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विक्रम भट्ट को कोर्ट से नहीं मिली राहत, नकली बिल, जाली दस्तावेज; 30 करोड़ के ठगी की कहानी

यह मामला उदयपुर के जाने-माने डॉक्टर अजय मुर्दिया से जुड़ा है, जो इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनियों और इंदिरा आईवीएफ हॉस्पिटल के संस्थापक हैं। आरोप है कि भट्ट दंपती और उनके छह सहयोगियों ने मिलकर डॉक्टर से करीब 30 करोड़ की ठगी की।

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राज और गुलाम जैसी फिल्मे बनाने वाले फिल्ममेकर विक्रम भट्ट इन दिनों एक बड़े ठगी को लेकर विवादों में हैं। विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी पर 30 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं।

मंगलवार को अदालत ने दोनों को मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सात दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद अब दंपती को उदयपुर की सेंट्रल जेल भेजा जाएगा। यह जानकारी डीएसपी सूर्यवीर सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई को दी।

कैसे शुरू हुआ मामला

राजस्थान पुलिस ने विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को 7 दिसंबर को मुंबई से गिरफ्तार किया था इसके बाद 8 दिसंबर की रात दोनों को उदयपुर लाया गया। अगले दिन उन्हें अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां से सात दिन की पुलिस हिरासत मंजूर की गई।

यह मामला उदयपुर के जाने-माने डॉक्टर अजय मुर्डिया से जुड़ा है, जो इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनियों और इंदिरा आईवीएफ हॉस्पिटल के संस्थापक हैं। आरोप है कि भट्ट दंपती और उनके छह सहयोगियों ने मिलकर डॉक्टर से करीब 30 करोड़ की ठगी की।

पुलिस के मुताबिक, यह पूरा विवाद डॉ. मुर्डिया की दिवंगत पत्नी पर बनने वाली एक बायोपिक से शुरू हुआ। अप्रैल 2024 में एक परिचित के जरिए उनकी मुलाकात आरोपियों से कराई गई। मई 2024 में भट्ट दंपती और डॉक्टर के बीच कुल चार फिल्मों के निर्माण को लेकर 47 करोड़ रुपये का समझौता हुआ, जिसमें एक फिल्म उनकी पत्नी की बायोपिक थी।

डॉ. मुर्डिया का आरोप है कि उन्हें इन प्रोजेक्ट्स से करीब 200 करोड़ की कमाई का भरोसा दिलाया गया था। लेकिन समय बीतने के बावजूद वादे के मुताबिक काम नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने उदयपुर के भूपालपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराई, जहां 17 नवंबर को धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई।

फर्जी बिल, फर्जी खाते, 2 अधूरी फिल्में और पैसे का हेरफेर

पुलिस का कहना है कि समझौते के तहत चार फिल्मों का निर्माण होना था। शुरुआती तौर पर दो फिल्में बनीं, लेकिन बाकी दो पर कोई काम नहीं हुआ। पहली नजर में यह मामला एक कारोबारी या दीवानी विवाद जैसा लग सकता है, लेकिन जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने इसे गंभीर आपराधिक मामला बना दिया।

जांचकर्ताओं के मुताबिक, 47 करोड़ में से बड़ी रकम कथित तौर पर ऐसे लोगों और खातों में भेजी गई, जिन्हें फिल्म निर्माण से जुड़ा दिखाया गया, लेकिन वे असल में फर्जी थे। पुलिस का दावा है कि फर्जी वेंडरों के नाम पर नकली बिल, बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए सैलरी वाउचर और अन्य जाली दस्तावेज तैयार किए गए।

इंडिया टुडे हिंदी से बात करते हुए उदयपुर के आईजी गौरव श्रीवास्तव ने कहा था कि जांच में यह सामने आया है कि पैसा पहले ऐसे खातों में ट्रांसफर किया गया जिनका फिल्म निर्माण से कोई वास्तविक संबंध नहीं था और बाद में वह रकम अन्य खातों में भेजी गई, जिनमें भट्ट की पत्नी का बैंक खाता भी शामिल है। पुलिस के अनुसार, इस तरह करीब 30 करोड़ की राशि की हेराफेरी की गई।

दीवानी विवाद से आपराधिक केस तक

वित्तीय लेन-देन और पैसे के कथित गबन के आरोपों ने इस मामले को साधारण कॉन्ट्रैक्ट विवाद से आगे बढ़ाकर धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और आपराधिक विश्वासघात के गंभीर केस में बदल दिया है। हालांकि, विक्रम भट्ट ने पिछले हफ्ते एक मीडिया बयान में दावा किया था कि उदयपुर पुलिस को पूरे मामले में गुमराह किया गया है और यह लड़ाई आगे लंबी और जटिल हो सकती है।

इंडिया टुडे हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, जिन चार फिल्मों के जरिए बड़े रिटर्न का वादा किया गया था, उनमें से एक फिल्म ‘तुमको मेरी कसम’ 21 मार्च को रिलीज हुई। अनुपम खेर, अदा शर्मा, ईशा देओल और इश्वाक सिंह अभिनीत यह फिल्म डॉ. मुर्डिया और उनकी पत्नी के जीवन तथा आईवीएफ तकनीक को मुख्यधारा में लाने के उनके संघर्ष की कहानी पर आधारित थी।

हालांकि, फिल्म को आलोचकों से मिली-जुली से लेकर नकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और बॉक्स ऑफिस पर भी इसका प्रदर्शन कमजोर रहा। फिल्म की रिलीज को लेकर उस वक्त विवाद भी खड़ा हुआ, क्योंकि उसी समय इंदिरा आईवीएफ का करीब ₹3,500 करोड़ का आईपीओ प्रस्तावित था।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, फिल्म रिलीज के एक हफ्ते बाद सेबी ने इस पर आपत्ति जताई कि फंड जुटाने की अवधि में फिल्म कंपनी का प्रमोशन करती दिख रही है। इसके बाद इंदिरा आईवीएफ ने अपना आईपीओ वापस ले लिया। सेबी ने फिल्म रिलीज के समय को “संदिग्ध” बताया था।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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