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अमेरिका ने तीन दिनों में ईरान के 300 से अधिक ठिकानों को बनाया निशाना, तेहरान ने खाड़ी देशों को दी ये चेतावनी

अमेरिकी सेंट्र्ल कमांड सेंटकॉम ने कहा कि अमेरिकी सेना क्षेत्र में तैनात है और ईरान की धमकियों, आक्रामकता और मनमानी घोषणाओं के बावजूद नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करेगी। अमेरिका ने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण नहीं है।

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Military battle scene with soldiers, missiles, tanks, fires, an Iranian flag, and a man in a suit pointing ahead.
प्रतीकात्मक तस्वीर

वॉशिंगटन होर्मुज स्ट्रेट में व्यावसायिक जहाजों पर कथित फायरिंग के बाद अमेरिका-ईरान के बीच तनाव गहरा गया है। अमेरिका ने पिछले 24 घंटे में दूसरी बार ईरान पर हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि रविवार शाम अमेरिकी सेना ने ईरान के उन ठिकानों पर हमले किए, जिनका इस्तेमाल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और नाविकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा था। कमांड के अनुसार, राष्ट्रपति के निर्देश पर यह कार्रवाई ईरानी सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई।

अमेरिका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि होर्मुज स्ट्रेट सभी वैध जहाजों के लिए खुला है और समुद्री यातायात सामान्य रूप से जारी है। सेंटकॉम ने कहा कि अमेरिकी सेना क्षेत्र में तैनात है और ईरान की धमकियों, आक्रामकता और मनमानी घोषणाओं के बावजूद नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करेगी। अमेरिका ने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण नहीं है।

वहीं, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने दावा किया कि विदेशी हस्तक्षेप के कारण पैदा हुई असुरक्षा को देखते हुए होर्मुज स्ट्रेट अगली सूचना तक बंद रहेगा। उसका कहना है कि जब तक अमेरिका क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप बंद नहीं करता, किसी भी जहाज को वहां से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

अमेरिकी सेना ने क्या कार्रवाई की?

अमेरिकी कमांड सेंटर के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स के मुताबिक, लगभग उसी समय आईआरजीसी ने समुद्री मार्ग से गुजर रहे सिविलियन जहाजों पर फायरिंग की। इसके जवाब में अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने एक ईरानी क्रूज मिसाइल और एक वन-वे अटैक ड्रोन को मार गिराया।

अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, ताजा हमले ईरान के तटीय इलाकों और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास केंद्रित रहे। ईरान के सरकारी मीडिया ने होर्मोजगान प्रांत के जस्क, केशम, बंदर अब्बास और सिरिक में विस्फोटों की पुष्टि की है। शुरुआती रिपोर्टों में नागरिक हताहतों या बड़े पैमाने पर संपत्ति के नुकसान की जानकारी नहीं मिली।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई रविवार को ईरानी मिसाइल ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम और आईआरजीसी की तेज रफ्तार नौकाओं पर हुए अमेरिकी हमलों के बाद की गई है। फॉक्स न्यूज ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने रातभर में करीब 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे तीन रातों में कुल हमलों की संख्या 300 से अधिक हो गई।

ईरान ने खाड़ी देशों को दी चेतावनी

अमेरिका की ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने खाड़ी देशों को भी सख्त संदेश दिया है। बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर हुए अभी सिर्फ 25 दिन हुए हैं, लेकिन अमेरिका ने समझौते के लगभग सभी प्रावधानों का उल्लंघन कर दिया है।

विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों में केवल सैन्य ठिकानों को ही नहीं, बल्कि परिवहन नेटवर्क, मछली पकड़ने वाली नौकाओं, मालवाहक जहाजों, मौसम विभाग की इमारतों और अन्य सरकारी सुविधाओं को भी निशाना बनाया गया। तेहरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और गंभीर युद्ध अपराध बताया।

ईरान ने अपने बयान में पड़ोसी देशों को भी चेतावनी देते हुए कहा कि वे किसी भी हमलावर देश को अपनी जमीन, हवाई क्षेत्र या सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं करने दें। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यदि किसी देश ने अमेरिका की कार्रवाई में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष मदद की, तो ईरानी सेना उसे भी जवाबी कार्रवाई में वैध सैन्य लक्ष्य मानेगी।

ईरान ने इससे पहले अमेरिका के हमलों के जवाब में जॉर्डन, कतर और ओमान में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया था। आईआरजीसी के अनुसार, पहले चरण में जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस पर मौजूद अमेरिकी सैन्य ढांचे को निशाना बनाया गया, जहां कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और एमक्यू-9 रीपर ड्रोन के हैंगर को नुकसान पहुंचाने का दावा किया गया।

इसके अलावा ईरान ने कुवैत में अमेरिकी हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS) लॉन्चर को भी निशाना बनाने की बात कही। हालांकि, सेंटकॉम ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि क्षेत्र में किसी भी अमेरिकी सैनिक के मारे जाने या घायल होने की कोई रिपोर्ट नहीं है।

खाड़ी देशों पर असर

वीकेंड के दौरान ईरान से जुड़े हमलों का असर खाड़ी देशों में भी देखने को मिला। कुवैत ने बताया कि उसके उत्तरी सीमा क्षेत्र की तीन चौकियों को नुकसान पहुंचा है। वहीं, एक ड्रोन हमले में कुवैत ऑयल कंपनी के एक ऑफशोर ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म पर काम कर रहा एक कर्मचारी घायल हो गया।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमलों, ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और पड़ोसी देशों में बढ़ती हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सभी पक्ष तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकें और बातचीत का रास्ता अपनाएं। गुटेरेस ने चेतावनी दी कि अगर यह संघर्ष और बढ़ा तो इसके गंभीर असर पूरे पश्चिम एशिया, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकते हैं।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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