Home विचार-विमर्श खेती बाड़ी- कलम स्याही: क्या खत्म होगा संसद में जारी गतिरोध? कैसे...

खेती बाड़ी- कलम स्याही: क्या खत्म होगा संसद में जारी गतिरोध? कैसे निकलेगा रास्ता…

Parliament Monsson Session
फोटो- IANS

मौजूदा मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन बिल को पारित कराने के लिए केंद्र सरकार अपनी अंतिम कोशिशों में जुट गई है। संसद में जारी गतिरोध खत्म करने के लिए संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने तीन दिन में तीसरी बार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से बात कर मनाने का प्रयास किया।

जैसा कि हम सभी को पता है कि इस सत्र में अभी तक लोकसभा में एक भी प्रश्नकाल पूरा नहीं हो सका है। पांच बिल पास हुए हैं, लेकिन बिना चर्चा के। यहां तक कि जब लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पेश किया गया, तब भी वक्त का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया। भले ही बिल पास हो रहे हों और सरकार अपने विधायी कार्य आगे बढ़ा रही हो, लेकिन यह तस्वीर लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं है। संसदीय परंपरा में बहस और चर्चा सदन की कार्यवाही के सबसे जरूरी अंग हैं। इसी से बेहतरी का रास्ता मिलता है।

सूत्रों के अनुसार, नीट पेपर लीक आंदोलन में बल प्रयोग पर गृह मंत्री अमित शाह संसद में बयान दे सकते हैं, जिसके बाद गतिरोध खत्म होने की उम्मीद है। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पुरानी शर्तों को दोहराते हुए इस मसले पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की सलाह दी है। वहीं, राज्यसभा के सभापति ने भी रिजिजू से गतिरोध तोड़ने के लिए विपक्ष की भावनाएं शाह तक पहुंचाने को कहा है।

विपक्ष अगर गतिरोध तोड़ने पर राजी हो जाता है, तो सरकार की रणनीति मानसून सत्र का कार्यकाल बढ़ाने या स्वतंत्रता दिवस के तत्काल बाद विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन व महिला आरक्षण का रास्ता साफ करने की है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि इसके लिए जरूरी दो तिहाई सांसदों के समर्थन का रोडमैप तैयार है। डीएमके और एनसीपी (एसपी) ने सरकार को सकारात्मक संदेश दिया है। उधर, तमिलनाडु के सीएम विजय ने परिसीमन और इसके प्रभाव पर चर्चा के लिए आठ अगस्त को राज्य के सभी सांसदों की बैठक बुलाई है।

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू की दो दिनों की बातचीत के बाद भी संसद में सरकार और कांग्रेस के बीच गतिरोध बरकरार है। इन सबके बीच कयास लगाए जा रहे हैं कि गृह मंत्री  अमित शाह आज संसद में विपक्ष के सवालों के जवाब दे सकते हैं जिसके बाद संसद में गतिरोध खत्म होने के आसार हैं।

दूसरी ओर राहुल गांधी विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) और महिला आरक्षण व परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर सर्वदलीय बैठक की मांग पर अड़ गए हैं।

सर्वदलीय बैठक की जरूरत को नकारते हुए सरकार का कहना है कि सभी दलों से बात हो चुकी है। एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि इन विधेयकों को पास कराने के लिए अगले एक-दो दिनों में फैसला ले लिया जाएगा।

अगला हफ्ता सरकार के लिए अहम

संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हो रहा है। ऐसे में अगला हफ्ता अहम हो सकता है। दरअसल विपक्ष और खासतौर पर कांग्रेस के साथ चल रहे गतिरोध को दूर करने के लिए सरकार की ओर से बुधवार को गंभीर पहल शुरू हुई।

रिजिजू और राहुल गांधी की लगभग 50 मिनट तक हुई मुलाकात में नेता प्रतिपक्ष ने सहयोगी दलों से सलाह-मशविरा के लिए समय मांगा।

गुरुवार को विपक्षी गठबंधन आईएनडीआईए के घटक दलों की बैठक में सरकार की पहल पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला लिया गया। फिर रिजिजू और राहुल गांधी के बीच फोन पर बातचीत हुई। इसमें नेता प्रतिपक्ष ने सर्वदलीय बैठक बुलाने की विपक्ष की मांग रखी।

उधर, रिजिजू का कहना था कि सरकार की पहले ही सभी दलों से बातचीत हो चुकी, सिर्फ कांग्रेस से वार्ता बाकी है। दरअसल तीनों विधेयकों की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार इन्हें बिना चर्चा के पास कराने के पक्ष में नहीं है, लेकिन कांग्रेस के रवैये के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है। सरकार इन विधेयकों से जुड़े सभी पक्षों से बातचीत कर उनकी आशंकाओं को दूर करने का प्रयास कर रही है।

सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि केवल कांग्रेस के विरोध के कारण महत्वपूर्ण विधेयकों को रोका नहीं जा सकता है। हंगामे के बीच लोकसभा और राज्यसभा दोनों से कई विधेयक पारित किए जा चुके हैं।

वर्तमान मानसून सत्र के केवल पांच कार्यकारी दिन बचे हैं, ऐसे में सत्र का कार्यकाल बढ़ाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। सूत्रों का दावा है कि सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा हो गया है। लेकिन सदन में वोटिंग के लिए सही माहौल बनाने में विपक्ष के सहयोग की आवश्यकता होगी।

राज्य सभा में पहले पेश होगा परिसीमन बिल?

एक अटकल यह भी है कि यदि सरकार ने परिसीमन पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया तो इसे पहले राज्यसभा में पेश किया जा सकता है जहां सरकार के लिए संख्या बल जुटाना अपेक्षाकृत आसान है। ऐसा माना जा रहा है कि इस मामले में अंतिम निर्णय शुक्रवार यानि आज लिया जा सकता है।

इन सबके बीच गृहमंत्री अमित शाह संसद भवन लगातार आ रहे हैं और अधिकारियों संग बैठक कर रहे हैं। बीते दिनों अमित शाह ने एफसीआरए में प्रस्तावित संशोधनों पर फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने की पहल शुरू की। इस सिलसिले में उन्होंने ईसाई समुदाय से जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर चर्चा की।

इसके पहले शाह कैथोलिक बिशप कांफ्रेंस आफ इंडिया के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर चुके हैं। संसद भवन परिसर में हुई मुलाकात में ईसाई प्रतिनिधिमंडल ने एफसीआरए में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर अपनी आशंकाओं को खुलकर रखा।

सूत्रों के अनुसार शाह ने उनकी आशंकाओं को दूर करते हुए कहा कि प्रस्तावित संशोधनों के बारे में कई तरह से दुष्प्रचार किए जा रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि संशोधनों में ईसाई सहित सभी समुदायों के हितों का ख्याल रखा है।

उन्होंने इन संसोधनों की जरूरत के बारे में भी विस्तार से बताया। शाह ने कहा कि सरकार की कोशिश सिर्फ विदेशी अनुदान में पारदर्शिता लाने और उन्हें सुचारू बनाने की है। सूत्रों के अनुसार एफसीआरए बिल पर सदन में 12 अगस्त को चर्चा हो सकती है।

author avatar
गिरीन्द्र नाथ झा
गिरीन्द्र नाथ झा ने पत्रकारिता की पढ़ाई वाईएमसीए, दिल्ली से की. उसके पहले वे दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक कर चुके थे. आप CSDS के फेलोशिप प्रोग्राम के हिस्सा रह चुके हैं. पत्रकारिता के बाद करीब एक दशक तक विभिन्न टेलीविजन चैनलों और अखबारों में काम किया. पूर्णकालिक लेखन और जड़ों की ओर लौटने की जिद उनको वापस उनके गांव चनका ले आयी. वहां रह कर खेतीबाड़ी के साथ लेखन भी करते हैं. राजकमल प्रकाशन से उनकी लघु प्रेम कथाओं की किताब भी आ चुकी है.

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version