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बंगाल के मदरसों में भी अब गूंजेगा ‘वंदे मातरम’, शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला; जानिए पहले क्या गाया जाता था?

19 मई को जारी इस आदेश के तहत अब प्रत्येक मदरसे में कक्षाएं शुरू होने से पहले सुबह की प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम’ गाना जरूरी होगा। आदेश जारी होने के बाद सभी संस्थानों को इसकी अनुपालन रिपोर्ट भी विभाग को सौंपनी होगी।

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suvendu adhikari
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी। फोटोः IANS

कोलकाताः पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार ने राज्य के सभी मदरसों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य कर दिया है। अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सरकारी मॉडल मदरसों, सरकारी सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त सभी मान्यता प्राप्त मदरसों में यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

19 मई को जारी इस आदेश के तहत अब प्रत्येक मदरसे में कक्षाएं शुरू होने से पहले सुबह की प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम’ गाना जरूरी होगा। आदेश जारी होने के बाद सभी संस्थानों को इसकी अनुपालन रिपोर्ट भी विभाग को सौंपनी होगी।

पहले क्या गाया जाता था?

अब तक राज्य के अधिकांश मदरसों में सुबह की प्रार्थना के दौरान राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ कवि गुलाम मुस्तफा का बंगाली गीत ‘अनंत असीम प्रेममय तुमी’ गाया जाता था। नए आदेश के बाद ‘वंदे मातरम’ को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य सरकार ने एक सप्ताह पहले ही स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों में भी ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य किया था। स्कूलों में अब राष्ट्रगीत के सभी छह अंतरे गाने का निर्देश दिया गया है।

राज्य के मदरसा निदेशालय द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि सभी मान्यता प्राप्त, सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त मदरसों में सुबह की असेंबली के दौरान ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार के इस फैसले को राज्य की शिक्षा और सांस्कृतिक नीतियों में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले सरकार ने स्कूलों में भी राष्ट्रगीत को अनिवार्य बनाने का फैसला लिया था।

शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से स्कूलों की सुबह की प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य बनाने का निर्णय लिया है। अब यही व्यवस्था मदरसों में भी लागू कर दी गई है।

क्यों फिर चर्चा में आया ‘वंदे मातरम’?

‘वंदे मातरम’ लंबे समय से भारत की राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बन गया था और बाद में राष्ट्रवादी आंदोलनों से गहराई से जुड़ गया।

इस साल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले भी यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहा। फरवरी में केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए थे। आदेश में कहा गया था कि यदि ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ दोनों गाए जाएं, तो पहले ‘वंदे मातरम’ प्रस्तुत किया जाएगा।

केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार स्कूलों और सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के सभी छह अंतरे गाने पर भी जोर दिया गया। पहले आमतौर पर इसके शुरुआती दो अंतरे ही गाए जाते थे।

हाल के महीनों में तमिलनाडु और केरलम जैसे राज्यों में भी ‘वंदे मातरम’ को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आए थे।

तमिलनाडु में टीवीके प्रमुख सी जोसेफ विजय के शपथ ग्रहण के दौरान वंदे मातरम बजाए जाने और राज्य गीत को बाद में बजाए जाने को लेकर विवाद सामने आया था। इसी तरह एक सरकारी कार्यक्रम में भी राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम’ की पूर्ण प्रस्तुति को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए थे। वहीं केरल में भी शपथ ग्रहण समारोह में पूरा गीत बजाए जाने पर वाम दलों ने आलोचना की थी। बाद में सरकार ने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम का क्रम राजभवन द्वारा तय किया गया था। भाजपा ने इन विवादों के दौरान विपक्षी दलों पर भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का विरोध करने का आरोप लगाया था।

12 दिनों में शुभेंदु सरकार के बड़े फैसले

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से पिछले 12 दिनों में शुभेंदु अधिकारी ने कई बड़े फैसले लिए हैं। इसमें भारत-बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ को फेंसिंग के लिए जमीन सौंपने, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) की प्रक्रिया शुरू करने और आयुष्मान भारत योजना लागू करने जैसे कदम शामिल हैं।

इसके अलावा राज्य में जनगणना प्रक्रिया शुरू करने, सरकारी नौकरियों में उम्र सीमा में पांच साल की छूट देने, नए केंद्रीय आपराधिक कानूनों को लागू करने और चुनावी हिंसा में मारे गए भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवारों को सहायता देने जैसे फैसले भी चर्चा में हैं।

सरकार ने धर्म आधारित कुछ वित्तीय सहायता योजनाओं को बंद करने और महिलाओं के लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ शुरू करने की भी घोषणा की है। इसके तहत महिलाओं को हर महीने 3000 हजार रुपये आर्थिक सहायता और सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने की बात कही गई है।

बंगालः शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला, महिलाओं को मिलेंगे हर माह ₹3000, धर्म-आधारित योजनाएं होंगी खत्म

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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