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मौसम का मिजाज अचानक क्यों बदला-बदला है? भारत से लेकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बारिश और तूफान

मौसम के सामान्य पैटर्न को देखें तो दिसंबर से फरवरी के बीच हर महीने 4 से 6 मजबूत पश्चिमी विक्षोभ आते हैं। साल भर में इनकी संख्या करीब 16 से 24 होती है। अब पैटर्न बदला है। पश्चिमी विक्षोभ का असर अब अप्रैल तक भी दिखने लगा है।

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Jalandhar: People ride scooters with umbrellas amid continuous rainfall affecting daily life in Jalandhar on Thursday, March 19, 2026. (Photo: IANS)
फाइल फोटो (IANS)

नई दिल्ली: उत्तर भारत में इन दिनों असमान्य मौसमी प्रणाली नजर आ रही है। मार्च का महीना आमतौर पर गर्मी की शुरुआत का संकेत देता है। गर्मी तेजी से बढ़ी और ये भी पिछले कुछ सालों से चली आ रही असमान्य तस्वीर है। लेकिन इस बीच मौसम ने फिर से करवट ली है। भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कई इलाकों में तेज बारिश, आंधी, तेज हवाएं और ओलावृष्टि देखने को मिल रही है।

यह सबकुछ न केवल अपने समय बल्कि अपनी बनावट की वजह से भी असामान्य माना जा रहा है। दरअसल, इस बार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ एक सीधी रेखा जैसी संरचना में दिखाई दे रहा है, जिसने अफगानिस्तान से लेकर पाकिस्तान होते हुए भारत तक करीब 1000 किलोमीटर लंबी बारिश की पट्टी जैसी बना दी है।

बदला-बदला पश्चिमी विक्षोभ

आमतौर पर पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यसागर क्षेत्र से बनने वाले एक्स्ट्राट्रॉपिकल साइक्लोन होते हैं। ये उत्तर-पूर्व दिशा में मुड़ते हैं और सर्दियों में ज्यादा सक्रिय रहते हैं। इससे सर्दियों में शीत लहर आती है और बर्फबारी होती है। लेकिन इस बार इसका स्वरूप एक सीधी ट्रफ जैसा है, जो मौसम के बदलते और अनिश्चित पैटर्न की ओर इशारा करता है।

यह सक्रिय सिस्टम उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर बने ऊपरी हवा के चक्रवाती सर्कुललेशन से जुड़ा है। इसकी वजह से उत्तर-पश्चिम भारत में गरज-चमक के साथ बारिश, 40 से 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं, कुछ जगहों पर ओले और हल्की से मध्यम बारिश या बर्फबारी दर्ज की जा रही है।

इसका असर देश के अलग-अलग हिस्सों में भी दिखाई दिया है। खासकर उप-हिमालयी क्षेत्रों पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी से बहुत भारी बारिश हुई है, जबकि दक्षिण कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में तेज बारिश दर्ज की गई। कई राज्यों में ओलावृष्टि भी हुई है। आने वाले घंटों में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड जैसे राज्यों में असर नजर आने की संभावना है।

मौसम अपडेट: कई मौसम प्रणालियों की आपसी टक्कर से बढ़ा असर

मौजूदा पश्चिमी विक्षोभ के साथ मध्य और ऊपरी पश्चिमी हवाओं में एक ट्रफ भी सक्रिय है। यह ट्रफ उत्तर मध्य प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम राजस्थान, हरियाणा, पूर्वोत्तर असम, तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु-केरल के निचले क्षोभमंडल में बने कई चक्रवाती परिसंचरणों से मिल रही है।

इसी आपसी इंटरैक्शन की वजह से कई क्षेत्रों में मौसम की गतिविधियां तेज हो गई हैं। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी हिमालय और आसपास के मैदानी इलाकों में इसका असर शुक्रवार तक बना रह सकता है, इसके बाद इसमें कमी आने की संभावना है। हालांकि 22 मार्च से एक नया लेकिन कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के आने की संभावना भी जताई गई है।

मौसम अपडेट: कहां से आ रही है इतनी नमी?

इस असामान्य पश्चिमी विक्षोभ के लिए नमी का मुख्य स्रोत भूमध्यसागर, कैस्पियन सागर, काला सागर (ब्लैक सी) और पर्शियन गल्फ से होने वाला वाष्पीकरण है। जब यह सिस्टम मध्य-पूर्व से गुजरता है तो अरब सागर से अतिरिक्त नमी लेकर और मजबूत हो जाता है। हिमालय से टकराने पर यह नमी और सक्रिय हो जाती है।

इसके अलावा गुजरात से मन्नार तक बनी ट्रफ और अलग-अलग चक्रवाती सिस्टम निचले स्तर पर हवाओं के मिलने को बढ़ा रहे हैं, जिससे तेज मौसम गतिविधियां देखने को मिल रही हैं।

दिल्ली और एनसीआर में भी शुक्रवार तक हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान 25 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है, जो सामान्य से कम है।

मार्च के आखिर में बारिश क्यों असमान्य है?

अगर मौसम के सामान्य पैटर्न को देखें तो दिसंबर से फरवरी के बीच हर महीने 4 से 6 मजबूत पश्चिमी विक्षोभ आते हैं। साल भर में इनकी संख्या करीब 16 से 24 होती है। इस बार सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ आमतौर पर कमजोर ही रहा और काफी देर से प्रभावी रूप से सक्रिय हुआ। हालांकि, मार्च के अंत तक जेट स्ट्रीम कमजोर होकर उत्तर की ओर खिसक जाता है।

आमतौर पर इस समय केवल एक या दो पश्चिमी विक्षोभ ही सक्रिय होते हैं। हाल के वर्षों में हालांकि एक नया ट्रेंड देखने को मिला है। पश्चिमी विक्षोभ का असर अब अप्रैल तक भी देखने को मिलने लगा है। इसकी एक वजह सबट्रॉपिकल जेट का मजबूत होना और जलवायु में बढ़ती अनिश्चितता को माना जा रहा है।

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...

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