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Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में 18.70 लाख मृत मतदाता मिले, हटाए जाएंगे 35 लाख नाम!

सीईओ कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि अब तक मतदाताओं से संग्रहित फॉर्मों में से 88.50 प्रतिशत का डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है। अधिकारी का कहना है कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद हटाए जाने वाले मतदाताओं की संख्या इससे भी अधिक हो सकती है।

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पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) अभियान के पहले चरण के अंत तक बड़ा खुलासा हुआ है। चुनाव आयोग ने अब तक करीब 18.70 लाख मृत मतदाताओं की पहचान कर ली है, जो अभी भी मौजूदा मतदाता सूची में दर्ज थे। यह आंकड़ा 29 नवंबर की शाम तक का है।

मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के दफ्तर से मिली जानकारी के अनुसार, आयोग अब अनुमान लगा रहा है कि 9 दिसंबर को जारी होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची से करीब 35 लाख नामों को हटाया जा सकता है। इनमें मृत मतदाताओं के अलावा डुप्लीकेट नाम, लापता मतदाता और ऐसे लोग भी शामिल हैं जो स्थायी रूप से अन्य राज्यों में बस चुके हैं।

डिजिटाइजेशन में खुल रही गड़बड़ियों की परत

सीईओ कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि अब तक मतदाताओं से संग्रहित फॉर्मों में से 88.50 प्रतिशत का डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है। अधिकारी का कहना है कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद हटाए जाने वाले मतदाताओं की संख्या इससे भी अधिक हो सकती है। पूरे आंकड़े 9 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद साफ होंगे। वर्तमान में बंगाल में कुल मतदाताओं की संख्या 7,66,37,529 है, जो 27 अक्टूबर 2025 की मतदाता सूची के अनुसार दर्ज है।

तीन चरणों में पूरा होगा एसआईआर

स्पेशल इंटेंसिव रिविजन की शुरुआत 4 नवंबर को हुई थी और इसे तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। बंगाल में पिछला एसआईआर अभियान साल 2002 में चलाया गया था। नियमों के अनुसार, जिन मतदाताओं या उनके माता-पिता के नाम 2002 की सूची में दर्ज हैं, उन्हें वैध मतदाता माना जाएगा। जिनके नाम उस सूची में नहीं हैं, उन्हें अपना नाम बरकरार रखने के लिए चुनाव आयोग द्वारा तय 11 पहचान पत्रों में से किसी एक का प्रमाण देना होगा।

आधार कार्ड पर भी नियम सख्त

आधार कार्ड को पहचान के लिए 12वें दस्तावेज के रूप में शामिल तो किया गया है, लेकिन आयोग ने साफ किया है कि केवल आधार कार्ड पर्याप्त नहीं होगा। मतदाताओं को इसके साथ 11 अन्य दस्तावेजों में से किसी एक को और जोड़ना होगा, तभी उनका नाम सूची में कायम रखा जा सकेगा।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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