Home विचार-विमर्श खेती बाड़ी-कलम स्याही: बीजेपी और टीएमसी, दोनों की निगाहें नॉर्थ बंगाल पर! 

खेती बाड़ी-कलम स्याही: बीजेपी और टीएमसी, दोनों की निगाहें नॉर्थ बंगाल पर! 

पश्चिम बंगाल में यदि भाजपा का कहीं गढ़ है तो वह उत्तर बंगाल ही है। ममता ने भाजपा के इसी सियासी दुर्ग पर चढ़ाई कर दी है। बीते मंगलवार को ममता दीदी ने  दार्जिलिंग जिले के माटीगारा और जलपाईगुड़ी के मैनागुड़ी में जनसभा की थी।

Kolkata: A shopkeeper shows the masks of Prime Minister and BJP leader Narendra Modi and West Bengal Chief Minister and TMC supremo Mamata Banerjee ahead of 2019 Lok Sabha elections, in Kolkata on March 29, 2019. (Photo: Kuntal Chakrabarty/IANS)
फाइल फोटो- IANS

पश्चिम बंगाल में इस बार का विधानसभा चुनाव सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी, दोनों के लिए ‘करो या मरो’ जैसी है।  इस चुनाव में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। जहां भारतीय जनता पार्टी बंगाल की सत्ता में आने के लिए बेताब है तो वहीं टीएमसी अपना सियासी दुर्ग को बचाए रखने की कवायद में है।

टीएमसी सुप्रीमो और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उत्तर और दक्षिण बंगाल के लिए अलग-अलग रणनीति बनाकर चुनावी जंग में प्रवेश कर चुकीं हैं। ममता बनर्जी ने जहां उत्तर बंगाल का मोर्चा संभाला है तो वहीं अपने भतीजे और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी को साउथ बंगाल में सक्रिय कर दिया है।

वहीं दूसरी ओर भाजपा के चुनाव प्रचार को तेज करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह लगातार पश्चिम बंगाल पर निगाह बनाए हुए हैं। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर किए जा रहे भाजपा  के चुनावी कैंपेन के बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आगामी 28 मार्च को राज्य का दौरा करेंगे। अपने इस दौरे में  अमित शाह एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और उसमें ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के खिलाफ औपचारिक तौर पर चार्जशीट जारी करेंगे, जिसमें सत्तारूढ़ दल के खिलाफ भाजपा के आरोपों का ब्यौरा होगा।

बताया जा रहा है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ दिनों बाद, भाजपा अपना घोषणापत्र जारी करेगी, जिसे ‘संकल्प पत्र’ नाम दिया जाएगा।

उत्तर बंगाल की सीटों पर नजर

बंगाल का यह चुनाव इस बार कई मायनों में दिलचस्प है। इस बार ममता बनर्जी खुद मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के प्रमुख ठिकानों पर सेंध लगाने में जुटी हुई है। इसी कड़ी में उनकी निगाह उत्तर बंगाल के विधानसभा सीटों पर है। उन्होंने 24 मार्च से उत्तर बंगाल में चुनावी कैंपेन की शुरुआत की थी। दरअसल टीएमसी समझती है कि उत्तर बंगाल में भाजपा मजबूत है। ऐसे में ममता खुद उत्तर बंगाल में भाजपा की चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।

वहीं उनके भतीजे और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी साउथ बंगाल के जिलों पर फोकस कर रहे हैं, जो ममता बनर्जी की पार्टी का गढ़ माना जाता है।

दरअसल बंगाल में टीएमसी के दो ही प्रमुख चेहरे हैं, ममता बनर्जी और दूसरे अभिषेक बनर्जी। इस तरह टीएमसी ने अपने दोनों ही नेताओं को अलग-अलग इलाके में लगाकर भाजपा के खिलाफ चक्रव्यूह रचा है।

पश्चिम बंगाल में यदि भाजपा का कहीं गढ़ है तो वह उत्तर बंगाल ही है। ममता ने भाजपा के इसी सियासी दुर्ग पर चढ़ाई कर दी है। बीते मंगलवार को ममता दीदी ने  दार्जिलिंग जिले के माटीगारा और जलपाईगुड़ी  के मैनागुड़ी में जनसभा की थी।

ममता बनर्जी का यह कदम बंगाल के उत्तरी क्षेत्र में राजनीतिक पकड़ बनाने का दांव माना जा रहा, जहां पर भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनावों से गहरी पैठ बनाई थी। 2021  विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने इन इलाकों में अपनी पकड़ बनाए रखा था। हालांकि 2024 में टीएमसी ने बेहतर प्रदर्शन के बाद भी नार्थ बंगाल में अपनी जड़े नहीं जमा सकी। यही वजह है कि ममता बनर्जी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में नार्थ बंगाल का मोर्चा खुद संभाल रखा है।

साउथ और नॉर्थ बंगाल का फर्क

दरअसल साउथ और नॉर्थ बंगाल में काफी फर्क है। ये फर्क हमें कई मोर्चों पर साफ-साफ दिखता है। यही कारण है कि यहां अलग राज्य की मांग लंबे समय से होती रही है। राजधानी कोलकाता से नॉर्थ बंगाल की दूरी एक बड़ा कारण रहा है जिसके कारण यहां छोटी-छोटी राजनीतिक पार्टियों, समुदायों की मांगों ने अलग राज्य का  जोर  पकड़ा, दार्जिलिंग में अलग गोरखालैंड की मांग बढ़ती चली गई। 

चाय बागानों और आदिवासी इलाकों के जरिए भाजपा ने यहां अपनी पकड़ बनाई। इसी तरह कूचबिहार और दिनाजपुर जिलों के लिए भाजपा ने स्थानीय मुद्दों के साथ राजवंशी समुदाय को पकड़ा और सीटें भी हासिल कीं। हालांकि, इस बार उत्तर बंगाल में भाजपा के लिए मुश्किलें भी कम नहीं है। पार्टी के कुछ नेता पहले ही टीएमसी में शामिल हो चुके हैं। सिलीगुड़ी और आसपास विधानसभा क्षेत्र में टीएमसी लगातार मजबूत होते चली गई है।  इसका सबसे बड़ा असर निकाय चुनावों में देखने को मिला है। पहली बार सिलीगुड़ी नगर निगम पर टीएमसी का पूरी तरह से कब्जा है, यहां तक कि सिलीगुड़ी महकमा परिषद जो कभी भी टीएमसी के पास नहीं रहा, उस पर भी ममता की पार्टी को जीत मिली है।

जहां तक भारतीय जनता पार्टी की बात है तो देश भर के नेता इन दिनों आपको बंगाल में दिख जाएंगे। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी के लिए भी यह चुनाव बेहद अहम है। आने वाले दिनों में वह सिलीगुड़ी और दुर्गापुर में लगातार बैठकें करने वाले हैं। इस बैठक में सुनील बंसल और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव भी मौजूद रहेंगे। इस बैठक में आसपास के जिलों के नेताओं, प्रत्याशियों और अन्य महत्वपूर्ण लोगों को बुलाया गया है। भाजपा की रणनीति यह है कि गली-गली में घूमकर कैंपेन किया जाए। बड़े नेताओं को भी जमीनी प्रचार में उतारा जाए। बूथ लेवल मैनेजमेंट और केंद्रीय योजनाओं के प्रचार पर फिलहाल ज्यादा फोकस किया जा रहा है।

बंगाल चुनाव में जीत के लिए भाजपा कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। बूथ लेवल पर माइक्रो मैनेजमेंट के लिए पार्टी ने कई राज्यों से कार्यकर्ताओं की फ़ौज पश्चिम बंगाल में तैनात की है।

इन सबके बीच टीएमसी  में अब अभिषेक बनर्जी की भूमिका स्पष्ट हो रही है। संगठनात्मक फैसलों और राष्ट्रीय मुद्दों पर अभिषेक की बेबाक राय से पता चलता है कि ममता उन्हें भविष्य के नेतृत्व के रूप में स्थापित कर रही हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 18 सीटें जीतकर टीएमसी  को कड़ी चुनौती दी थी। लेकिन, 2021 विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 294 में से 213 सीटें जीतकर जोरदार वापसी की। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी टीएमसी  की बढ़त बरकरार रही। यही वजह है कि इस बार ममता बनर्जी ने अलग-अलग विधानसभा सीटों पर अभिषेक बनर्जी की सलाह मानी है।

पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव होंगे, जो पिछले विधानसभा चुनावों में हुए आठ चरणों के लंबे चुनाव की तुलना में एक महत्वपूर्ण कमी है। राज्य की सभी विधानसभा सीटों के नतीजे 4 मई को सामने आएंगे।

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गिरीन्द्र नाथ झा
गिरीन्द्र नाथ झा ने पत्रकारिता की पढ़ाई वाईएमसीए, दिल्ली से की. उसके पहले वे दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक कर चुके थे. आप CSDS के फेलोशिप प्रोग्राम के हिस्सा रह चुके हैं. पत्रकारिता के बाद करीब एक दशक तक विभिन्न टेलीविजन चैनलों और अखबारों में काम किया. पूर्णकालिक लेखन और जड़ों की ओर लौटने की जिद उनको वापस उनके गांव चनका ले आयी. वहां रह कर खेतीबाड़ी के साथ लेखन भी करते हैं. राजकमल प्रकाशन से उनकी लघु प्रेम कथाओं की किताब भी आ चुकी है.

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