Home भारत जापान ने भारतीय आमों के आयात पर लगाया प्रतिबंध, क्या है वजह?

जापान ने भारतीय आमों के आयात पर लगाया प्रतिबंध, क्या है वजह?

करीब दो दशकों में यह पहला मौका है जब जापान ने भारतीय आमों पर इस तरह की पाबंदी लगाई है। इससे पहले जापान ने फलों में पाए जाने वाले फ्रूट फ्लाई के खतरे को लेकर भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगाया था।

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फाइल फोटो- IANS

नई दिल्ली: भारत के आमों की मिठास और खुशबू दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन इस बार जापान ने भारतीय आमों के आयात पर रोक लगाकर निर्यातकों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सामने आई जानकारी के अनुसार जापान ने भारतीय आमों की खेप स्वीकार करना बंद कर दिया है। इसकी वजह भारतीय ट्रीटमेंट सुविधाओं में पेस्ट कंट्रोल प्रक्रियाओं में कथित खामियां बताई गई हैं।

इस फैसले का असर खास तौर पर अल्फांसो जैसी प्रीमियम भारतीय आम के किस्मों पर पड़ेगा, जिनकी जापान में अच्छी मांग रहती है। यह कदम ऐसे समय आया है जब भारत में आम का सीजन अपने चरम पर होता है और निर्यातकों के लिए यह सबसे अहम कारोबारी महीने माना जाता है।

करीब 20 साल बाद पहली बड़ी रोक

करीब दो दशकों में यह पहला मौका है जब जापान ने भारतीय आमों पर इस तरह की पाबंदी लगाई है। इससे पहले जापान ने फलों में पाए जाने वाले फ्रूट फ्लाई के खतरे को लेकर भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगाया था। बाद में भारत ने अपनी ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल को मजबूत किया, जिसके बाद 2006 में यह रोक जापान की ओर से हटा ली गई थी।

अब एक बार फिर जापानी अधिकारियों ने सवाल उठाया है। भारत से भेजी जा रही आमों की खेप जापान के सख्त हेल्थ मानकों को पूरा कर रही है या नहीं, पूरा मामला इसे ही लेकर है। जापान में घेरेलू खेती के लिए फ्रूट फ्लाई जैसे कीटों को बड़ा खतरा माना जाता है और यह देश इनके मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाता है।

जापानी अधिकारियों को क्या खामियां मिली हैं?

हर साल आम निर्यात सीजन शुरू होने से पहले जापान के क्वारंटीन अधिकारी भारत के वेपर हीट ट्रीटमेंट (VHT) केंद्रों का निरीक्षण करते हैं। इन्हीं केंद्रों में आमों को निर्यात से पहले कीट-मुक्त बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

VHT एक गैर-रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें आमों को नियंत्रित गर्म और नम वातावरण में रखा जाता है ताकि फ्रूट फ्लाई और उनके लार्वा को खत्म किया जा सके। भारत और जापान के बीच हुए निर्यात समझौते के तहत यह प्रक्रिया अनिवार्य है।

इस साल मार्च में जापानी अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के रहमानपुर स्थित VHT केंद्र का निरीक्षण किया। रिपोर्ट के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान फ्यूमिगेशन और डिसइन्फेक्शन प्रक्रियाओं में कुछ कमियां पाई गईं। हालांकि, भारत और जापान दोनों देशों की सरकारों ने अब तक यह सार्वजनिक नहीं किया है कि तकनीकी स्तर पर आखिर कौन-सी खामियां सामने आईं हैं।

निरीक्षण के बाद जापान की योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने घोषणा की कि 25 मार्च 2026 के बाद जारी किए गए निरीक्षण प्रमाणपत्र वाले भारतीय आमों की खेप स्वीकार नहीं की जाएगी।

भारत के निर्यातकों को बड़ा झटका

जापान भारतीय आमों का सबसे बड़ा बाजार नहीं है, लेकिन वहां मिलने वाली ऊंची कीमतों की वजह से यह बाजार बेहद अहम माना जाता है।
भारत हर साल करीब 2.8 करोड़ मीट्रिक टन आम का उत्पादन करता है और दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है।

हालांकि, इसका अधिकांश हिस्सा देश के भीतर ही खप जाता है, लेकिन जापान जैसे हाई-एंड बाजारों में निर्यात से किसानों और व्यापारियों को कहीं ज्यादा मुनाफा मिलता है।

निर्यातकों को अब यह डर भी सता रहा है कि जापान का यह फैसला भारत की कृषि गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। साथ ही दूसरे आयातक देश भी भारतीय फलों की जांच को लेकर ज्यादा सख्ती बरत सकते हैं।

पहले से मुश्किल में हैं किसान

इस रोक ने आम उत्पादकों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी है। खासकर महाराष्ट्र के अल्फांसो आम उत्पादन वाले बेल्ट भी अब दबाव में हैं। राज्य के कई इलाकों में इस साल भीषण गर्मी और अल-नीनो से जुड़े असामान्य मौसम की वजह से आम की फसल को भारी नुकसान हुआ है। सरकारी सर्वेक्षणों में कुछ क्षेत्रों में 85 से 90 प्रतिशत तक नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

उत्पादन पहले ही काफी कम हो चुका है। ऐसे में निर्यातकों का कहना है कि जापान की रोक से किसानों और व्यापारियों की कमाई पर और बड़ा असर पड़ेगा। आम के कारोबार के लिहाज से यह समय साल का सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि भारत सरकार और निर्यात एजेंसियां जापान की चिंताओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाती हैं और क्या भारतीय आमों को जल्द फिर से जापानी बाजार में एंट्री मिल पाएगी।

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...

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