Saturday, November 29, 2025
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कौन था हिजबुल्लाह का टॉप कमांडर हैथम अली अल-तब्तबाई जो इजराइली हमले में मारा गया?

हैथम अली तब्तबाई हिजबुल्लाह का एक बेहद अहम सैन्य कमांडर था, जिसे संगठन का असली चीफ ऑफ स्टाफ माना जाता था। वह ईरान समर्थित इस समूह की कमांड संरचना में सेक्रेटरी-जनरल नईम कासिम के ठीक नीचे की रैंक पर था।

इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। रविवार को इजराइल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हिजबुल्लाह के शीर्ष सैन्य अधिकारी हैथम अली अल-तब्तबाई को को बेरूत के दक्षिणी उपनगर में एयर स्ट्राइक में मार गिराने की पुष्टि की। यह हमला ऐसे वक्त में हुआ है जब लेबनान के साथ लगभग एक साल से अमेरिकी मध्यस्थता में युद्धविराम लागू है।

इजराइल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने कहा कि तब्तबाई हिजबुल्लाह के असल चीफ ऑफ स्टाफ के तौर पर काम करता था। वह ईरान के समर्थन वाले संगठन के कमांड स्ट्रक्चर में सेक्रेटरी-जनरल नईम कासिम से ठीक नीचे रैंक पर था। हिजबुल्लाह के साथ उसका जुड़ाव 1980 के दशक से था।

इजराइली मीडिया के मुताबिक, पिछले एक साल में तब्तबाई को निशाना बनाने की तीन कोशिशें की गईं। तीसरी बार इजरायल सफल रहा और बेरूत की एक बिल्डिंग पर सटीक हमला कर दिया। इस हमले में तबातबाई के साथ पांच और लोगों की मौत हुई और 28 घायल हुए। इजराइली प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी साफ कहा कि तब्तबाई इस ऑपरेशन का मुख्य लक्ष्य था।

‘इजराइल ने रेड लाइन क्रॉस कर दी है’

हिजबुल्लाह ने भी तब्तबाई की मौत की पुष्टि कर दी है। उसने तब्तबाई को महान जिहादी कमांडर बताया और कहा कि उन्होंने अपनी खुशकिस्मत जिंदगी के आखिरी पल तक इजराइली दुश्मन का सामना करने के लिए काम किया।

हिजबुल्लाह के एक वरिष्ठ अधिकारी महमूद कमाती ने कहा कि इस हमले से इजराइल ने रेड लाइन क्रॉस कर दी है और संगठन यह फैसला कर रहा है कि जवाबी हमला किया जाए या नहीं। पिछले साल इजराइल ने हिजबुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह को भी मारा था। तब से तब्तबाई संगठन की नई सैन्य कमान संभाल रहे थे।

हैथम अली अल-तब्तबाई कौन था?

हैथम अली तब्तबाई हिजबुल्लाह का एक बेहद अहम सैन्य कमांडर था, जिसे संगठन का असली चीफ ऑफ स्टाफ माना जाता था। वह ईरान समर्थित इस समूह की कमांड संरचना में सेक्रेटरी-जनरल नईम कासिम के ठीक नीचे की रैंक पर था। उसका जन्म 1968 में लेबनान की राजधानी बेरूत में हुआ था। पिता ईरानी और मां लेबनानी थीं। बहुत कम उम्र में उसने हिजबुल्लाह का साथ चुन लिया और 12 साल की उम्र में ही संगठन में शामिल हो गया। 1980 के दशक में वह हिजबुल्लाह की दूसरी पीढ़ी के नेताओं में गिना जाने लगा।

तब्तबाई ने संगठन में कई अहम पद संभाले। वह एलीट राडवान फोर्स का कमांडर रहा और सीरिया तथा यमन में तैनात हिजबुल्लाह यूनिट्स की देखरेख करता था। क्रॉस-बॉर्डर ऑपरेशन्स और क्षेत्रीय नेटवर्क में उसकी भूमिका केंद्रीय थी। 2023–24 के इजराइल-हिजबुल्लाह युद्ध के दौरान उसे ऑपरेशन्स डिवीजन का चीफ बनाया गया, जिससे वह बैटलफील्ड प्लानिंग के केंद्र में आ गया। युद्ध के दौरान कई वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने के बाद वह संगठन का प्रमुख कमांडर बन गया और इजराइल के खिलाफ सैन्य रणनीति को आखिरी चरण तक डायरेक्ट करने लगा।

नवंबर 2024 में युद्धविराम लागू होने के बाद तब्तबाई को हिजबुल्लाह का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया गया। उसकी जिम्मेदारी संगठन की भविष्य की सैन्य तैयारी, फोर्स डिप्लॉयमेंट, सिचुएशनल असेसमेंट और कॉम्बैट डायरेक्टिव्स की रणनीति तैयार करना थी। वह धीरे-धीरे संगठन की केंद्रीय कमान का चेहरा बनता गया।

2016 में अमेरिका ने उसे वैश्विक आतंकी घोषित किया और अमेरिकी ट्रेजरी ने उसके बारे में जानकारी देने पर पांच मिलियन डॉलर का इनाम भी रखा। वह कई इजराइली हमलों से बच चुका था। सीरिया और लेबनान में उस पर हमले हुए, लेकिन वह हर बार बच निकला। जुलाई 2024 में हिजबुल्लाह के सैन्य प्रमुख फुआद शुक्र के मारे जाने के बाद ही वह वापस लेबनान लौटा और संगठन की नई कमान का हिस्सा बना।

तब्तबाई ईरान के प्रतिरोध की धुरी (एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस) नेटवर्क का भी मजबूत स्तंभ रहा। वह यमन के हूती विद्रोहियों से जुड़ा था और सीरिया में ईरान समर्थित गुटों के साथ भी काम करता था। हिजबुल्लाह के क्षेत्रीय ऑपरेशन्स को मजबूत करने में उसकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती थी। उसकी मौत को इजराइल की हालिया सबसे बड़ी सैन्य सफलता बताया जा रहा है।

गाजा सरकार का आरोप- 497 बार युद्धविराम का उल्लंघन

उधर गाजा सरकार के मीडिया कार्यालय ने आरोप लगाया है कि इजराइल ने अमेरिका की मध्यस्थता में लागू युद्धविराम का कम से कम 497 बार उल्लंघन किया है। 10 अक्टूबर को हमास और इजरायल के बीच युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन 44 दिनों में सैकड़ों फिलिस्तीनियों की मौत हुई, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा रहे।

शनिवार को अकेले 27 बार उल्लंघन हुआ, जिसमें 24 लोगों की मौत हुई और 87 घायल हुए। गाज़ा प्रशासन ने कहा कि इजरायल न केवल मानवीय प्रोटोकॉल तोड़ रहा है, बल्कि सहायता भी रोक रहा है। समझौते के तहत हर दिन 600 ट्रक राहत पहुंचनी थी, मगर औसतन 150 या उससे कम ट्रक ही गाज़ा में प्रवेश कर पा रहे हैं।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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