साथ जारी संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी प्रशासन के भीतर और बाहर जुबानी जंग तेज हो गई है। एक ओर जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमताओं के पूरी तरह ध्वस्त होने का दावा किया है, वहीं दूसरी ओर रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को भारी-भरकम रक्षा बजट और युद्ध की रणनीति को लेकर संसद में तीखे विरोध का सामना करना पड़ा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के कारण ईरान काफी कमजोर हो चुका है और अब वह बातचीत के लिए उत्सुक है। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना और वायुसेना पूरी तरह खत्म हो चुकी है। उनके ड्रोन कारखानों में 82 प्रतिशत और मिसाइल उत्पादन में लगभग 90 प्रतिशत की गिरावट आई है।
ट्रंप ने दोहराया कि तेहरान को कभी भी ‘परमाणु शक्ति’ नहीं बनने दिया जाएगा और अमेरिका ने उनकी परमाणु क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। ईरान पर आर्थिक नाकाबंदी बेहद कड़ी है और तेल से उसे कोई आय नहीं हो रही है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था गिर रही है। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के भीतर यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तविक नेता कौन है, जिससे वहां अस्थिरता बढ़ गई है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिख रहा है। खासकर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
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ईरान संघर्ष और 1.5 ट्रिलियन डॉलर के बजट पर सवाल

इसी बीच, अमेरिकी सीनेट में ईरान संघर्ष और प्रस्तावित 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट को लेकर जोरदार बहस हुई। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सामने लगभग छह घंटे तक कड़े सवालों का सामना करना पड़ा।
डेमोक्रेटिक सांसदों ने प्रशासन के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना स्पष्ट रणनीति के अमेरिका एक “गलत युद्ध” में उलझ गया है। सीनेटर जैक रीड ने युद्ध के मानवीय और आर्थिक नुकसान की ओर इशारा करते हुए कहा कि जीत के दावे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जा रहे हैं।
हालांकि, हेगसेथ ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है और ईरान की रक्षा क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया गया है।
सुनवाई के दौरान युद्ध की लागत और आम नागरिकों पर उसके असर को लेकर भी तीखे सवाल उठे। सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड ने कहा कि अमेरिकी जनता बढ़ती महंगाई, ईंधन कीमतों और खाद्य खर्च से परेशान है। उन्होंने पूछा कि आखिर इस युद्ध की कीमत नागरिक कब तक चुकाते रहेंगे।
सीनेटर मार्क केली ने भी सैन्य अभियानों के पैमाने और हथियारों के भंडार पर पड़ रहे दबाव को लेकर चिंता जताई। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम मार्गों पर असर के बावजूद इस संघर्ष के स्पष्ट लक्ष्य नजर नहीं आते।
सुनवाई में नागरिक हताहतों और युद्ध के नियमों को लेकर भी बहस तेज रही। अस्पतालों और स्कूलों पर हमलों की रिपोर्ट पर सवाल उठे, जिस पर रक्षा मंत्री ने कहा कि अमेरिकी सेना कभी नागरिकों को निशाना नहीं बनाती और नुकसान कम करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाते हैं।
वहीं, सीनेटर टिम केन ने युद्ध की वैधता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या प्रशासन कांग्रेस से औपचारिक मंजूरी लेगा। इस पर हेगसेथ ने कहा कि सैन्य कार्रवाई तय नियमों के तहत की जा रही है।
आईएएनएस इनपुट के साथ

