Friday, March 20, 2026
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जुबीन गर्ग की मौत डूबने से हुई, बहुत ज्यादा नशे में थे…लाइफ जैकेट पहनने से इनकार किया था: सिंगापुर पुलिस

इधर भारत में भी जुबीन गर्ग की मौत पर जांच चल रही है। इसके लिए असम सरकार ने एसआईटी भी बनाई है और कुछ गिरफ्तारियां हुई हैं।

नई दिल्ली: सिंगापुर पुलिस ने जुबीन गर्ग की मौत को लेकर किसी भी तरह की साजिश से इनकार किया है। पुलिस ने कोर्ट में सौंपी अपनी रिपोर्ट ये बात कही है। सिंगापुर पुलिस के अनुसार जुबीन गर्ग पिछले साल सितंबर में लाजरस आइलैंड (Lazarus Island) के पास समुद्र में जब डूबे तब बहुत ज्यादा नशे में थे। पुलिस के अनुसार हादसे के समय वे बिना लाइफ जैकेट के थे। 52 साल के गर्ग की मौत 19 सितंबर, 2025 को हुई थी, जब वह एक प्राइवेट यॉट पार्टी में गए थे। यह घटना सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में उनके परफॉर्मेंस से एक दिन पहले हुई थी।

सामने आई जानकारी के अनुसार मामले पर मुख्य जांच अधिकारी ने कोर्ट बताया कि गर्ग उन 20 से ज्यादा लोगों में शामिल थे, जिनमें उनके दोस्त और सहकर्मी भी थे। ये सभी एक यॉट पर थे और वहां शराब पी गई थी। अधिकारी के मुताबिक गर्ग शुरू में लाइफ जैकेट पहनकर पानी में उतरे थे, लेकिन बाद में उन्होंने उसे उतार दिया। जब उन्होंने दोबारा तैरने का फैसला किया, तो उन्हें एक दूसरी, छोटी लाइफ जैकेट दी गई, जिसे उन्होंने लेने से मना कर दिया था।

चैनल न्यूज एशिया की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारी ने कोर्ट को बताया, ‘वह बिना लाइफ जैकेट के पानी में उतरे और अकेले लाजरस आइलैंड की तरफ तैरने लगे।’

पानी में संघर्ष करते नजर आए थे जुबीन गर्ग

पुलिस के अनुसार कई गवाहों ने जांचकर्ताओं को बताया कि उन्होंने गर्ग को वापस यॉट की तरफ तैरने की कोशिश करते देखा, जिसके बाद वह बेहोश हो गए और पानी में मुंह के बल तैरने लगे। उन्हें वापस नाव पर खींचा गया, जहां कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) दिया गया। उसी दिन बाद में गर्ग को मृत घोषित कर दिया गया। पोस्टमार्टम में मौत का कारण डूबना बताया गया था। गर्ग के शरीर पर मिले जख्म बचाव और CPR की कोशिशों की वजह से थे। पुलिस ने कहा कि इसमें किसी गड़बड़ी का कोई संकेत नहीं मिला है।

टॉक्सिकोलॉजी टेस्ट में ये भी पता चला कि गर्ग के खून में अल्कोहल की मात्रा 100 मिलीलीटर खून में 333 मिलीग्राम थी, जो गंभीर नशे और रिफ्लेक्सिस में कमी का संकेत देता है। सिंगापुर में कानूनी लिमिट 100 मिलीलीटर खून में 80 मिलीग्राम अल्कोहल है।

गर्ग के होटल के कमरे से 43 प्रतिशत अल्कोहल वाली स्कॉच व्हिस्की की 750 मिलीलीटर की एक बोतल भी जब्त की गई, जो लगभग 25 प्रतिशत भरी हुई थी। कई गवाहों ने बताया कि गर्ग नाव पर शराब पी रहे थे। एक गवाह ने बताया कि उन्होंने जिन (gin) और व्हिस्की सहित कई कप शराब पी और गिनीज स्टाउट के घूंट भी लिए।

जांच अधिकारी ने बताया कि गर्ग अपनी पहली तैराकी के बाद नाव पर लौटे और उन्हें यह कहते हुए सुना गया कि वह थक गए हैं। इसके कुछ देर बाद उन्होंने फिर से पानी में जाने का फैसला किया।

कोर्ट को यह भी बताया गया कि गर्ग को उच्च रक्तचाप और मिर्गी की बीमारी थी। उन्हें आखिरी बार 2024 में मिर्गी का दौरा पड़ा था। उनके खून में दोनों बीमारियों की दवाएं पाई गईं। हालांकि, जांचकर्ताओं ने कहा कि यह पक्का नहीं हो पाया कि घटना वाले दिन उन्होंने मिर्गी की दवा ली थी या नहीं, क्योंकि चश्मदीदों के बयान इसे लेकर स्पष्ट ​​नहीं थे। फोरेंसिक पैथोलॉजिस्ट ने गवाही दी कि ऐसे कोई संकेत नहीं थे, जैसे कि जीभ कटी होना, जिससे यह पता चल सके कि गर्ग को दौरा पड़ा था या नहीं।

भारत में जुबीन गर्ग की मौत पर चल रही अलग जांच

इधर भारत में भी जुबीन गर्ग की मौत पर जांच चल रही है। इसके लिए असम सरकार ने एसआईटी भी बनाई है और कुछ गिरफ्तारियां हुई हैं। इनमें गर्ग के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा, फेस्टिवल ऑर्गनाइजर श्यामकानु महंत और उनके चचेरे भाई डीएसपी संदीपान गर्ग को असम पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

कई तरह की साजिश की थ्योरी सामने आई हैं, जिनमें यह दावा भी शामिल है कि 52 साल के सिंगर को जहर दिया गया था। उनके बैंडमेट शेखर ज्योति गोस्वामी, जिन्हें हिरासत में भी लिया गया था, उन्होंने आरोप लगाया कि गर्ग को उनके मैनेजर और इवेंट ऑर्गनाइजर ने जहर दिया था। उन्होंने दावा किया कि इस काम को छिपाने के लिए एक विदेशी जगह चुनी गई थी।

हालांकि, सिंगापुर पुलिस ने लगातार इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि सिंगर की मौत में कोई साजिश नहीं है।

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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