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कमर्शियल जहाजों पर हमले के बाद अमेरिका का बड़ा स्ट्राइक, 80 से ज्यादा ईरानी सैन्य ठिकाने किए तबाह; तेल लाइसेंस भी रद्द

पिछले महीने तेहरान के साथ हुए युद्धविराम के बाद यह वाशिंगटन की ओर से अब तक की सबसे कड़ी सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है।

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Split image showing a large sea explosion on the left with fire and black smoke, and a nighttime urban explosion on the right with a towering orange plume over buildings
IANS

वॉशिंगटन/तेहरान: होर्मुट स्ट्रेट में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। इस समुद्री मार्ग में तीन कमर्शियल जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान पर अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी सेना ने ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इसके साथ ही वॉशिंगटन ने ईरानी तेल कारोबार को मिली अस्थायी राहत भी वापस ले ली है। माना जा रहा है कि पिछले महीने हुए युद्धविराम के बाद यह अमेरिका की सबसे कड़ी सैन्य और आर्थिक कार्रवाई है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने एक्स पर बताया कि 7 जुलाई को चलाए गए इस अभियान में सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों का इस्तेमाल किया गया। अमेरिकी सेना के मुताबिक, यह कार्रवाई होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर रहे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर ईरान के हालिया हमलों के जवाब में की गई।

किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?

सेंटकॉम के अनुसार, हमलों में ईरान की वायु रक्षा प्रणाली (एयर डिफेंस सिस्टम), कमांड एवं कंट्रोल नेटवर्क, तटीय रडार ठिकानों, जहाज-रोधी मिसाइल (एंटी-शिप मिसाइल) क्षमताओं और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के भीतर तथा आसपास तैनात इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की 60 से अधिक छोटी नौकाओं को निशाना बनाया गया।

अमेरिका का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना था, जिसके जरिए वह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमले जारी रख सकता था।

तीन व्यापारिक जहाजों पर हमले का आरोप

पेंटागन के मुताबिक, हाल के दिनों में ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया था। इनमें मार्शल द्वीप (Marshall Islands) के ध्वज वाला एम/टी अल रेकय्यात, सऊदी अरब के ध्वज वाला एम/टी वेदयान और लाइबेरिया के ध्वज वाला एम/टी साइप्रस प्रॉस्पेरिटी शामिल हैं।

अमेरिकी सेना ने इन हमलों को “बिना किसी उकसावे के की गई आक्रामक कार्रवाई” बताते हुए कहा कि यह युद्धविराम का गंभीर उल्लंघन है और इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता प्रभावित होती है। सेंटकॉम ने चेतावनी दी कि अगर ईरान समझौते का उल्लंघन जारी रखता है तो अमेरिका आगे भी जवाबी कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

अमेरिका ने तेल लाइसेंस रद्द किया

सिर्फ सैन्य मोर्चे पर ही नहीं, अमेरिका ने आर्थिक स्तर पर भी ईरान पर दबाव बढ़ा दिया है। हवाई हमलों की घोषणा से कुछ घंटे पहले अमेरिकी वित्त मंत्रालय (ट्रेजरी) ने 21 जून को जारी वह विशेष लाइसेंस रद्द कर दिया है। इसके तहत युद्धविराम व्यवस्था के दौरान ईरान को सीमित दायरे में कच्चा तेल, पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पाद बेचने की अस्थायी अनुमति दी गई थी।

ट्रेजरी ने इसकी जगह नया जनरल लाइसेंस X-1 जारी किया है। इसके तहत पहले से अधिकृत लेनदेन को समाप्त करने के लिए 17 जुलाई तक का समय दिया गया है, लेकिन 7 जुलाई के बाद ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम या पेट्रोकेमिकल उत्पादों की किसी भी नई खरीद या लोडिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।

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युद्धविराम के बाद सबसे बड़ा अमेरिकी कदम

विश्लेषकों का मानना है कि पिछले महीने हुए युद्धविराम के बाद यह वॉशिंगटन की ओर से ईरान के खिलाफ सबसे बड़ा सैन्य और आर्थिक कदम है। एक ओर अमेरिका ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं, वहीं दूसरी ओर तेल निर्यात पर फिर से प्रतिबंध कड़ा कर तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि अगर ईरान युद्धविराम का सम्मान नहीं करता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को निशाना बनाना जारी रखता है, तो भविष्य में भी इसी तरह की सैन्य और आर्थिक कार्रवाई जारी रह सकती है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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