कोलकाताः कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा दायर अंतरिम याचिका को खारिज कर दिया है। इसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए राज्य सरकार या राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों को सुपरवाइजर या मतगणना सहायक के रूप में नियुक्ति से बाहर रखे जाने को चुनौती दी गई थी। इसमें सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों को ही सुपरवाइजर के तौर पर नियुक्ति का आरोप लगाया गया था।
अदालत ने कहा ” मतगणना पर्यवेक्षक और मतगणना सहायक की नियुक्ति राज्य सरकार या केंद्र सरकार से करने का अधिकार भारत निर्वाचन आयोग के कार्यालय को प्राप्त है। न्यायालय को केंद्र सरकार/केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के कर्मचारी से मतगणना पर्यवेक्षक और मतगणना सहायक की नियुक्ति में कोई अवैधता नहीं मिली है, जबकि राज्य सरकार के कर्मचारी को नियुक्त किया जाना चाहिए। “
TMC की याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट ने की खारिज
इस मामले की सुनवाई जस्टिस कृष्णा राव ने की। बुधवार (29 अप्रैल) को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिया था कि प्रत्येक मतगणना केंद्र पर कम से कम एक व्यक्ति केंद्र सरकार का कर्मचारी होना अनिवार्य है। राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने इस आदेश के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की थी।
बार एंड बेंच की खबर के मुताबिक, गुरुवार (30 अप्रैल) को अपने फैसले में न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने टीएमसी के इस दावे को खारिज कर दिया कि केंद्र सरकार के कर्मचारी केंद्र में सत्ताधारी भाजपा के सुझावों और नियंत्रण से प्रभावित हो सकते हैं।
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अदालत ने कहा कि मतगणना कक्ष में केवल मतगणना पर्यवेक्षक और मतगणना सहायक ही नहीं होंगे। उन्होंने आगे कहा कि सूक्ष्म पर्यवेक्षक, चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के एजेंट और मतगणना कर्मी भी वहां मौजूद रहेंगे।
सुपरवाइजर की तैनाती का विशेषाधिकार चुनाव आयोग के पास
जस्टिस राव ने यह भी कहा कि मतगणना पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) और मतगणना सहायक की नियुक्ति राज्य सरकार या केंद्र सरकार से करने का चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है। उन्होंने आगे कहा, “यह न्यायालय राज्य सरकार के कर्मचारी के बजाय केंद्र सरकार/केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के कर्मचारी से मतगणना पर्यवेक्षक और मतगणना सहायक की नियुक्ति में कोई अवैधता नहीं पाता है।”
गौरतलब है कि टीएमसी के सांसद कल्याण बनर्जी ने यह याचिका दायर की थी। इसके अलावा अधिवक्ता बिश्वरूप भट्टाचार्य ने भी याचिका दायर की थी। कल्याण बनर्जी ने दावा किया था कि चुनाव वाले किसी अन्य राज्य में ऐसी नियुक्तियां नहीं की गईं और उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को ऐसा करने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।
बनर्जी ने दावा किया कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को मतदान ड्यूटी के लिए बुलाया गया था, लेकिन मंगलवार (28 अप्रैल) को मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा जारी एक आदेश के द्वारा उन्हें मतगणना पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त होने से बाहर रखा गया था।
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पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों में मतदान हुआ था। पहले चरण में 152 सीटों के लिए मतदान हुआ वहीं दूसरे चरण के लिए 142 सीटों पर मतदान हुआ।

