Wednesday, April 22, 2026
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बंगाल चुनाव: 17 सीटों पर महिला मतदाता तय करेंगी हार-जीत, जानें किन विधानसभाओं में पुरुष मतदाताओं से आगे हैं महिलाएं

जहां एक तरफ महिला मतदाता निर्णायक बनती जा रही हैं, वहीं उम्मीदवारों के रूप में उनकी हिस्सेदारी अब भी सीमित है। पश्चिम बंगाल इलेक्शन वॉच के मुताबिक 2026 के चुनाव में केवल 13% उम्मीदवार महिलाएं हैं, जो 2021 के 11% से थोड़ा ही ज्यादा है। यानी वोट देने में महिलाएं आगे हैं, लेकिन टिकट देने में पार्टियां अभी भी पीछे हैं।

बंगाल में पहले चरण के मतदान के लिए प्रचार अभियान खत्म हो चुका है। 23 अप्रैल को पहले फेज के लिए मतदान होने वाले हैं। बंगाल में ऐसी 17 विधानसभा सीटें हैं, जहां महिला वोटर पुरुषों से ज्यादा हैं और यही वजह है कि इन सीटों पर जीत-हार का फैसला काफी हद तक महिलाओं के रुख पर टिका हुआ है। पहले चरण में 8 और दूसरे चरण में 9 ऐसी सीटें हैं, जहां राजनीतिक दलों की रणनीति का केंद्र महिला मतदाता बन चुकी हैं।

पहले चरण की जिन 8 सीटों पर महिलाओं की संख्या ज्यादा है, उनमें समसेरगंज, बरहामपुर, खड़गपुर सदर, मेदिनीपुर, बिनपुर, बंदवान, दुर्गापुर पूर्व और रामपुरहाट शामिल हैं। पिछली बार इनमें से 6 सीटें तृणमूल कांग्रेस ने जीती थीं, जबकि भाजपा को 2 सीटें मिली थीं। कांग्रेस की बात करें तो उसकी सीमित मौजूदगी में थी, लेकिन इस बार सभी सीटों पर उतरकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इन सीटों पर अभी भी मुकाबला टीएमसी बनाम भाजपा होने वाला है।

विधानसभा सीटपुरुष मतदातामहिला मतदाता
समसेरगंज78,00483,430
बरहामपुर1,18,7411,22,079
खड़गपुर सदर88,98091,542
मेदिनीपुर1,28,8481,31,447
बिनपुर1,10,2501,10,873
बंदवान1,45,3791,40,587*
दुर्गापुर पुरब1,18,4001,18,726
रामपुरहाट1,21,6311,23,527

दूसरे चरण में महिला मतदाताओं का प्रभाव और ज्यादा दिखाई देता है। बिधाननगर, सोनारपुर दक्षिण, जादवपुर, सोनारपुर उत्तर, टालीगंज, बेहाला पूर्व, बेहाला पश्चिम, राशबेहारी और शिवपुर जैसी सीटों पर महिलाओं की संख्या पुरुषों से आगे है। इन शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में महिला मतदाताओं के मुद्दे भी अलग है। यहां महंगाई, सुरक्षा, रोजगार और सामाजिक योजनाएं यहां प्रमुख भूमिका निभाती हैं।

विधानसभा सीटपुरुष मतदातामहिला मतदाता
बिधान नगर98,8911,04,979
सोनार दक्षिण1,28,9601,32,016
जादवपुर1,24,5291,36,288
सोनारपुर उत्तर1,35,6661,37,535
टालीगंज1,10,6631,19,323
बेहाला पूर्व1,26,0111,33,735
बेहाला पश्चिम1,28,6081,37,562
रासबेहारी76,26382,137
शिबपुर96,19398,766

गौरतलब है कि संसद में महिला आरक्षण विधेयक का गिरना भी चुनावी बहस का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। बंगाल के बांकुड़ा जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस 2029 में महिला आरक्षण देने के लिए विधेयक को पारित करने से रोकने में कांग्रेस के साथ शामिल रही है। हालांकि विपक्ष कह रहा है कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में लाया जा चुका है। टीएमसी ने इसे राजनीतिक मकसद से लाया गया कदम करार दिया। इस बात से इनकार नहीं किया जा रहा कि बंगाल की महिला-बहुल सीटों पर यह बहस अब सीधे वोटों के ध्रुवीकरण का कारण बन सकती है।

बंगाल चुनाव में महिला उम्मीदवारों की भागीदारी?

जहां एक तरफ महिला मतदाता निर्णायक बनती जा रही हैं, वहीं उम्मीदवारों के रूप में उनकी हिस्सेदारी अब भी सीमित है। पश्चिम बंगाल इलेक्शन वॉच के मुताबिक 2026 के चुनाव में केवल 13% उम्मीदवार महिलाएं हैं, जो 2021 के 11% से थोड़ा ही ज्यादा है। यानी वोट देने में महिलाएं आगे हैं, लेकिन टिकट देने में पार्टियां अभी भी पीछे हैं।

अगर पिछले दो दशकों का रुझान देखें तो तस्वीर साफ हो जाती है। 1990 के दशक और शुरुआती 2000 तक महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से कम था, लेकिन 2006 के बाद स्थिति तेजी से बदली। 2011 में पहली बार महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से आगे निकला और यही चुनाव राज्य की सत्ता परिवर्तन का भी कारण बना। इसके बाद 2016 और 2021 में भी यह ट्रेंड जारी रहा। अब तो कई सीटों पर महिलाओं की संख्या ही पुरुषों से ज्यादा हो चुकी है।

संख्या के लिहाज से भी महिला मतदाताओं की ताकत बढ़ी है। 1996 में जहां करीब 2.16 करोड़ महिला मतदाता थीं, वहीं 2021 तक यह संख्या 3.5 करोड़ से ज्यादा हो गई। मौजूदा चुनाव में भी करोड़ों की संख्या में महिला वोटर हैं, जो चुनावी समीकरण बदलने की क्षमता रखती हैं।

यही वजह है कि राजनीतिक दल महिलाओं को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। तृणमूल कांग्रेस पहले से ही लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री और रूपाश्री जैसी योजनाओं के जरिए महिला वोट बैंक को मजबूत करने में जुटी है। वहीं भाजपा ने भी अपने वादों में महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। यानी चुनावी मुकाबला अब सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि महिला मतदाताओं के भरोसे का भी बन चुका है।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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