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अमेरिका-ईरान ने एक-दूसरे पर हमले रोके, होर्मुज विवाद पर मंगलवार कतर में होगी अहम बैठक

होर्मुज स्ट्रेट में एक जहाज को निशाना बनाए जाने के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन गई थी। ऐसे में संघर्षविराम (सीजफायर) बेहद नाजुक स्थिति में पहुंच गया था।

वॉशिंगटन/तेहरानः अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी रहने तक सभी तरह के सैन्य कार्रवाइयों को अस्थाई रूप से रोकने पर सहमति बन गई है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर सैन्य हमले करने के बाद फिलहाल सभी आक्रामक सैन्य कार्रवाइयों को रोकने पर सहमति जताई है। अब दोनों पक्ष मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में आमने-सामने बैठकर होर्मुज को लेकर पैदा हुए विवाद का समाधान तलाशेंगे।

होर्मुज स्ट्रेट में एक जहाज को निशाना बनाए जाने के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन गई थी। ऐसे में संघर्षविराम (सीजफायर) बेहद नाजुक स्थिति में पहुंच गया था। फारस की खाड़ी में दोनों देशों के बीच लगातार हमलों ने पूरे क्षेत्र में फिर से बड़े युद्ध की आशंका बढ़ा दी थी। यहां पढ़ें पूरी जानकारी- अमेरिका ने ईरान के 10 ठिकानों पर किया हमला, जवाब में तेहरान ने कुवैत-बहरीन के यूएस ठिकानों पर दागीं मिसाइलें

अमेरिका में सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ सीनेटर थॉम टिलिस ने रविवार कहा है कि उन्हें ईरानी नेतृत्व पर युद्धविराम का पालन करने का भरोसा नहीं है, जबकि ईरान ने चेतावनी दी है कि होर्मुज के प्रबंधन में किसी भी बाहरी दखल से तनाव और बढ़ सकता है।

कैसे बढ़ा विवाद?

तनाव की शुरुआत तब हुई जब होर्मुज से गुजर रहे कई वाणिज्यिक जहाजों पर हमले हुए। अमेरिका ने इन घटनाओं के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए उसके कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन का उल्लंघन बताया तथा कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने संघर्षविराम की शर्तों का उल्लंघन किया था, इसलिए अमेरिकी सेना ने उसके मिसाइल, ड्रोन और रडार ठिकानों को निशाना बनाया।

स्विट्जरलैंड के बजाय कतर में होगी बैठक

लगातार बढ़ते तनाव के बीच दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, दोनों पक्षों ने फिलहाल सभी “काइनेटिक एक्टिविटी” यानी सैन्य हमले और आक्रामक अभियान रोकने पर सहमति बनाई है।

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि फिलहाल दोनों सेनाएं पीछे हटेंगी और होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रहेगी। तकनीकी स्तर की बातचीत भी जारी रहेगी।

सूत्रों के मुताबिक, मूल रूप से मंगलवार की वार्ता स्विट्जरलैंड में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर केंद्रित होनी थी। लेकिन सप्ताहांत में बढ़े सैन्य तनाव के बाद बैठक का स्थान बदलकर कतर कर दिया गया और अब इसका मुख्य एजेंडा होर्मुज में समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही होगा। बताया जा रहा है कि अमेरिकी तकनीकी टीम के प्रमुख निक स्टीवर्ट भी इस बैठक में हिस्सा ले सकते हैं।

आखिर विवाद की जड़ क्या है?

अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद समझौता ज्ञापन (MoU) के अनुच्छेद-5 (Article 5) की अलग-अलग व्याख्या को लेकर सामने आया। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर इस अनुच्छेद का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। यह अनुच्छेद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने से जुड़ा है।

इस अनुच्छेद के तहत ईरान ने 60 दिनों तक बिना किसी शुल्क के वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने, 30 दिनों के भीतर समुद्री बारूदी सुरंगों और अन्य सैन्य बाधाओं को हटाने तथा भविष्य में ओमान और अन्य खाड़ी देशों के साथ मिलकर होर्मुज के प्रशासन पर बातचीत करने का वादा किया है।

ईरान की दो टूक चेतावनी

इसी बीच इराक की राजधानी बगदाद में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट कहा कि अगले 30 दिनों तक होर्मुज जलडमरूमध्य की निगरानी और प्रबंधन पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में रहेगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई अन्य देश इस व्यवस्था को चुनौती देने या कोई वैकल्पिक तंत्र लागू करने की कोशिश करता है तो जलमार्ग को पूरी तरह खोलने में देरी होगी और क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।

अराघची ने सभी पक्षों से समझौता ज्ञापन का पूरी तरह पालन करने की अपील करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था से हटने की किसी भी कोशिश से हालात और बिगड़ेंगे।

उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी क्षेत्रीय देशों के हाथ में होनी चाहिए और इसके लिए एक नया सुरक्षा ढांचा बनाया जाए, जिसमें बाहरी देशों की सैन्य मौजूदगी न हो।

अमेरिकी सांसद ने जताया अविश्वास

दूसरी ओर, अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने कहा कि उन्हें ईरानी नेतृत्व की नीयत पर भरोसा नहीं है। सीएनएन के कार्यक्रम स्टेट ऑफ द यूनियन में उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों में कई युद्धविराम हुए, लेकिन कोई भी लंबे समय तक नहीं टिक पाया। उनका कहना था कि मौजूदा समझौता 60 दिनों के ढांचे पर आधारित जरूर है, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि तेहरान इसका पूरी ईमानदारी से पालन करेगा।

टिलिस ने 2015 के परमाणु समझौते का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी नए समझौते को सख्ती से लागू किए बिना उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक तेल बाजार, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सीधा असर डाल सकता है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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