नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने वंदे मातरम को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर दर्जा देने का फैसला किया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संबंधी अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। वहीं गायन के समय अपमान या बाधा डालने पर सजा और जुर्माने का भी प्रावधान है।
मंत्रिमंडल के निर्णय के मुताबिक बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित वंदे मातरम पर भी वही नियम और प्रतिबंध लागू होंगे जो वर्तमान में राष्ट्रगान पर लागू हैं। इसका अर्थ है कि इसका अपमान करने या इसके गायन में बाधा डालने पर दंड का प्रावधान होगा।
वंदे मातरम का अपमान करने पर होगी सजा
मौजूदा समय में, राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान का अपमान करने पर कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। इस संशोधन के साथ वंदे मातरम को भी इन्हीं कानूनी सुरक्षाओं के दायरे में लाया जाएगा।
वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर सरकार यह बदलाव कर रही है। इसके लिए कानून की धारा 3 में संशोधन किया जाएगा। इस धारा के तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान गाने में बाधा डालता है या रोकता है तो उसे तीन साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है।
वहीं, बार-बार अपराध करने पर कम से कम एक साल की सजा का प्रावधान है। इस संशोधन के बाद यही नियम वंदे मातरम पर भी लागू होंगे।
सरकार ने जारी की गाइडलाइंस
केंद्र सरकार ने बुधवार (6 मई) को भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के गायन के लिए आधिकारिक प्रोटोकॉल संबंधी दिशानिर्देश जारी किए। इन दिशानिर्देशों के मुताबिक, छह छंदों वाले और लगभग 3 मिनट 10 सेकंड लंबे वंदे मातरम के संपूर्ण आधिकारिक संस्करण को प्रमुख राजकीय समारोहों में प्रस्तुत या बजाया जाना चाहिए।
इन समारोहों में राष्ट्रीय ध्वजारोहण, राष्ट्रपति और राज्यपालों के आधिकारिक कार्यक्रमों में आगमन और प्रस्थान समारोह और उनके निर्धारित भाषणों से पहले और बाद के कार्यक्रम शामिल हैं।

यदि ‘वंदे मातरम’ और ‘राष्ट्रगान’ दोनों का ही किसी समारोह में गायन होता है तो पहले वंदे मातरम गाया जाएगा और उसके बाद राष्ट्रगान। दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दोनों प्रस्तुतियों के दौरान श्रोताओं से सम्मान के प्रतीक के रूप में सावधान मुद्रा में खड़े रहने की अपेक्षा की जाती है।
ज्ञात हो कि गृह मंत्रालय ने स्कूलों, महाविद्यालयों और महत्वपूर्ण संस्थागत कार्यक्रमों के दौरान वंदे मातरम गाने को बढ़ावा देने का आग्रह किया है। इस कदम का उद्देश्य छात्रों और आम जनता के बीच राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति जागरूकता और सम्मान को प्रोत्साहित करना है। यह भी कहा गया है कि जब कोई बैंड वंदे मातरम प्रस्तुत करे, तो गायन की शुरुआत का संकेत देने के लिए औपचारिक रूप से ढोल या बिगुल बजाए जाने चाहिए।
बजट सत्र के समापन पर संसद के दोनों सदनों में वंदे मातरम के सभी छह श्लोकों का पाठ किया गया। पश्चिम बंगाल चुनावों के दौरान भाजपा ने वंदे मातरम को बंगाली पहचान और राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। पार्टी ने इसकी 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में राज्य भर में सामूहिक गायन और पदयात्राओं का आयोजन किया। इसके अलावा, चुनाव प्रचार में बंकिम चंद्र चटर्जी की विरासत को भी प्रमुखता से उजागर किया गया।

