नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में मची हलचल फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही। पार्टी के एक और सासंद प्रकाश चिक बड़ाइक ने गुरुवार को राज्य सभा से इस्तीफा दे दिया। सुखेंदु शेखर रे और सुष्मिता देव के बाद ऐसा करने वाले बड़ाइक तीसरे टीएमसी नेता हैं। बड़ाइक ने बताया है कि उन्होंने पार्टी की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है।
बड़ाइक ने गुरुवार सुबह 11 बजे उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को अपना त्याग पत्र सौंप दिया। उनके इस्तीफे के बाद, राज्य सभा में टीएमसी की संख्या घटकर 10 रह जाएगी। इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा, ‘मैं बंगाल के लोगों के मत का सम्मान करता हूं। मैंने अपना इस्तीफा भी दे दिया है।’ इस सवाल पर कि क्या वे भाजपा में शामिल होंगे, बड़ाइक ने कहा– ‘ये समय बताएगा।’
वहीं, बड़ाइक ने अपने पत्र में कहा, ‘मैं इसके जरिए राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देता हूँ और अनुरोध करता हूँ कि इसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाए। राज्यसभा सदस्य के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान मिली मदद और सहयोग के लिए मैं महामहिम, माननीय उप-सभापति और राज्यसभा सचिवालय के सभी अधिकारियों का दिल से आभार व्यक्त करता हूँ।’
गौरतलब है कि सुष्मिता देव ने बुधवार को उच्च सदन की सदस्यता के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के बाद उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात की, जिसके बाद उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं।
इससे पहले 8 जून को तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रे ने राज्यसभा सदस्यता और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि उनका यह निर्णय पश्चिम बंगाल में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और जनता के जनादेश को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
मुश्किल में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी
बंगाल चुनाव में हार के बाद ऐसा लगता है कि अब तृणमूल कांग्रेस अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। ऐसी भी आशंका है कि ममता को अपनी उस पार्टी को गंवाना पड़ सकता है, जिसे उन्होंने खड़ा किया था। नेताओं का पार्टी छोड़कर जाना, बड़ी संख्या में बागी गुट का उभरना, अंदरूनी कलह और कई बड़े चेहरों का इस्तीफा ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा रहा है।
कोलकाता से लेकर दिल्ली तक टीएमसी में संकट नजर आ रहा है। हाल ही में बागी टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा था कि 20 सांसदों के एक समूह ने लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था के लिए औपचारिक रूप से अनुरोध किया है। खबरों के अनुसार, आने वाले दिनों में तीन और TMC सांसदों के इस्तीफा देने की योजना है।
टीएमसी नेतृत्व को पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी एक बड़ा झटका लगा है, जहाँ पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने हाई कमान की बात नहीं मानी। इन लोगों ने विपक्ष के नेता के तौर पर वरिष्ठ नेता सोबनदेब चट्टोपाध्याय के नाम को खारिज कर दिया। इसके बजाय इस गुट ने विपक्ष के नेता के लिए पार्टी से निकाले गए विधायक रिताब्रत बनर्जी को चुना।
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