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राज की बातः जब डीएम रहते अजीत जोगी ने सिगरेट के पैकेट पर लिखकर दे दी 5 एकड़ जमीन

अजीत जोगी जब अविभाजित मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के कलेक्टर थे, तब अपने संभागीय आयुक्त के निर्देश पर जिला पुलिस अधीक्षक एम.एस. गिल के साथ अमरकंटक दौरे पर आए। दोनों अधिकारी सुबह टहलने निकले थे। उनकी नजर एक साधु पर पड़ी…

अजीत जोगी, जिनका कोरोना काल में 30 मई 2020 को निधन हुआ, 1970 बैच के आईएएस अधिकारी थे। वे छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री भी थे।

जब वे अविभाजित मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के कलेक्टर थे, तब अपने संभागीय आयुक्त के निर्देश पर जिला पुलिस अधीक्षक एम.एस. गिल के साथ अमरकंटक दौरे पर आए। दोनों अधिकारी सुबह टहलने निकले थे। उनकी नजर एक साधु पर पड़ी।

श्रीमती रेणु जोगी बताती हैं, “एक बाबा खुले आसमान के नीचे एक बड़े साल के पेड़ के नीचे छोटी-सी धोती पहने समाधि में बैठे थे।”

बाबा का आशीर्वाद लेने अधिकारी अगले दिन उनसे मिले। बाबा ने इच्छा व्यक्त की, “यदि मेरी मनपसंद पर्याप्त जमीन जल्दी मिल जाए, तो मैं अमरकंटक में आश्रम बनाने पर विचार करूंगा।”

डॉ. रेणु जोगी ने बताया, “अजीत जोगी इंडिया किंग्स सिगरेट पिया करते थे। उन्होंने उस सिगरेट के पैकेट के अंदर का गत्तानुमा कागज निकालकर आश्रम के लिए पांच एकड़ भूमि अपने कदमों से नापी और बाबा को तत्काल आबंटन आदेश सिगरेट के उसी पुट्ठे पर लिखकर दे दिया।”

अनुमान के अनुसार, अजीत जोगी के 43 कदम 100 फीट के बराबर होते थे। इसके आधार पर अनुमानित लंबाई और चौड़ाई का उल्लेख कर दिया गया।

अजीत जोगी ने बाबा से कहा, “यही आपका पट्टा है। मैंने कलेक्टर की हैसियत से इस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अब आप इस जमीन के मालिक हैं।” साथ ही उन्होंने नियमानुसार पटवारी और नायब तहसीलदार को अनुमोदन पत्र बाबा को देने का निर्देश दिया।

आज अमरकंटक में विशाल कल्याणदास आश्रम है, जहां कलेक्टर के निर्देश पर आदिवासी बालक-बालिकाओं को निःशुल्क शिक्षा दी जाती है। यहां 15,000 बालिकाओं के लिए कल्याणिक केंद्रीय शिक्षा संस्थान भी संचालित हो रहा है।

सिगरेट से ही जुड़ा एक और किस्सा…

मुझे एक और घटना याद आ रही है। तब अविभाजित बिहार के पटना जिले में पी.पी. अग्रवाल कलेक्टर हुआ करते थे। वे राजगीर से अपनी एंबेसडर कार से पटना लौट रहे थे। बख्तियारपुर के पास गाड़ी का एक चक्का पंक्चर हो गया। जब ड्राइवर नया चक्का लगा रहा था, तब कलेक्टर साहब बाहर सिगरेट पी रहे थे। तभी पास के गांव के कुछ लोग आए और उन्होंने खाट पर साहब को बैठाया तथा पानी और बताशा दिया।

कलेक्टर साहब प्रसन्न होकर गांव वालों से बोले, “पटना कलेक्टरी में कोई काम हो तो बताइए।”

एक ग्रामीण ने बताया कि उसने बंदूक के लाइसेंस के लिए छह महीने पहले आवेदन किया था, लेकिन अभी तक उसे लाइसेंस नहीं मिला है। कलेक्टर साहब ने सिगरेट के पैकेट के पन्ने पर लिखा, “आर्म्स मजिस्ट्रेट, लाइसेंस शुड बी इश्यूड टू द बियरर (शस्त्र मजिस्ट्रेट, यह पर्चा लाने वाले को लाइसेंस जारी कर दिया जाए)।”

फिर उन्होंने उस आवेदक से कहा, “इसे पटना में आर्म्स मजिस्ट्रेट, जो डिप्टी कलेक्टर हैं, उन्हें दे दीजिएगा। मैंने आदेश कर दिया है।”

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लव कुमार मिश्र
लव कुमार मिश्र, 1973 से पत्रकारिता कर रहे हैं,टाइम्स ऑफ इंडिया के विशेष संवाददाता के रूप में देश के दस राज्यों में पदस्थापित रह। ,कारगिल युद्ध के दौरान डेढ़ महीने कारगिल और द्रास में रहे। आतंकवाद के कठिन काल में कश्मीर में काम किए।
लव कुमार मिश्र
लव कुमार मिश्र, 1973 से पत्रकारिता कर रहे हैं,टाइम्स ऑफ इंडिया के विशेष संवाददाता के रूप में देश के दस राज्यों में पदस्थापित रह। ,कारगिल युद्ध के दौरान डेढ़ महीने कारगिल और द्रास में रहे। आतंकवाद के कठिन काल में कश्मीर में काम किए।
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