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अमेरिका ने ईरान के 10 ठिकानों पर किया हमला, जवाब में तेहरान ने कुवैत-बहरीन के यूएस ठिकानों पर दागीं मिसाइलें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसने युद्धविराम का उल्लंघन जारी रखा तो अमेरिका और कठोर सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

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Circular montage of a man’s portrait over a wartime naval scene with ships and explosions, framed by a gun-sight overlay.
अमेरिका ने ईरान के 10 ठिकनों पर किया हमला।

वॉशिंगटन/तेहरानः पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ने लगा है। होर्मुज स्ट्रेट में पनामा के झंडे वाले जहाज पर शनिवार को ड्रोन हमले के बाद अमेरिका और ईरान फिर से सैन्य संघर्ष में पड़ चुके हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया। इन घटनाओं ने हाल ही में हुए अंतरिम युद्धविराम और शांति वार्ता को गंभीर संकट में डाल दिया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर M/T Kiku पर एकतरफा ड्रोन हमला किए जाने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देश पर यह सैन्य कार्रवाई की गई। अमेरिका का आरोप है कि टैंकर करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर होर्मुज से गुजर रहा था, तभी उस पर हमला हुआ। इसके बाद अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों, निगरानी एवं संचार ढांचे, एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय रडार साइटों और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना का कहना है कि ईरान ने युद्धविराम का पालन करने का मौका गंवा दिया और उसकी कार्रवाई के जवाब में यह हमला किया गया।

सेंटकॉम ने बयान जारी कर कहा, “ईरान के पास युद्धविराम समझौते का पालन करने का पूरा अवसर था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बजाय उसकी सेना ने एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन से पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर एम/टी किकू पर हमला किया।” सेंटकॉम ने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट से कारोबारी जहाजों की आवाजाही फिलहाल सामान्य रूप से जारी है और अमेरिकी सेना हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।

ट्रम्प की सख्त चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसने युद्धविराम का उल्लंघन जारी रखा तो अमेरिका और कठोर सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “युद्धविराम समझौते का एक बार फिर उल्लंघन करने के बाद अमेरिकी विमानों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज ठिकानों तथा तटीय रडार साइटों पर हमला किया है।”

उन्होंने आगे कहा, “यह पूरी तरह संभव है कि वे कभी सबक न सीखें। ऐसा समय भी आ सकता है जब हम संयम बरतने की स्थिति में नहीं होंगे और हमें उस मिशन को सैन्य ताकत के साथ पूरा करना पड़ेगा, जिसकी शुरुआत हमने बेहद सफल तरीके से की थी।”

ट्रंप ने अपनी चेतावनी को और सख्त करते हुए कहा कि अगर ऐसी नौबत आई, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।

ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिकी हमलों के कुछ घंटों बाद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने जवाबी कार्रवाई का ऐलान किया। उसने ने दावा किया कि उसकी नौसेना और एयरोस्पेस फोर्स ने संयुक्त अभियान चलाकर कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस और बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट के नौसैनिक अड्डे सहित कई अहम अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दागे। ईरान ने चेतावनी दी कि उसके खिलाफ किसी भी नई कार्रवाई का “करारा और विनाशकारी जवाब” दिया जाएगा।

हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि अब तक किसी अमेरिकी सैनिक के हताहत होने या सैन्य ठिकानों को बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। कुवैत की सेना ने भी बताया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों और ड्रोन को रास्ते में ही नष्ट कर दिया।

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होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा फ्लैशपॉइंट

तनाव की जड़ एक बार फिर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज बन गया है। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के अनुसार, इस क्षेत्र से गुजर रहे एक तेल टैंकर पर हमला हुआ, जिससे उसके कंट्रोल रूम को नुकसान पहुंचा। हालांकि चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं और तेल रिसाव की कोई सूचना नहीं है। इस घटना ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंताएं बढ़ा दी हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए अंतरिम समझौते के तहत दोनों देश परमाणु कार्यक्रम, उच्च संवर्धित यूरेनियम के भंडार और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही जैसे मुद्दों पर अंतिम समझौते की दिशा में बातचीत कर रहे थे। दोनों पक्षों के पास समझौते को अंतिम रूप देने के लिए 60 दिन का समय है, लेकिन ताजा सैन्य कार्रवाई ने इस पूरी प्रक्रिया को अनिश्चितता में डाल दिया है।

संघर्षविराम के बाद के हमले की टाइमलाइन

23 जून को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फंसे जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका ने युद्धविराम का प्रस्ताव रखा, जिसे ईरान ने स्वीकार कर लिया। इसके दो दिन बाद ओमान तट के पास गुजर रहे एक व्यावसायिक जहाज पर संदिग्ध ड्रोन हमला हुआ, जिससे तनाव फिर बढ़ गया।

26 जून को अमेरिका ने आरोप लगाया कि ईरान ने युद्धविराम का उल्लंघन किया है और उसके जवाब में ईरानी मिसाइल, ड्रोन और रडार ठिकानों पर हवाई हमले किए। अगले दिन ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई का दावा किया। इसी दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तेल टैंकर M/T Kiku पर हमला हुआ।

28 जून को अमेरिका ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए ईरान के 10 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया। इस ताजा घटनाक्रम ने पूरे पश्चिम एशिया में बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंकाओं को फिर बढ़ा दिया है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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