Home भारत शरद पवार के पीएम मोदी की तारीफ करने पर हलचल, कांग्रेस-उद्धव गुट...

शरद पवार के पीएम मोदी की तारीफ करने पर हलचल, कांग्रेस-उद्धव गुट बेचैन; महाराष्ट्र में अब क्या होने वाला है?

शरद पवार का पीएम मोदी को लेकर बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) केंद्र सरकार पर पश्चिम एशिया संकट, ईंधन दबाव और विदेश नीति को लेकर लगातार हमलावर हैं।

Sharad Pawar
फोटो- IANS

महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले दो दिनों से तेज हलचल है। इसकी वजह है शरद पवार का पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ करने वाला बयान। शरद पवार ने हाल में प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों और भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को उभारने को लेकर उनकी खुलकर तारीफ की। शरद पवार ने कहा कि पीएम मोदी देश की छवि को बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और दूसरी विपक्षी पार्टियां भी पीएम मोदी के विदेश दौरे पर सवाल उठा रही थीं।

बहरहाल, पवार का बयान आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा सिर्फ इस बात पर नहीं है कि उन्होंने क्या कहा बल्कि इस पर भी अभी क्यों कहा। पवार का पीएम मोदी की तारीफ वाला बयान ऐसे समय में आया जब पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के विलय की भी बात चल रही है। पवार के बयान ने महाविकास अघाड़ी में शरद पवार गुट के साझीदार कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) को भी बेचैन कर दिया है। यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या महाविकास अघाड़ी में सब ठीक है।

शरद पवार का पीएम मोदी पर बयान

शरद पवार ने कहा कि उनकी विचारधाराएं (भाजपा से) अलग-अलग हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लिए काम कर रहे हैं और दुनिया भर में इसकी छवि की रक्षा कर रहे हैं। पवार ने कहा, ‘जब भी देश का मुद्दा उठता है, उस समय देश का हित व्यक्तिगत हितों और राजनीतिक पसंद से ऊपर होता है। हमें यह स्वीकार करना होगा कि प्रधानमंत्री मोदी न केवल भारत के हितों और छवि की रक्षा कर रहे हैं, बल्कि उसे ऊंचा भी उठा रहे हैं। देश की छवि महत्वपूर्ण है और जब देश के हितों की बात आती है, तो किसी भी व्यक्तिगत या राजनीतिक हित को बीच में नहीं आना चाहिए। देश के हितों के सामने राजनीतिक स्वार्थ का कोई स्थान नहीं है। प्रधानमंत्री की विदेश यात्राएं केवल देश के हित में होती हैं। इसलिए, हमें इसकी आलोचना और राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। देश एक अलग दौर से गुजर रहा है।’

पवार ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह ने भारत के हितों को सर्वोपरि रखा और विश्व स्तर पर देश की छवि को ऊंचा उठाने के लिए निरंतर प्रयास किए।

शरद पवार ने कहा, ‘देश की छवि उनके प्रयासों का केंद्र थी। और यही कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर रहे हैं। हमें देश के हितों के प्रति प्रतिबद्ध रहना होगा। हमें जनता के साथ रहना होगा और उनके लिए काम करना होगा। ऐसे लोग हमेशा सम्मान के पात्र होते हैं।’

पवार के बयान ने महाविकास अघाड़ी को किया असहज!

पवार का पीएम मोदी को लेकर बयान ऐसे समय आया, जब कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) केंद्र सरकार पर पश्चिम एशिया संकट, ईंधन दबाव और विदेश नीति को लेकर लगातार हमलावर हैं। ऐसे माहौल में महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के सबसे वरिष्ठ चेहरे का अलग स्वर दोनों सहयोगियों के लिए असहज करने वाला बन गया।

शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने साफ-साफ कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी के बारे में शरद पवार की राय से सहमत नहीं हैं। राउत ने कहा कि इंदिरा गांधी, नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह हमेशा प्रेस से बात करते थे और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का सम्मान करते थे, जबकि प्रधानमंत्री मोदी पिछले 12 वर्षों से प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से इनकार करते रहे हैं।

राउत ने कहा, ‘इसलिए मोदी और देश के अन्य प्रधानमंत्रियों में बहुत बड़ा अंतर है। मोदी प्रेस से दूर भागते हैं और यह लोकतंत्र का अच्छा और स्वस्थ संकेत नहीं है। हमने देखा है कि नॉर्वे में क्या हुआ, मोदी केवल एक महिला पत्रकार के सवाल का जवाब दे पाए।’

भाजपा से किया पवार के बयान का स्वागत

पवार के बयान के बाद भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, ‘शरद पवार जी बेहद वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं। उन्होंने राजनीति के हर दौर और हर परिस्थिति को करीब से देखा है। वह यह महसूस कर रहे हैं कि मौजूदा संकट के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की स्थिरता और क्षमता ने देश को मजबूती प्रदान की है।’

वहीं, भाजपा सांसद अशोक चव्हाण ने कहा, ‘शरद पवार ने सही समय पर सही बयान दिया है। इसलिए, मैं समझता हूं कि उनका बयान राष्ट्रवादी नीतियों का भी संकेत है। वे एक अनुभवी राजनीतिज्ञ भी हैं। उन्होंने मोदी की विदेश यात्रा को देश के लिए अच्छा और लाभकारी बताया है, इसीलिए उन्होंने यह बयान दिया है…’

पवार ने कहा क्या, और राजनीति ने सुना क्या?

शरद पवार ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में मोदी देश की प्रतिष्ठा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाए रखने का काम कर रहे हैं और राष्ट्रीय हित को दलगत राजनीति से ऊपर रखना चाहिए। यह बयान सुनने में संतुलित लगता है। लेकिन राजनीति में संदर्भ ही संदेश बन जाता है।

कांग्रेस के लिए समस्या यह है कि वह इस समय मोदी सरकार की विदेश नीति और राजनीतिक नैरेटिव को चुनौती देकर विपक्ष की केंद्रीय धुरी बनना चाहती है। दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) भाजपा से अलग होने के बाद अपनी पूरी राजनीतिक पहचान ही एंटी-बीजेपी स्पेस पर खड़ी कर रही है।

ऐसे में अगर उसी गठबंधन का सबसे अनुभवी नेता सार्वजनिक रूप से मोदी की प्रशंसा करे, तो संदेश यह जाता है कि विपक्ष के भीतर भी मोदी को लेकर एक जैसी राय नहीं है। यहीं से असहजता शुरू होती है।

पवार और पीएम मोदी के संबंध

वैसे यह पहली बार नहीं है। पवार और पीएम मोदी रिश्ते हमेशा सीधे नहीं रहे। मोदी ने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से शरद पवार के प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक समझ की सराहना की है। एक कार्यक्रम में उन्होंने उन्हें राजनीति में सीख देने वाले वरिष्ठ नेताओं में भी गिना था और कहा था कि अलग विचार होने के बावजूद उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला।

दूसरी तरफ पवार भी कई बार मोदी सरकार के फैसलों के आलोचक रहे हैं, लेकिन उन्होंने शायद ही कभी निजी या संस्थागत संवाद की लाइन बंद की हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान एक रैली में शरद पवार और शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को एनडीए में शामिल होने का न्यौता दे दिया था। इसके अलावा मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान ही 2017 में शरद पवार को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। पुरस्कार सरकार देती है, लेकिन उसके राजनीतिक संकेत भी पढ़े जाते हैं। उस समय भी विपक्षी हलकों में इसे सिर्फ सम्मान के तौर पर नहीं देखा गया था।

तो क्या महाराष्ट्र में फिर कोई हलचल होगी?

फिलहाल इसके संकेत नहीं दिखते। लेकिन यह भी सच है कि महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव अक्सर छोटे संकेतों से शुरू हुए हैं। दरअसल, शरद पवार का बयान दोनों एनसीपी गुट के विलय की चर्चा के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी और शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट का विलय होने की संभावना है। चर्चा जारी है। माना ये भी जा रहा है कि विलय के बाद एनसीपी राज्य और केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा बनेगी। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार विलय के बाद एनसीपी को मंत्रिमंडल में भी जगह मिल सकती है। हालांकि, इस पर कुछ भी ठोस कहना या समझना जल्दबाजी ही है।

author avatar
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version