लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और आरएसएस को लेकर दिए गए विवादित बयान पर देश की राजनीति गरमा गई है। रायबरेली दौरे के दौरान राहुल गांधी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और आरएसएस को ‘गद्दार’ बताया।
भाजपा ने राहुल गांधी के इस बयान को 140 करोड़ देशवासियों का अपमान करार दिया है। वहीं मामले अब थाने तक भी पहुंच चुका है। दिल्ली के तिगड़ी थाने में शिकायत दी गई है जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों पांच देशों की यात्रा के अंतिम चरण में इटली पहुंचे हैं, जहां उनकी मुलाकात इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी से हुई। दोनों नेताओं की मुलाकात और साथ में साझा किए गए वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने। मेलोनी ने एक्स पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी उन्हें ‘मेलोडी’ टॉफी का पैकेट देते दिखाई दिए।
इसी पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए लिखा कि देश आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री विदेश में रील बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसान, युवा, महिलाएं, मजदूर और छोटे व्यापारी परेशान हैं, जबकि भाजपा जश्न मना रही है। राहुल गांधी ने इसे नेतृत्व नहीं, नौटंकी बताया।
रायबरेली में राहुल गांधी ने क्या कहा
रायबरेली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि जब आरएसएस कार्यकर्ता नरेंद्र मोदी और अमित शाह की बात करें तो उन्हें कहना चाहिए कि “आपका प्रधानमंत्री गद्दार है, आपका गृह मंत्री गद्दार है और आपका संगठन गद्दार है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को उद्योगपतियों के हाथों में सौंप दिया है और आने वाले महीनों में देश आर्थिक संकट का सामना करेगा। राहुल गांधी ने महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार जनता को राहत देने में विफल रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संविधान, डॉ. भीमराव अंबेडकर और महात्मा गांधी के विचारों पर हमला किया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि कोविड और नोटबंदी की तरह आने वाले आर्थिक संकट में भी सरकार जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करेगी।
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भाजपा अध्यक्ष और सीएम योगी ने साधा निशाना
भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने राहुल गांधी के बयान को अराजकतावादी मानसिकता का प्रतीक बताया। उन्होंने बयान जारी कर कहा कि भारतीय राजनीति में मर्यादा और सम्मान की परंपरा रही है, लेकिन राहुल गांधी का बयान उस परंपरा के खिलाफ है।
नितिन नबीन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासनकाल में भ्रष्टाचार चरम पर था, जबकि मोदी सरकार आतंकवाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने केवल प्रधानमंत्री का नहीं, बल्कि पूरे देश का अपमान किया है।
वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कांग्रेस के ‘युवराज’ की अमर्यादित टिप्पणी उनकी नकारात्मक राजनीति और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अनादर को दिखाती है। उन्होंने राहुल गांधी से देश से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की।
भाजपा नेताओं का तीखा पलटवार
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने राहुल गांधी के बयान की निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने खुद डूबने के साथ कांग्रेस को भी डुबाने का फैसला कर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार चुनावी हार के बाद राहुल गांधी देश विरोधी ताकतों के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
मनोज तिवारी ने कहा कि राहुल गांधी अगर 20 साल भी सीखें तो नरेंद्र मोदी जैसा नेतृत्व नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कांग्रेस पर डॉ. अंबेडकर का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अंबेडकर मेमोरियल बनवाकर उन्हें सम्मान दिया।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने भी राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी दुनिया में भारत की साख मजबूत कर रहे हैं, जबकि राहुल गांधी केवल बयानबाजी में लगे हैं। उन्होंने कहा कि डिप्रेशन में भारत का युवा नहीं, बल्कि राहुल गांधी हैं।
अयोध्या के संत महंत राजू दास ने राहुल गांधी के बयान को देश और लोकतंत्र का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा 140 करोड़ भारतीयों की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है।
एफआईआर दर्ज करने की मांग
इस विवाद के बीच भारतीय जनता युवा मोर्चा के दिल्ली प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक दुबे ने दिल्ली के तिगड़ी थाने में राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने सार्वजनिक मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अमर्यादित और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।
शिकायतकर्ता ने कहा कि इस तरह की भाषा लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है और इससे समाज में तनाव तथा राजनीतिक कटुता बढ़ सकती है। पुलिस से भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि, अभी तक दिल्ली पुलिस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

