लखनऊ: उत्तर प्रदेश में हाल में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर- UP SIR) की फाइनल लिस्ट भाजपा की चिंता बढ़ा सकती है। लिस्ट के अनुसार भाजपा के पांच सबसे अहम चेहरों के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गांधी परिवार के गढ़ों की तुलना में अधिक नाम कटे हैं।
फाइनल मतदाता सूची से यह भी पता चलता है कि गोरखपुर और महाराजगंज को छोड़कर उत्तर प्रदेश के अधिकांश हाई प्रोफाइल संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं के नामों की औसत कटौती 2022 के विधानसभा चुनावों में औसत जीत के अंतर से अधिक है।
लिस्ट का विश्लेषण करते हुए इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि भाजपा की पांच, सपा की पांच और कांग्रेस की दो प्रमुख सीटों में से भाजपा के गढ़ में 15.28% मतादाओं की कमी, जबकि सपा की पांच सीटों पर 12.06% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, कांग्रेस के दो निर्वाचन क्षेत्रों में औसतन 12.1% की कमी दर्ज की गई।
वाराणसी में बड़ी संख्या में कटे नाम
रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में औसत 15.63% की गिरावट दर्ज की गई है। पीएम मोदी 2014 से वाराणसी का लोक सभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इससे पहले 2009 में यहां से मुरली मनोहर जोशी जीते थे।
वाराणसी संसदीय क्षेत्र में वाराणसी कैंटोनमेंट विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या में 19.87% की भारी गिरावट हुई है। एक भाजपा नेता के अनुसार, ‘वाराणसी कैंटोनमेंट एक शहरी क्षेत्र है जहां प्रवासी मतदाताओं की आबादी काफी अधिक थी। एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं ने अपने पैतृक गांवों की ओर रुख किया। लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव बूथवार मतदाता सूची के विश्लेषण में ही पता चलेगा, जो अभी शुरू होना बाकी है।’
कहानी वाराणसी तक नहीं, बढ़ेगी भाजपा की टेंशन?
ऐसा नहीं है कि वाराणसी में बड़ी संख्या में वोटरों के नाम कटे हैं। भाजपा के गढ़ माने जाने वाले कई और सीटों का यही हाल है। मसलन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सीट लखनऊ में औसतन 28.73 प्रतिशत मतदाता कम हुए हैं। सबसे ज्यादा लखनऊ कैंटोनमेंट में 34.18 प्रतिशत वोटर कम हुए हैं। यह डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक यहां से जीत हासिल कर विधायक हैं। लखनऊ को भाजपा का गढ़ माना जाता है। यहां से लगातार 9 चुनाव भाजपा ने जीते हैं। यहाँ उच्च जाति और शिया मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी खासी आबादी है।
ऐसे ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की सीट महाराजगंज में वोटरों की संख्या में कमी का आंकड़ा 10.04 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में औसतन 9.71 प्रतिशत नाम कटे हैं।
गोरखपुर लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर शहरी विधानसभा क्षेत्र में सबसे कम 6.88% नाम कटे हैं। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से पांच बार सांसद रह चुके हैं, जबकि वर्तमान में यह सीट अभिनेता से राजनेता बने रवि किशन के पास है।
सपा और कांग्रेस वाले गढ़ का क्या हाल है?
सपा के यादव परिवार की सीटों की बात करें तो पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव कन्नौज से सांसद हैं। उनकी पत्नी डिंपल मैनपुरी से सांसद हैं। जबकि चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव, अक्षय यादव और आदित्य यादव क्रमशः आजमगढ़, फिरोजाबाद और बदायूं से सांसद हैं। इन सीटों पर यादव मतदाताओं का दबदबा है और मुस्लिम आबादी भी काफी अधिक है।
इन पांचों सीटों पर औसत 12.06% मतदाताओं की कमी आई है। जबकि सबसे अधिक 16.65% मतदाताओं के नाम बदायूं में कटे हैं। कन्नौज में यह आंकड़ा 14.47% है। कन्नौज के छिबरामऊ विधानसभा क्षेत्र में, जहां भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनावों में 1,111 वोटों के मामूली अंतर से जीत हासिल की थी, वहां 20.6% नाट कटे हैं। सपा ने 1999 से अब तक कन्नौज लोकसभा सीट छह बार जीती है।
बात कांग्रेस की करें तो रायबरेली और अमेठी में औसत 12.1% नाम कटे हैं। अमेठी में कुल 12.97% और रायबरेली में 11.24% नाम कटे हैं। रायबरेली में सबसे अधिक 14.76% नाम रायबरेली विधानसभा क्षेत्र में कटे हैं। साल 2022 में रायबरेली में यही एकमात्र सीट भाजपा ने जीती थी। सपा ने अन्य चार क्षेत्रों में जीत हासिल की थी।
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