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फीफा वर्ल्ड कप के लिए भारत में नहीं मिल रहे ब्रॉडकास्टर, कहां फंसा है पेंच; क्यों आई ऐसी नौबत?

फीफा और भारतीय ब्रॉडकास्ट कंपनियों के बीच सबसे बड़ा विवाद मीडिया राइट्स की कीमत को लेकर है। चीन में भी यही स्थिति थी लेकिन वहां इसे सुलझा लिया गया है।

फीफा वर्ल्ड कप 2026 शुरू होने में महज तीन हफ्ते का समय बचा है, लेकिन भारत में अब तक इसके आधिकारिक ब्रॉडकास्ट पार्टनर पर कोई फैसला नहीं हो सका है। दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजनों में शामिल फीफा वर्ल्ड कप के लिए इतनी देरी ने भारतीय फुटबॉल फैंस के बीच बेचैनी बढ़ा दी है।

आलम ये है कि दिल्ली हाई कोर्ट में इस मुद्दे को लेकर जनहित याचिका तक दायर हुई है। कई फुटबॉल फैंस का मानना है कि ऐसी स्थिति में प्रसार भारती और दूरदर्शन को आगे आना चाहिए। यही नहीं, फीफा के मीडिया राइट्स के अधिकारी खुद भारत आकर इस मसले का हल निकालने की कोशिश में जुटे हैं। वैसे भी करोड़ों दर्शकों वाले बाजार में अगर फुटबॉल के महाकुभ का प्रसारण तय नहीं हो पा रहा है, तो सवाल उठना लाजिमी है। आखिर मामला कहां फंसा है और ऐसी नौबत क्यों आई?

प्रसारण राइट्स की कीमत पर अटका पूरा खेल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, फीफा और भारतीय ब्रॉडकास्ट कंपनियों के बीच सबसे बड़ा विवाद मीडिया राइट्स की कीमत को लेकर है। फीफा ने शुरुआत में भारत के लिए लगभग 100 मिलियन डॉलर की मांग रखी थी। उसे उम्मीद थी कि 140 करोड़ की आबादी वाले इस देश में इतनी रकम तो आ ही जाएगी। वैसे भी 2022 में रिलायंस जीयो ने टूर्नामेंट के राइट्स के लिए 60 मिलियन डॉलर का भुगतान किया था। जाहिर है फीफा अब चार साल बाद और मोटी रकम की उम्मीद कर रहा था।

हालांकि, यहीं उसे झटका लगा है। क्रिकेट के पीछे भागने वाले भारत में ब्रॉडकास्ट कंपनियां फुटबॉल के लिए 100 मिलियन डॉलर के लिए कतई तैयार नहीं है। बाद में यह कीमत घटाकर करीब 60 मिलियन डॉलर तक लाई गई, लेकिन भारतीय कंपनियां इसे भी ज्यादा मान रही हैं। दूसरी तरफ रिलायंस-डिज्नी जॉइंट वेंचर जियोहॉटस्टार की ओर से करीब 20 मिलियन डॉलर की पेशकश की गई। लेकिन फीफा इसे बहुत कम मान रहा है। दोनों पक्षों के बीच भारी अंतर होने की वजह से डील आगे नहीं बढ़ सकी।

भारत में इस समय स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग मार्केट काफी बदला हुआ है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव और विज्ञापन बाजार में प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनियां अब केवल भावनात्मक या प्रतिष्ठा के आधार पर बड़े सौदे नहीं कर रहीं। वे साफ तौर पर निवेश बनाम कमाई का गणित देख रही हैं। कुछ महीने पहले क्रिकेट के टी20 वर्ल्ड कप तक को लेकर प्रसारण का संशय खड़ा हो गया था। हालांकि बाद में चीजें सुलझ गईं। इसे सुलझना भी था क्योंकि ये क्रिकेट का मामला था।

फीफा वर्ल्ड कप: आखिर भारतीय ब्रॉडकास्टर पीछे क्यों हटे?

रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय ब्रॉडकास्टर्स को लगता है कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 का टाइम जोन भारतीय बाजार के लिए बड़ी चुनौती हो सकता है। टूर्नामेंट अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में खेला जाएगा, जिसके कारण कई मुकाबले भारतीय समयानुसार देर रात या तड़के होंगे।

ऐसे स्लॉट्स में टीवी व्यूअरशिप और विज्ञापन दोनों प्रभावित होते हैं। भारतीय विज्ञापन बाजार अभी भी प्राइम टाइम पर बहुत ज्यादा निर्भर है। यही वजह है कि कंपनियां इतने बड़े निवेश को लेकर सतर्क हैं।

इसके अलावा भारतीय खेल बाजार में क्रिकेट की पकड़ इतनी मजबूत है कि बाकी खेलों के लिए विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन से बड़ी कमाई करना आसान नहीं होता। खासकर तब, जब टूर्नामेंट के मैच भारतीय दर्शकों के अनुकूल समय पर न हों। फीफा वर्ल्ड कप में अगर भारत भी खेल रहा होता तो जाहिर तौर पर तस्वीर अलग होती, लेकिन अभी ये दूर की कौड़ी है।

फीफा भारत को छोड़ भी नहीं सकता!

भारत क्रिकेट प्रधान देश है, लेकिन ये भी है कि फुटबॉल की लोकप्रियता भी रही है। खासकर वर्ल्ड कप के दौरान भारत के बाजार में इसकी धमक नजर आती है। यही नहीं, फीफा वर्ल्ड कप 2022 के दौरान भारत दुनिया के सबसे बड़े टीवी दर्शक बाजारों में शामिल रहा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने वैश्विक टीवी ऑडियंस में लगभग 2.9 प्रतिशत योगदान दिया था और यहां करीब 8.5 करोड़ लोगों ने टूर्नामेंट देखा था। अगर कुल मीडिया इंगेजमेंट्स (टीवी, सोशल मीडिया, डिजिटल, फीफा प्लेटफॉर्म) को देखें तो भारत 745.7 मिलियन की संख्या के साथ केवल चीन (1161 मिलियन) से पीछे था।

भारत के केरल, पश्चिम बंगाल, गोवा और पूर्वोत्तर राज्यों में फुटबॉल का जबरदस्त क्रेज रहा है। जबकि देश भर के बड़े शहरों में भी यूरोपीय और स्पेनिश फुटबॉल लीग लोकप्रिय रहा है। इसी वजह से फीफा भारत को सिर्फ एक उभरता हुआ बाजार नहीं, बल्कि भविष्य के बड़े व्यावसायिक केंद्र के रूप में देख सकता है।

कहां होगा फीफा वर्ल्ड कप 2026 का प्रसारण

भारत में फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राइट्स हासिल करने की सबसे मजबूत स्थिति में अभी जियोहॉटस्टार भी माना जा रहा है। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि कंपनी के पास पहले से विशाल स्पोर्ट्स नेटवर्क और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। JioHotstar जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए कंपनी बड़े स्तर पर डिजिटल स्ट्रीमिंग कर सकती है।

हालांकि, कीमत इसमें एक बड़ा रोड़ा है। फीफा अगर जियो की प्रस्तावित कीमत पर अपनी सहमति जताता है तो बात बन सकती है। अभी के हालात से कम से कम इतना तो तय है कि सिर्फ प्रतिष्ठा के लिए कोई भी कंपनी अब सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करने के मूड में नहीं है। वैसे भी सोनी जैसी दूसरी बड़ी मीडिया कंपनियों ने फीफा राइट्स को लेकर आक्रामक रुचि नहीं दिखाई है। इस लिहाज से भी देखे तो फीफा के पास भार को लेकर ज्यादा विकल्प नहीं हैं।

कुल मिलाकर फीफा वर्ल्ड कप के लिए अतिरिक्त बड़ा निवेश तभी संभव है, जब कंपनियों को मजबूत रिटर्न की उम्मीद हो। लेकिन देर रात के मैच और क्रिकेट-प्रधान विज्ञापन बाजार को देखते हुए कंपनियां जोखिम लेने से बच रही हैं।

आमतौर पर इतने बड़े खेल आयोजन के ब्रॉडकास्ट राइट्स महीनों पहले तय हो जाते हैं, ताकि प्रमोशन, मार्केटिंग, विज्ञापन बिक्री और स्टूडियो प्रोडक्शन की तैयारी समय पर हो सके। लेकिन इस बार देरी ने पूरे ऑपरेशन पर दबाव बढ़ा दिया है। अगर अंतिम समय में डील होती भी है, तब भी ब्रॉडकास्टर के सामने बेहद कम समय में पूरा सेटअप तैयार करने की चुनौती होगी।

चीन में भी भारत जैसी स्थिति रही

भारत की तरह चीन में भी फीफा को ब्रॉडकास्ट डील करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। हाल ही में वहां चीजें सुलझी हैं। फीफा को वहां भी अपनी शुरुआती कीमत काफी घटानी पड़ी। शुरुआत में जहां फीफा करीब 300 मिलियन डॉलर तक की उम्मीद कर रहा था, वहीं अंततः चीन मीडिया ग्रुप के साथ लगभग 60 मिलियन डॉलर में समझौता हुआ।

बहरहाल, मौजूदा उहापोह के बीच सोशल मीडिया पर भारतीय फुटबॉल फैंस लगातार चिंता जता रहे हैं। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजन का प्रसारण भारत में तय नहीं हो पा रहा, तो यह भारतीय फुटबॉल बाजार के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

इसके अलावा यह वर्ल्ड कप कई दिग्गज खिलाड़ियों का आखिरी टूर्नामेंट भी हो सकता है। खासकर लियोनेल मेसी, क्रिस्टियानो रोनाल्डो को लेकर फैंस के बीच भारी उत्साह है। ऐसे में अगर प्रसारण को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, तो करोड़ों भारतीय दर्शकों में निराशा बढ़ सकती है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल सभी संकेत यही बताते हैं कि बातचीत अभी जारी है और दोनों पक्ष कोई न कोई रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं। फीफा भारत जैसा विशाल बाजार खोना नहीं चाहता, जबकि भारतीय कंपनियां घाटे का सौदा करने से बचना चाहती हैं। ऐसे में संभावना यही है कि अंतिम समय में कोई समझौता हो जाए। फिलहाल, फीफा वर्ल्ड कप 2026 का भारतीय प्रसारण पैसे के गणित में फंसा हुआ है। उम्मीद की जानी चाहिए कि कोई न कोई रास्ता निकल आएगा।

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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