गुरूवार, अप्रैल 16, 2026
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‘भाजपा नारी को नारा में बदलने की कोशिश कर रही है’, डीलिमिटेशन बिल पर लोक सभा में बोले अखिलेश यादव

लोक सभा में अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का स्वागत करती है। हालांकि, उन्होंने इसके कार्यान्वयन में सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाए।

नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने गुरुवार को लोक सभा में भाजपा पर जमकर हमला करते हुए कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी जाति आधारित जनगणना में देरी करना चाहती है। अखिलेश यादव ने कहा कि अगर जनगणना हुई तो केंद्र सरकार को जाति आधारित आंकड़े जारी करने होंगे और पिछड़े समुदायों के लिए जाति आधारित आरक्षण लागू करना होगा, इसलिए देरी की जा रही है।

लोक सभा में अखिलेश यादव ने कहा समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का स्वागत करती है, जिसके तहत संसद में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। हालांकि सपा प्रमुख ने इसके कार्यान्वयन में सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाए।

‘नारी को नारे में बदल रही है भाजपा’

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा ‘नारी को नारों में बदल रही है।’ उन्होंने कहा, ‘समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में है। हमने हमेशा महिलाओं के उत्थान के लिए काम किया है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी एक नारी को नारा बनाने की कोशिश कर रही है। भाजपा को जवाब देना होगा कि जिन 21 राज्यों में उनकी सरकार है, उनमें से कितने राज्यों में महिला मुख्यमंत्री हैं? यहां तक ​​कि आपकी दिल्ली की मुख्यमंत्री को भी मुख्यमंत्री के अधिकार नहीं हैं, वह ‘आधी मुख्यमंत्री’ हैं। मैं जानना चाहता हूं कि इतनी जल्दी क्यों है?’

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा जाति आधारित जनगणना में देरी करना चाहती है। उन्होंने कहा कि भाजपा जाति आधारित जनगणना से बचना चाहती है ताकि जाति आधारित आंकड़ों को सार्वजनिक न किया जाए, क्योंकि इससे उन्हें पिछड़े समुदायों को जाति आधारित आरक्षण देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

उन्होंने कहा, ‘सच तो यह है कि भाजपा जाति आधारित जनगणना में देरी करना चाहती है। भाजपा का चुनावी छल बेनकाब हो चुका है। जब हमने फॉर्म 7 और एसआईआर घोटालों में मतदाताओं के नाम काटे जाने का पर्दाफाश किया, तो भाजपा ये विधेयक लेकर आई। इस बार भाजपा महिलाओं का इस्तेमाल करके खेल खेल रही है, लेकिन वह सफल नहीं होगी।’

उन्होंने आगे कहा, ‘भाजपा इस संशोधन के नाम पर जो जल्दबाजी दिखा रही है, उसके पीछे एक छुपा हुआ मकसद है। भाजपा जनगणना कराने से बचना चाहती है। इसका कारण यह है कि यदि जनगणना कराई गई, तो उन्हें जाति आधारित आंकड़े जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा और परिणामस्वरूप, पिछड़े समुदायों के लिए जाति आधारित आरक्षण लागू करना पड़ेगा। यह भाजपा की ओर से रची गई एक बड़ी साजिश है।’

‘सपा सभी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है’

इससे पहले बिल के पेश किए जाने के समय गृह मंत्री अमित शाह और अखिलेश यादव के बीच थोड़ी देर के लिए वाद-विवाद देखने को मिला। दरअसल, बिल पेश किए जाने पर अखिलेश यादव ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के बाद मुस्लिम महिलाओं को अलग से आरक्षण मिलना चाहिए। अखिलेश ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार जनगणना का इंतजार क्यों नहीं कर रही है और कहा कि उनकी पार्टी जातिगत जनगणना की मांग करेगी।

इस पर जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि जनगणना प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और सरकार ने जाति जनगणना कराने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि घर-घर जाकर गिनती का काम चल रहा है। अभी मकानों की गिनती हो रही है और दूसरे चरण में नागरिकों की गिनती होगी।

मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण पर शाह ने कहा कि धर्म आधारित रिजर्वेशन संविधान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण स्वीकार्य नहीं है और मुसलमानों को धार्मिक आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक होगा। साथ ही समाजवादी पार्टी पर तंज कसते हुए शाह ने कहा कि अखिलेश यादव पार्टी चाहें तो अपनी पार्टी के सभी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकते हैं, ‘हमें कोई आपत्ति नहीं है।’

यह भी पढ़ें- महिला आरक्षण और परिसीमन: नए बिल में क्या कुछ है, 850 हो जाएंगी लोकसभा सीटें; दक्षिण के राज्यों पर विवाद क्यों?

संसद का तीन दिनों का विशेष सत्र

गौरतलब है कि गुरुवार को तीन विधेयकों को ध्वनि मत से प्रस्तुत करने के विरोध में विभाजन की विपक्ष की मांग और फिर वोटिंग के बाद संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किए गए। वोटिंग के दौरान 251 मत पक्ष में और 185 मत विपक्ष में पड़े। लोकसभा आमतौर पर कोई बिल पेश करने के लिए ध्वनि मत का इस्तेमाल होता है। हालांकि, लेकिन यदि इसे चुनौती दी जाती है, तो वोटिंग का सहारा लिया जाता है।

बताते चलें कि सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण) में संशोधन पारित करने के लिए 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया है। सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर 2029 के लोकसभा चुनावों से महिला आरक्षण विधेयक को लागू करना चाहती है और इसलिए संशोधन विधेयक पर चर्चा हो रही है।

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विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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