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यूपी के 20 जिलों में ब्राह्मण पुलिस कप्तान, जानें क्षत्रिय, OBC और एससी-एसटी के कितने पुलिस अधिकारी?

एससी और एसटी समाज के पुलिस अधीक्षकों और कमिश्नरों की तैनाती की बात करें तो इनकी संख्या क्षत्रिय अफसरों के बराबर है। यानी कुल 17.33 प्रतिशत जिलों में कप्तान इसी वर्ग से आते हैं।

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उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक पदों पर जातिगत प्रतिनिधित्व को लेकर एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। यूपी के 75 जिलों में तैनात पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों में सबसे ज्यादा संख्या ब्राह्मण समुदाय के आईपीएस अधिकारियों की है।

यूपी न्यूज की पड़ताल में सामने आया है कि प्रदेश में एक-चौथाई से ज्यादा जिलों यानी कुल 20 जिलों की कमान ब्राह्मण अफसरों के हाथ में है। इनके बाद ओबीसी समाज के अधिकारी दूसरे स्थान पर आते हैं, जबकि क्षत्रिय और एससी/एसटी वर्ग के अफसर सबसे कम जिलों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

जिलाधिकारियों की तैनाती में भी इसी तरह का ट्रेंड देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, 75 जिलों में से 20 जिलों में ब्राह्मण समुदाय के जिलाधिकारी और 20 जिलों में पुलिस अधीक्षक/पुलिस आयुक्त तैनात हैं।

6 महीने पहले चलें तो ठाकुर समाज का प्रतिनिधित्व ज्यादा था। करीब 40 प्रतिशत यानी 30 जिलों में सामान्य वर्ग से आने वाले जिलाधिकारी (डीएम) थे। इनमें सबसे अधिक प्रतिनिधित्व ठाकुर समाज का था, जिनकी संख्या 26 प्रतिशत (20 डीएम) थे। वहीं, ब्राह्मण समाज से जुड़े जिलाधिकारियों की हिस्सेदारी लगभग 11 प्रतिशत (8 डीएम) थी।

दिलचस्प बात रहा कि उस वक्त प्रदेश के जिलों में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) की तैनाती बराबर थी। 18 जिलों की कमान ठाकुर समाज के अधिकारियों के पास और उतने ही जिलों में ब्राह्मण समाज के अधिकारी एसएसपी/एसपी के पद पर तैनात थे।….आइए अब ताजा आंकड़ा देखते हैं-

जिलों में प्रशासनिक पदों पर क्या है जातिगत समीकरण

क्षत्रिय अफसर

प्रदेश के कुल 13 जिले ऐसे हैं, जहां पुलिस अधीक्षक या पुलिस कमिश्नर में क्षत्रिय समाज से आते हैं। यह अनुपात लगभग 17.33 प्रतिशत बैठता है। इसके अलावा 12 जिलों में जिलाधिकारी क्षत्रिय समाज से आते हैं। यानी प्रशासनिक और पुलिस, दोनों स्तरों पर क्षत्रिय अफसरों की संख्या लगभग समान है।

ब्राह्मण अफसर

सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व ब्राह्मण अधिकारियों को मिला है। यूपी के 20 जिलों में पुलिस अधीक्षक और पुलिस कमिश्नर ब्राह्मण समाज से हैं। यह आंकड़ा कुल जिलों का लगभग 26.6 प्रतिशत है, यानी हर चार जिलों में से एक से ज्यादा जगह ब्राह्मण कप्तानों की तैनाती है। इसी तरह 20 जिलों के डीएम भी ब्राह्मण समाज से हैं।

ओबीसी अफसर

रिपोर्ट में में बताया गया है कि 20 प्रतिशत पुलिस अधीक्षक और पुलिस आयुक्त ओबीसी वर्ग से तैनात हैं। इनमें 13 एसपी और 2 पुलिस कमिश्नर शामिल हैं। हालांकि डीएम स्तर पर ओबीसी अफसरों की हिस्सेदारी ज्यादा है- करीब 26.6 प्रतिशत। यानी जिलाधिकारी पद पर ओबीसी का प्रतिनिधित्व पुलिस कप्तानों की तुलना में अधिक है।

एससी/एसटी अफसर

एससी और एसटी समाज के पुलिस अधीक्षकों और कमिश्नरों की तैनाती की बात करें तो इनकी संख्या क्षत्रिय अफसरों के बराबर है। यानी कुल 17.33 प्रतिशत जिलों में कप्तान इसी वर्ग से आते हैं। जिलाधिकारियों के स्तर पर यह संख्या कुछ कम है। करीब 14.66 प्रतिशत। यानी कुल 11 जिलों में डीएम अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति से हैं।

अन्य सवर्ण (वैश्य, कायस्थ, जाट)

दिलचस्प बात यह है कि सामान्य वर्ग से आने वाली अन्य जातियों- वैश्य, कायस्थ और जाट की उपस्थिति जिलों की पुलिस में डीएम की तुलना में ज्यादा है। जिलों में 18.66 प्रतिशत आईपीएस कप्तान इन्हीं जातियों से हैं, जबकि जिलाधिकारी पद पर इनकी हिस्सेदारी करीब 14.5 प्रतिशत ही है।

वर्ग/क्लासजिलों की संख्या (कप्तान)प्रतिशत (लगभग)
ब्राह्मण2026.6%
ओबीसी1520%
क्षत्रिय (ठाकुर)1317.3%
एससी/एसटी1317.3%
अन्य सवर्ण (वैश्य, कायस्थ, जाट आदि)1418.6%

कमिश्नरेट सिस्टम

पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम वाले वाले शहरों- लखनऊ, गौतमबुद्धनगर, कानपुर नगर, प्रयागराज, गाजियाबाद, आगरा और वाराणसी की कमान किसके हाथ में है, इसे देखें तो एक दिलचस्प जातिगत संतुलन सामने आता है।

पुलिस कमिश्नरों की तैनाती में सबसे अधिक प्रतिनिधित्व क्षत्रिय और ओबीसी वर्ग को मिला है। इन दोनों वर्गों से दो-दो आईपीएस अधिकारी वर्तमान में कमिश्नर पद पर हैं। वहीं, ब्राह्मण, वैश्य और कायस्थ वर्ग से एक-एक अधिकारी को कमिश्नरेट की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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