देशभर में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। कहीं तेज गर्मी के बीच अचानक आंधी-बारिश हो रही है तो कहीं मई के महीने में सामान्य से ठंडा मौसम महसूस किया जा रहा है। इन बदलते हालात के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून कब दस्तक देगा। मौसम विभाग के ताजा संकेतों को देखें तो मानसून तय समय पर आगे बढ़ रहा है और इसके 20 मई के आसपास अंडमान सागर में पहुंचने की संभावना है। इसके बाद यह 1 जून के आसपास केरल तट पर दस्तक दे सकता है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा है कि 14 से 20 मई के बीच दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में मानसून के प्रवेश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। दक्षिण-पश्चिमी हवाओं के मजबूत होने और निचले व मध्य वायुमंडलीय स्तरों पर नमी बढ़ने के कारण मानसून की रफ्तार तेज हो सकती है।
दक्षिण भारत में मौसम की मौजूदा गतिविधियां भी इसी ओर इशारा कर रही हैं। तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और माहे में अगले सात दिनों तक व्यापक बारिश का अनुमान है। कई इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह प्री-मानसून गतिविधियां बताती हैं कि मानसून अपनी सामान्य गति से आगे बढ़ रहा है।
ऑस्ट्रेलिया से क्या है मानसून का खास कनेक्शन?
हालांकि भारत में मानसून की दस्तक का संकेत केवल देश के मौसम पैटर्न से ही नहीं मिलता। इसका एक खास संबंध ऑस्ट्रेलिया से भी है। सुनने में यह अजीब लग सकता है कि हजारों किलोमीटर दूर ऑस्ट्रेलिया का मौसम भारत की बारिश को प्रभावित करता है, लेकिन मौसम विज्ञान में यह एक स्थापित तथ्य है।
हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के मौसम विभाग ने 2025-26 के उत्तरी ऑस्ट्रेलियाई वेट सीजन के समाप्त होने की घोषणा की है। यही वह संकेत है, जिसे भारतीय मौसम वैज्ञानिक बेहद ध्यान से देखते हैं। दरअसल, जब ऑस्ट्रेलिया का बारिश वाला मौसम खत्म होता है, तो वैश्विक मानसूनी प्रणाली उत्तर की ओर खिसकने लगती है।
यह पूरी प्रक्रिया इंटरट्रॉपिकल कन्वर्जेंस जोन (ITCZ) से जुड़ी है। यह भूमध्य रेखा के आसपास बादलों और नमी की एक विशाल पट्टी होती है, जो हर साल सूरज की स्थिति के साथ उत्तर और दक्षिण की ओर खिसकती रहती है। जब यह पट्टी उत्तर की ओर बढ़ती है, तो हिंद महासागर से नमी से भरी हवाएं भारत की ओर खिंचने लगती हैं और मानसून सक्रिय हो जाता है।
मानसून की प्रक्रिया शुरू?
फिलहाल यही प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह प्रणाली भूमध्य रेखा पार कर मालदीव के आसपास पहुंच चुकी है और अब श्रीलंका होते हुए अंडमान-निकोबार की तरफ बढ़ रही है। यही मानसून का पारंपरिक रास्ता है।
अंडमान-निकोबार मानसून का भारत में पहला पड़ाव होता है। यहां पहुंचने के बाद यह धीरे-धीरे केरल की ओर बढ़ता है। केरल में मानसून का सामान्य आगमन 1 जून माना जाता है और यहीं से पूरे देश में बारिश के मौसम की औपचारिक शुरुआत होती है।
हालांकि इस साल एल नीनो की विकसित होती परिस्थितियों के कारण बारिश सामान्य से थोड़ी कम रहने का अनुमान है। आईएमडी के मुताबिक जून से सितंबर के बीच देश में दीर्घकालिक औसत का करीब 92 प्रतिशत वर्षा हो सकती है।
इसके बावजूद शुरुआती संकेत उत्साहजनक हैं। दक्षिण भारत में सक्रिय प्री-मानसून बारिश, अंडमान क्षेत्र में बनती अनुकूल परिस्थितियां और ऑस्ट्रेलिया से मिले संकेत यही बताते हैं कि मानसून समय पर दस्तक देने की राह पर है। यानी करोड़ों किसानों को जिस बारिश का इंतजार है, वह अब ज्यादा दूर नहीं।

