वॉशिंगटनः अमेरिका ने ईरान से कहा है कि वह सार्वजनिक रूप से घोषणा करे कि होर्मुज स्ट्रेट वाणिज्यिक जहाजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित और खुला है और भविष्य में किसी भी व्यापारिक जहाज पर हमला नहीं किया करेगा। अमेरिका ने साफ चेतावनी दी है कि अगर तेहरान ने ऐसा नहीं किया तो उसके लिए अच्छे परिणाम नहीं होंगे। यह सख्त संदेश ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव के बावजूद शनिवार को ओमान में नई वार्ता होने वाली है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया कि संघर्ष के बावजूद बातचीत जारी रहेगी। हालांकि उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका ने ईरान को स्पष्ट कर दिया है कि युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद दोनों पक्ष वार्ता के जरिए समाधान तलाशने पर सहमत हैं।
अमेरिका की तीन स्पष्ट मांगें
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, वॉशिंगटन ने ईरान के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं। पहली, ईरान सार्वजनिक रूप से घोषणा करे कि होर्मुज के सभी समुद्री मार्ग वाणिज्यिक जहाजों के लिए खुले हैं। दूसरी, व्यापारिक जहाजों पर किसी तरह की गोलीबारी या हमला नहीं किया जाएगा। तीसरी, इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क या सुरक्षित मार्ग परमिट नहीं लगाया जाएगा। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अगर ईरान यह सार्वजनिक आश्वासन नहीं देता है तो उसके लिए इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरान ने निजी बातचीत में स्वीकार किया है कि हाल में व्यापारिक जहाजों पर हुई गोलीबारी गलती थी। अधिकारियों के मुताबिक, तेहरान ने कहा कि यह कार्रवाई उसके सुरक्षा तंत्र के एक अनियंत्रित या कट्टरपंथी गुट ने की, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच चल रही वार्ता को पटरी से उतारना था।
सीबीएस न्यूज के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया कि ईरानी प्रतिनिधियों ने कहा, “हमसे गलती हुई। हमने भूल की। आइए बातचीत जारी रखें।” हालांकि ईरान ने सार्वजनिक रूप से इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
दूसरी ओर, ईरान ने इस बात से इनकार किया है कि उसने अमेरिका से बातचीत की पहल की थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान ने केवल कतर के मध्यस्थों के साथ बातचीत पर सहमति जताई है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर अमेरिका अपने किसी भी वादे से पीछे हटता है तो ईरान भी उसी अनुरूप जवाब देगा। ईरान लगातार यह भी कहता रहा है कि होर्मुज उसकी संप्रभुता के दायरे में आता है और वहां की समुद्री गतिविधियों के प्रबंधन का अधिकार उसी के पास है।
ओमान में अमेरिका-ईरान के बीच वार्ता
अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को ओमान में नई वार्ता होने की संभावना है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर कर सकते हैं। इसी बीच कतर का एक प्रतिनिधिमंडल भी शुक्रवार को तेहरान पहुंचा, जहां क्षेत्रीय तनाव कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई।
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान ने जून में एक युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। जिसके तहत ईरान ने व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने का आश्वासन दिया था। इसके बाद दोनों देशों ने 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन पर भी सहमति बनाई थी, जिसका उद्देश्य संघर्ष को सभी मोर्चों पर समाप्त करना और युद्धविराम को आगे बढ़ाना था। इसी समझौते के तहत ईरान और ओमान को अन्य खाड़ी देशों के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन और समुद्री सेवाओं की व्यवस्था तय करनी है।
संघर्ष के दौरान ईरान ने अपनी संप्रभुता जताते हुए “पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी” नामक एक नई व्यवस्था बनाने की घोषणा की थी, जिसके तहत सुरक्षित मार्ग के लिए जहाजों को अनुमति देने की बात कही गई थी। ईरानी समाचार एजेंसी फार्स की रिपोर्ट के अनुसार, नए प्रस्तावित ढांचे में होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन ईरान और ओमान मिलकर करेंगे तथा जहाजों से सेवा शुल्क लेने का विकल्प भी रखा जा सकता है।
हालांकि अमेरिका चाहता है कि ईरान सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करे कि इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा और उनकी निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में गिना जाता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के लगभग 20 प्रतिशत निर्यात इसी रास्ते से गुजरते हैं। इसलिए यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या जहाजों पर हमला वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों पर सीधा असर डालता है।

