नई दिल्ली: उत्तर और मध्य भारत में कई शहर इन दिनों भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं। आलम ये है कि एक्यूआई (AQI) के 24 अप्रैल, 2026 के दिन के 2 बजे के आंकड़े बता रहे हैं कि दुनिया की सबसे गर्म 100 शहरों की लिस्ट में सभी भारत से हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो पश्चिम एशिया में खाड़ी देशों मसलन सऊदी अरब, कतर और कई गर्म अफ्रीकी देशों से भी अधिक तापमान भारत के शहरों का है।
अप्रैल की शुरुआत इस बार इतनी गर्म नहीं थी और मौसम में हल्का ठंडापन था। ऐसा वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के एक्टिव होने और इस वजहों से कई राज्यों में हुई बारिश के कारण हुआ। हालांकि, पिछले एक हफ्ते में अब गर्मी चरम पर है। बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, पंजाब में भीषण गर्मी का सामना लोगों को करना पड़ रहा है। आखिर इसकी वजह क्या है? जलवायु परिवर्तन तो एक वजह है ही लेकिन कई और कारण भी हैं। मौसम के सिस्टम में ऐसा क्या है, जो भारत में अत्यधिक गर्मी है। ‘हीट डोम’ कैसे इस गर्मी को और बढ़ा रहा है और कब तक ऐसी स्थिति रहेगी, आईए जानते हैं।
भारत में गर्मी का कहर, उत्तर प्रदेश में हाल बेहाल
एक्यूआई की लिस्ट में भारत में टॉप 100 में शामिल सभी शहरों का तापमान 40 डिग्री से ऊपर है। इसमें यूपी के सबसे अधिक कम से कम 45 शहर शामिल हैं। वाराणसी, मिर्जापुर, प्रयागराज, बांदा, मुरादाबाद, गाजीपुर, जौनपुर, फतेहपुर कुछ ऐसे नाम हैं, जो सबसे गर्म टॉप 25 शहरों की लिस्ट में हैं।
दूसरी ओर पश्चिम एशियाई या खाड़ी देशों की बात करें तो वहां तामपान 25 से 35 डिग्री के बीच में ही है। सवाल है कि आखिर भारत अभी सऊदी अरब और मिस्र जैसे रेगिस्तानी देशों से भी ज्यादा गर्म कैसे हो गया है? और आगे कितनी गर्मी बढ़ेगी?
भारत में क्यों है इतनी गर्मी, हीट डोम क्या है?
भारत में मौजूदा समय में बढ़ी हुई गर्मी की एक बड़ी वजह ‘हीट डोम’ है। किसी क्षेत्र के ऊपर जब हवा का उच्च दबाव का क्षेत्र गर्म हवा को जमीन की सतह के पास ही रोक लेता है, तो ऐसी परिस्थिति बनती है। इस स्थिति में गर्म हवा ऊपर उठकर वायुमंडल की ऊपरी परतों तक नहीं पहुंच पाती। इस कारण सतह के पास गर्मी ज्यादा जमा हो जाती है और समय के साथ बढ़ती जाती है। इन स्थितियों को ‘ओमेगा ब्लॉक’ भी कहा जाता है, जहां वायुमंडल की ऊपरी परतों में हवा की गति धीमी हो जाती है।
ओमेगा ब्लॉक एक खास पैटर्न है, जिसमें ऊपरी वायुमंडल की हवाएं (खासकर जेट स्ट्रीम) Ω (ओमेगा) जैसी आकृति बना लेती हैं। यह पैटर्न बनते ही मौसम में बदलाव रूक जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो जो हालात बनते हैं, वे कई दिनों तक वहीं टिके रहते हैं।
यही परिस्थिति हीट डोम बनाती है। हीट डोम के समय आसमान आमतौर पर साफ रहता है और बादल बहुत कम होते हैं। इससे पृथ्वी की सतह तक सीधी धूप पहुँचती है, जिससे भूमि लगातार गर्म होती रहती है। इसी समय धरती के ऊपर उच्च दबाव प्रणाली वायुमंडल पर ढक्कन की तरह काम करती है और हवा को नीचे की ओर धकेलती है, जिससे हवा गर्म होती जाती लेकिन ऊपर नहीं उठ पाती। ऐसी स्थिति कई दिनों तक बनी रह सकती है, जिससे अत्यधिक गर्मी ज्यादा समय तक बनी रह जाती है।
इस साल उत्तर और मध्य भारत में ऐसा ही हाई-प्रेशर सिस्टम बना हुआ है। सूरज की गर्मी दिनभर जमीन को तपाती है, लेकिन रात में भी गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। इसलिए तापमान लगातार ऊँचा बना रहता है।
इस पूरे सिस्टम को और जटिल बनाता है जेट स्ट्रीम। जेट स्ट्रीम असल में ऊपरी वायुमंडल में (धरती से 8 से 15 किलोमीटर ऊपर) बहने वाली तेज हवाओं की एक पट्टी होती है, जो आमतौर पर ठंडी और गर्म हवाओं के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। यह सीधी बहती है। लेकिन इस बार इसमें लहरदार पैटर्न बना हुआ है। इसी की वजह से अप्रैल की शुरुआत में आया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस उत्तर और पश्चिम भारत की ओर मुड़ गया था और बारिश देखने को मिली थी। साथ ही तेज हवाएं भी थी।
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस जब कमजोर हुआ तो धरती के पास कम दबाव का क्षेत्र बना और इसने हाई प्रेशर वाले हवा को नीचे खींचना शुरू किया। इससे नीचे की हवा भी ऊपर नहीं जा पाती और फिर बादल भी नहीं बनते। ऐसे में तेज धूप नीचे धरती पर पहुंचती है और गर्मी बढ़ती जाती है। जेट स्ट्रीम में बदले पैटर्न की वजह से ठंडी हवाएं भारत तक नहीं पहुंच पा रही हैं। नतीजा ये हुआ, जो हवा एक बार क्षेत्र में आ गई है, वह लंबे समय तक वहीं बनी रहती है, जिससे हीट डोम मजबूत हो जाता है।
कुल मिलाकर हीट डोम एक ढक्कन की तरह काम करता है। यह ढक्कन नीचे की गर्म हवा को ऊपर उठने नहीं देता। इससे गर्मी लगातार जमा होती जाती है।
शहरों की बनावट ने भी बढ़ाई गर्मी
इसके अलावा भारत में शहरों की संरचना भी इस गर्मी को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। कंक्रीट, डामर और घनी इमारतों से भरे शहर दिनभर गर्मी को सोखते हैं और रात में उसे धीरे-धीरे छोड़ते हैं। हरियाली की कमी, बढ़ती गाड़ियों की संख्या और एयर कंडीशनर से निकलने वाली गर्म हवा मिलकर ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव पैदा कर रही है। यही वजह है कि शहरों का तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में कई डिग्री ज्यादा रहता है।
भारत में पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि हीटवेव की तीव्रता और अवधि दोनों बढ़ रही हैं। औसत तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे चरम मौसम की घटनाएं अब सामान्य होती जा रही हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण हीट डोम जैसी स्थितियां अधिक बार और अधिक तीव्र रूप में देखने को मिलेंगी।
गर्मी से राहत कब तक मिलेगी?
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार छुटपुट मौकों को छोड़ दें तो मई और जून में भी राहत के कोई संकेत नहीं हैं। मई से जून 2026 के बीच, भारत के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्मी और लू चलने की संभावना है।
पूर्वी, मध्य और उत्तर-पश्चिमी भारत में लू की स्थिति रहेगी। रात का तापमान कई जगहों पर 3 से 5 डिग्री अधिक रह सकता है। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में लू के दिनों की संख्या सामान्य से काफी अधिक हो सकती है। यह सामान्य 8-10 दिनों के मुकाबले 15-20 दिन तक हो सकता है।
निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर के अनुसार राजस्थान, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर में तापमान मई के अंत या जून की शुरुआत तक 48°C से 50°C तक भी पहुंच सकता है। जून के आखिरी दिनों में मानसून के आगमन से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन जून की शुरुआत में अत्यधिक शुष्क और भीषण गर्मी रहने की संभावना है।
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