नई दिल्लीः राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में जल आपूर्ति अगले एक-दो दिनों के लिए बाधित रह सकती है। इसकी वजह यमुना नदी के पानी में अमोनिया का बढ़ता स्तर और पड़ोसी राज्य हरियाणा से पानी की आपूर्ति में कमी है। बीते दिनों दिल्ली के कुछ इलाकों में जल आपूर्ति बाधित हुई जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इन दिनों दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। ऐसे में एक तरफ लोग गर्मी की मार झेल रहे हैं और जल आपूर्ति बाधित होने से दोहरी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
अधिकारियों ने मंगलवार (19 मई) को बताया कि यमुना नदी के पानी में अमोनिया का जलस्तर बढ़ा है।
यमुना में अमोनिया के बढ़ते जल स्तर पर क्या बोले अधिकारी?
अधिकारियों के मुताबिक, जल आपूर्ति में बाधा का कारण दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के दो जल उपचार संयंत्र (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स) नदी के पानी में अमोनिया के उच्च स्तर के चलते उत्पादन कम कर रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर समेत आसपास के इलाकों में इन दिनों तापमान उच्च स्तर पर है। बुधवार (20 मई) को उच्चतम तापमान 44.5 डिग्री रहा। वहीं मंगलवार (19 मई) को उच्चतम तापमान 45.1 डिग्री दर्ज किया गया था।
दिल्ली में आने वाले कुछ दिनों के लिए भीषण गर्मी के प्रकोप को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
टेलीग्राफ ने एक दिल्ली जल बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से लिखा कि वजीराबाद जल उपचार संयंत्र की उत्पादन क्षमता 10 फीसदी तक घटी है। वहीं, चंद्रावल जल उपचार संयंत्र की उत्पादन क्षमता 15 फीसदी तक घटी है।
अधिकारी ने आगे बताया कि दिल्ली जल बोर्ड हरियाणा सरकार से जल आपूर्ति बढ़ाने की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि आशा है कि परिस्थिति एक या दो दिनों में सुधरेगी।
वजीराबाद संयंत्र की कुल क्षमता
गौरतलब है कि वजीराबाद जल उपचार संयंत्र की कुल उत्पादन क्षमता 138 मिलियन गैलन प्रति दिन है। वहीं, दूसरे प्रभावित संयंत्र चंद्रावल की कुल उत्पादन क्षमता 99 मिलियन गैलन प्रति दिन है। यह दिल्ली का सबसे पुराना जल उपचार संयंत्र है। ऐसे में इनकी उत्पादन क्षमता प्रभावित होने से नई दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) और उत्तरी दिल्ली के कुछ इलाकों में जल आपूर्ति में कमी या नहीं भी आ सकता है।
ऐसे में एनडीएमसी ने एक चेतावनी जारी कर नागरिकों से पानी के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की बात कही है। गौरतलब है कि गर्मियों के दिनों में कूलर आदि के इस्तेमाल से पानी की खपत आमतौर पर सर्दियों और बारिश की तुलना में अधिक होती है। इससे निपटने के लिए दिल्ली सरकार हर साल समर एक्शन प्लान जारी करती है जिससे कि जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इस साल दिल्ली सरकार ने 1002 मिलियन गैलन प्रति दिन उत्पादन क्षमता रखी है।
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