Home भारत यूपी में आधार कार्ड अब जन्म प्रमाण पत्र या जन्मतिथि के सबूत...

यूपी में आधार कार्ड अब जन्म प्रमाण पत्र या जन्मतिथि के सबूत के तौर पर मान्य नहीं

इस फैसले पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस कदम से धोखाधड़ी पर रोक लगेगी।

0
UP AAdhaar news, Aadhaar Card, Aadhaar Card News, Aadhaar Card Date of Birth Proof, Date of Birth Proof, DOB Certificate, Birth Certificate, Birth Certificate Aadhaar Card, Aadhaar Not Valid for DOB,

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कहा है कि अब राज्य में आधार कार्ड को जन्म प्रमाण पत्र या जन्म तिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

राज्य के योजना विभाग ने सभी विभागों को निर्देश भेजकर साफ कर दिया कि आधार कार्ड में जन्म प्रमाण पत्र संलग्न नहीं होता, इसलिए इसे जन्म तिथि या जन्म स्थान की आधिकारिक पुष्टि के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। योजना विभाग के विशेष सचिव अमित सिंह बंसल ने कहा कि आधार को जन्म प्रमाण पत्र के तौर पर मानना उचित नहीं है। यह निर्देश राज्य के सभी विभागों को जारी कर दिया गया है।

नियोजन विभाग के मुताबिक जन्म के प्रमाण के रूप में सीमित दस्तावेज ही मान्य होंगे। सबसे ज्यादा प्राथमिकता स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चे के जन्म के समय जारी किए गए जन्म प्रमाण पत्र को दी जाएगी। इसके अलावा हाईस्कूल की मार्कशीट को भी जन्म प्रमाण पत्र के विकल्प के रूप में स्वीकार किया जा सकेगा। नगर निकाय द्वारा जारी प्रमाण पत्र को भी व्यक्ति के जन्म का आधार माना जाएगा।

गौरतलब है कि इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने भी आधार-आधारित जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों को रद्द करने का आदेश दिया था। महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने निर्देश दिया कि केवल आधार कार्ड के आधार पर जारी किए गए संदिग्ध या फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों को तुरंत रद्द किया जाए और आवश्यक होने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाए।

राजस्व विभाग की 16-बिंदु सत्यापन गाइडलाइन में कहा गया है कि 11 अगस्त 2023 के संशोधन के बाद डिप्टी तहसीलदार द्वारा जारी सभी आदेशों को वापस लिया जाए और इन आदेशों की जांच सक्षम अधिकारी या जिला कलेक्टर स्तर पर की जाए। इस मामले को सुलझाने के लिए विशेष अभियान और बैठकें आयोजित की जाएंगी।

इस फैसले पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस कदम से धोखाधड़ी पर रोक लगेगी। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने दावा किया, “ऐसे फैसलों से फर्जी दस्तावेज़ बनवाने की प्रवृत्ति खत्म होगी। मोहम्मद आज़म खान जैसे लोग अपने बेटे की उम्र कम दिखाने के लिए पैन कार्ड तक बदलवा देते हैं, ताकि उसे विधायक बनाया जा सके। इसलिए इस फैसले का सभी को स्वागत करना चाहिए।”

मृत व्यक्तियों के दो करोड़ से अधिक आधार नंबर निष्क्रिय

इस बीच, यूआईडीएआई ने राष्ट्रीय पहचान डेटाबेस की शुद्धता बनाए रखने के लिए मृत व्यक्तियों के दो करोड़ से अधिक आधार नंबर निष्क्रिय कर दिए हैं। यह अब तक की सबसे बड़ी डेटा सफाई प्रक्रिया मानी जा रही है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य रिकॉर्ड को सटीक रखना और पहचान के दुरुपयोग को रोकना है। यूआईडीएआई ने मृतकों के डेटा को रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम सहित कई स्रोतों से प्राप्त किया है। साथ ही यह वित्तीय संस्थानों और अन्य एजेंसियों के साथ भी सहयोग करने की योजना बना रहा है ताकि मृत व्यक्तियों की जानकारी समय पर अपडेट की जा सके।

author avatar
अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version