Home विश्व ट्रंप की सख्त वीजा नीतियों से भारत-चीन को झटका, कानूनी आप्रवासन में...

ट्रंप की सख्त वीजा नीतियों से भारत-चीन को झटका, कानूनी आप्रवासन में तेज गिरावट: रिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरावट छात्रों, कामगारों, परिवार-आधारित वीजा और पर्यटक वीजा- सभी श्रेणियों में देखने को मिली।

0
no deal except uncoditional surrender trump warning to iran amid tension, ईरान
फोटोः आईएएनएस

वॉशिंगटनः डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की कड़ी वीजा नीतियों के बीच अमेरिका में 2025 के पहले आठ महीनों में कानूनी आप्रवासन में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर भारत और चीन पर पड़ा है। जनवरी से अगस्त 2025 के बीच अमेरिकी विदेश विभाग ने 2024 की समान अवधि की तुलना में करीब 2.5 लाख कम वीजा जारी किए, जबकि स्थायी और अस्थायी वीजा स्वीकृतियों में कुल मिलाकर 11 प्रतिशत की कमी आई है।

भारत-चीन के नागरिकों को जारी वीजा में करीब 84,000 की कमी

रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरावट छात्रों, कामगारों, परिवार-आधारित वीजा और पर्यटक वीजा- सभी श्रेणियों में देखने को मिली। भारत और चीन के नागरिकों को जारी वीजा में करीब 84,000 की कमी आई, जो कुल गिरावट का बड़ा हिस्सा है। खास तौर पर छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जिनके वीजा में 30 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। एक्सचेंज वीजा भी लगभग 30,000 घटे, जबकि ग्रीन कार्ड से जुड़े स्थायी निवास वीजा में भी कमी आई है।

ईरान ने होर्मुज के पास F-15 गिराने का जारी किया वीडियो, अमेरिका ने दावे को किया खारिज

विश्लेषकों के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे नीतिगत सख्ती और प्रशासनिक कारण दोनों जिम्मेदार हैं। इनमें 19 देशों पर यात्रा प्रतिबंध, छात्र वीजा इंटरव्यू पर अस्थायी रोक, सोशल मीडिया जांच जैसी सख्त प्रक्रियाएं और विदेश विभाग में कर्मचारियों की कमी शामिल हैं। इसके चलते कांसुलर अपॉइंटमेंट घटे हैं और वीजा प्रक्रिया में देरी बढ़ी है।

वीजा एक विशेषाधिकार है, अधिकार नहीं

विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने कहा कि वीजा एक विशेषाधिकार है, अधिकार नहीं, और ट्रंप प्रशासन सुरक्षा से समझौता नहीं करना चाहता। वहीं व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने कहा कि सरकार अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता देने के अपने जनादेश के अनुरूप फैसले ले रही है।

हालांकि, आलोचकों का मानना है कि इन प्रतिबंधों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नुकसान हो सकता है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री जेसन फरमैन के मुताबिक, आप्रवासन पर रोक से न केवल श्रम बाजार प्रभावित होता है, बल्कि भविष्य में नवाचार और उत्पादकता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। वहीं निस्कनेन सेंटर की सेसिलिया एस्टरलाइन का कहना है कि मांग और नीतियों- दोनों कारक वीजा संख्या पर दबाव बना रहे हैं, लेकिन इनके सटीक असर का आकलन अभी स्पष्ट नहीं है।

ट्रंप का होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अल्टीमेटम के बाद ईरान ने कहा- दुश्मनों को छोड़ सबके लिए खुला है

author avatar
अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version