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राज की बातः जब इंदिरा गांधी ने सीताराम केसरी के सामने फेंक दिया था नाश्ते का प्लेट

1977 के लोकसभा चुनाव के समय प्रचार के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी गांधी मैदान में भाषण देने आईं। राज्य के बड़े कांग्रेसी नेता रामलखन सिंह यादव, विद्याकर कवि, केदार पांडेय, सीताराम केसरी भी उपस्थित थे। गांधी मैदान के उत्तर-पश्चिम छोर पर मौर्य होटल के सामने से टमाटर और अंडे फेंके जाने लगे।

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indira gandhi sitaram kesari

बिहार विधानसभा का चुनाव निकट है। भाजपा ने एनडीए के लिए 243 में से 225 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था, लेकिन गृहमंत्री अमित शाह, जो दो दिनों के दौरे पर राज्य में आए थे, शनिवार को इस लक्ष्य को घटाकर 160 कर दिया। हरेक चुनाव के समय नेता विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर संभावित परिणाम का अनुमान लगाते हैं।

1977 के लोकसभा चुनाव के समय प्रचार के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी गांधी मैदान में भाषण देने आईं। राज्य के बड़े कांग्रेसी नेता रामलखन सिंह यादव, विद्याकर कवि, केदार पांडेय, सीताराम केसरी भी उपस्थित थे। गांधी मैदान के उत्तर-पश्चिम छोर पर मौर्य होटल के सामने से टमाटर और अंडे फेंके जाने लगे। उस समय बिस्कोमॉन भवन के सामने ही मंच बना था। प्रधानमंत्री की अपील का असर नहीं हुआ। इंदिरा जी ने भाषण बीच में ही छोड़ दिया और दिल्ली जाने के लिए निकल पड़ीं। पत्रकारों को बताया गया कि वह राजभवन में प्रेस से बात करेंगी। उस समय टेलीविजन चैनल नहीं था और अखबार भी बहुत कम थे।

राजभवन में कांग्रेस के राज्य नेतृत्व के सामने प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के बचे हुए मुद्दों की चर्चा की। एक पत्रकार ने पूछा, “बिहार से लोकसभा की 54 सीटें हैं, कांग्रेस को कितनी मिलेगी?” प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी ने तुरंत जवाब दिया, 48 से 50। इंदिरा जी जो नाश्ते की प्लेट से बिस्किट ले रही थीं, गुस्से में तमतमा कर प्लेट केसरी जी की ओर टेबल पर फेंकी और कहा, “अभी आपने गांधी मैदान में जो देखा, उसके बाद भी 48 का दावा कर रहे हैं?”

उड़ीसा में बीजू पटनायक भी भविष्यवाणी करते थे। उनका चुनाव प्रचार पूरी के जगन्नाथ मंदिर से शुरू होता था। वह भाषण के बीच मौन हो जाते और आंखें बंद कर लेते। फिर अपने समर्थकों से कहते, “कलिया (जगन्नाथ जी) से बात हो रही थी। कह रहे थे, 26 सीट जनता वाले जीत जाएंगे।” जब चुनाव परिणाम आया तो उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभिन्न कारण बताए, जिसके कारण परिणाम निराशाजनक रहा। जब उनसे कहा गया, “आपको काफी निराशा हुई होगी?” तो उनका जवाब था, “तुम मेरे बारे में नहीं जानते हो। मैं एक बार सात निर्वाचन क्षेत्रों से लड़ा था, सभी जगह से हार गया था। उस समय भी निराशा नहीं हुई।”

बीजू पटनायक को याद दिलाया गया, “आपने दावा किया था कि जगन्नाथ जी ने आपसे कहा था कि सभी जगह जीत होगी। लेकिन परिणाम तो उल्टा हुआ।” उनका जवाब था, “There was some problem in communication. Kaliya said six, I heard 26 (संप्रेषण में कुछ गड़बड़ी हो गई थी। कलिया (जगन्नाथ जी) ने कहा था छह, मैंने सुना छब्बीस)।”

छत्तीसगढ़ में राज्य विधानसभा का पहला चुनाव 2003 में हो रहा था। मुख्यमंत्री अजीत जोगी, जो खुद भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी रह चुके थे और कई जगहों पर निर्वाचन अधिकारी भी रहे थे, चुनाव के बाद जनमत जानने के इच्छुक थे। वह प्रायः जिला मजिस्ट्रेटों से फीडबैक लेते थे। उनका अनुमान था कि 90 में से 50 सीटों पर कांग्रेस की विजय होगी। एक कलेक्टर ने उन्हें कहा, “12 में 8 मिल रही हैं।” प्रायः सभी अधिकारी ओवर एस्टीमेट करके बता रहे थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जो भाजपा के लिए सक्रिय था, उसकी गतिविधियों से डीएम अनभिज्ञ रहे और कांग्रेस को केवल 37 सीटें मिलीं।

उधर पश्चिम के गुजरात में सब्जी मंडी और मछली बाजार से मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल को चुनाव परिणाम की सही जानकारी मिली। मुख्यमंत्री ने सौराष्ट्र और कच्छ के सभी उच्च अधिकारियों की बैठक राजकोट के राजकीय अतिथिशाला में बुलाई। सरकारी एजेंडा खत्म होने के बाद उन्होंने बारी-बारी से सभी से संभावित परिणाम की जानकारी ली। कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर ने अपना-अपना ओपिनियन बताया और सत्तारूढ़ दल के लिए उज्ज्वल भविष्य बताया। लेकिन रविंद्र नारायण भट्टाचार्य, जो आयुक्त थे, ने सभी के विपरीत बताया। तब मुख्यमंत्री ने उनसे पूछा, “आपकी रिपोर्ट बाकी लोगों से अलग क्यों है?”

बांग्ला बोलने वाले अधिकारी ने जवाब दिया, “मैं प्रतिदिन सुबह खुद, बिना किसी सिपाही के साथ, जुबली बाग स्थित सब्जी मंडी और मछली बाजार जाता हूं और लोगों से बात करता हूं।”

वास्तव में जब चुनाव परिणाम आया तो सब्जी मंडी और मछली बाजार से जो जानकारी लेकर मुख्यमंत्री को दी गई थी, वही सही निकली।

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लव कुमार मिश्र
लव कुमार मिश्र, 1973 से पत्रकारिता कर रहे हैं,टाइम्स ऑफ इंडिया के विशेष संवाददाता के रूप में देश के दस राज्यों में पदस्थापित रह। ,कारगिल युद्ध के दौरान डेढ़ महीने कारगिल और द्रास में रहे। आतंकवाद के कठिन काल में कश्मीर में काम किए।

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