नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) में बड़ी टूट सामने आई है। राघव चड्ढा ने कहा है कि वे राज्यसभा में ‘आप’ के कई और सांसदों के साथ भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं। यह दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और ‘आप’ के लिए बड़ा झटका है। चड्ढ़ा के अपनी पार्टी से बिगड़ते रिश्ते की कहानी पिछले दिनों में सुर्खियों थी।
राघव चड्ढा ने शुक्रवार दोपहर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि राज्य सभा में आम आदमी पार्टी के 10 सांसदों में से लगभग दो-तिहाई भाजपा में विलय करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया जो पार्टी कभी भ्रष्टाचार से लड़ने के वादों के साथ दिल्ली में सत्ता में आई थी, कि वह ईमानदार राजनीति से दूर जा रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में चड्ढा के साथ दो और ‘आप’ राज्य सभा सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल मौजूद थे।
राज्यसभा में ‘आप’ के पास राज्यसभा में 10 सांसद हैं। इसमें 7 पंजाब से और 3 दिल्ली से हैं। दूसरी ओर राघव चड्ढा के प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आम आदमी पार्टी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इसे ‘ऑपरेशन लोट्स’ करार दिया। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी ने चड्ढा को विधायक और सांसद बनाया, लेकिन अंत में वे भाजपा की गोद में चले गए। सिंह ने भाजपा पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के अच्छे काम में बाधा डालने का भी आरोप लगाया। संजय सिंह ने कहा कि पंजाब के लोग इसे धोखेबाजी को नहीं भूलेंगे।
राघव चड्ढा के साथ और कौन छोड़ रहा ‘आप’?
चड्ढा ने बताया कि भाजपा में विलय करने वाले अन्य सांसदों में हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल भी शामिल हैं। उन्होंने चार अन्य नेताओं के नाम भी गिनाए। इनमें राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी, अशोक मित्तल और संदीप पाठक शामिल हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने कहा, ‘मैंने आम आदमी पार्टी को अपने जीवन के 15 साल दिए। अब यह पार्टी ईमानदार राजनीति से भटक गई है। मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूँ। मैं पार्टी से अलग होकर लोगों के करीब जा रहा हूँ।’
चड्ढा 2012 में आम आदमी पार्टी की स्थापना से ही इसके साथ थे और केजरीवाल के भरोसेमंद सहयोगी के रूप में लंबे समय तक काम करते रहे। हालांकि, पिछले कुछ महीनों से केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ चड्ढा के तालमेल पर सवाल उठने लगे थे।
इसकी पुष्टि इसी महीने की शुरुआत में हुई जब ‘आप’ राघव चड्ढा को राज्य सभा में पार्टी के डिप्टी लीडर पद से हटा दिया। इससे पहले हाल के महीनों में पार्टी के कुछ महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भी चड्ढा नजर नहीं आए थे या बहुत सक्रिय नहीं दिखाई दिए। इनमें इसी साल फरवरी के अंत में कथित शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के बरी होने के बाद आप द्वारा शक्ति प्रदर्शन भी शामिल है।
अशोक मित्तल का ‘आप’ छोड़ना…
पार्टी छोड़ने वालों में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल का माना जा रहा है। अशोक मित्तल को आम आदमी पार्टी ने हाल ही में राघव चड्ढा को हटाकर राज्यसभा में उपनेता बनाया था। अब अशोक मित्तल ने भी राघव चड्ढा के साथ पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है।
अशोक मित्तल लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के संस्थापक कुलाधिपति भी हैं। आम आदमी पार्टी ने डॉ. अशोक कुमार मित्तल को पंजाब से राज्यसभा भेजा। वह साल 2022 में राज्यसभा के लिए चुने गए थे। फिलहाल वह राज्यसभा में आप के उपनेता की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
राघव चड्ढा का राजनीतिक सफर
37 साल के राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी के गठन के समय से ही इसके सदस्य हैं। दिल्ली के मॉडर्न स्कूल के पूर्व छात्र चड्ढा पूर्व में चार्टर्ड अकाउंटेंट रह चुके हैं।
चड्ढा के बारे में बताया जाता है कि उनकी मुलाकात अरविंद केजरीवाल से ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ अभियान के दौरान हुई थी। उस समय केजरीवाल और अन्य लोग पार्टी बनाने पर विचार कर रहे थे। उस समय 23 वर्ष के रहे चड्ढा आम आदमी पार्टी के गठन के साथ जुड़े। उस समय दिल्ली लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने में भी उनकी भूमिका रही।
पार्टी बनने के बाद बहुत जल्द चड्ढा AAP के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में प्रमुख चेहरा बनकर उभरे। इस दौरान वे नियमित रूप से टीवी बहसों में दिखाई देने लगे। 26 साल की उम्र में उन्हें आम आदमी पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। साल 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में चड्ढा राजेंद्र नगर सीट से चुने गए और फिर उन्हें दिल्ली जल बोर्ड का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। 2022 में, उन्हें आम आदमी पार्टी की ओर से राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में नामित किया गया था।
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