कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बुधवार को पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया। पश्चिम बंगाल तृणमूल अध्यक्ष सुब्रता बख्शी को लिखे पत्र में बारासात से सांसद घोष ने कहा कि वे ‘गहन मानसिक संघर्ष और लंबे चिंतन’ के बाद पद छोड़ रही हैं। साथ ही घोष ने यह भी स्पष्ट किया कि वह तृणमूल कांग्रेस नहीं छोड़ रही हैं। काकोली ने कहा कि वह बंगाल और यहां की जनता के हित में एक आम कार्यकर्ता के रूप में पार्टी से जुड़ी रहेंगी। घोष इससे पहले तृणमूल के बारासात जिला अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे चुकी हैं।
काकोली घोष ने अपने ताजा इस्तीफे वाले पत्र में पार्टी के कामकाज पर चिंता व्यक्त की और पिछले एक दशक में पश्चिम बंगाल की राजनीति को प्रभावित करने वाले कई विवादों का भी जिक्र किया है। घोष ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान, पार्टी के एक अन्य प्रभावशाली सदस्य द्वारा महिला कार्यकर्ताओं के प्रति कथित ‘अशोभनीय व्यवहार’ को वरिष्ठ नेतृत्व से समर्थन मांगने के बावजूद न तो रोका जा सका और न ही उसका उचित समाधान निकाला जा सका।
उन्होंने आरजी कार मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर की मौत से संबंधित घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम और मामले को दबाने के कथित प्रयासों ने समाज को बहुत विचलित किया है और उन्हें भी नैतिक रूप से प्रभावित किया है। उन्होंने पार्टी के चुनाव रणनीति और सलाहकार समूह I-PAC के बढ़ते प्रभाव की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि ‘गैर-चुनी हुई और अलोकतांत्रिक ताकतें’ संगठन के कामकाज को तेजी से प्रभावित करने लगी हैं।
शुभेंदु अधिकारी की मीटिंग में हुईं थी शामिल
बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद तृणमूल में अंदरुनी कलह की कई खबरें आई हैं। काकोली घोष ने भी इस्तीफा देने से ठीक एक दिन पहले नादिया जिले के कल्याणी में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित एक प्रशासनिक बैठक में भाग लिया था। जबकि पार्टी ने कथित तौर पर उन्हें ऐसा करने से अनौपचारिक रूप से मना किया था। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने दावा किया कि काकोली ने उनसे कहा था कि उन्हें आखिरकार ‘आजादी’ महसूस हो रही है।
उनका इस्तीफा तृणमूल कांग्रेस के भीतर असहमति की सबसे गंभीर आवाज मानी जा रही है। काकोली घोष दस्तीदार ने इससे पहले अखिल भारतीय तृणमूल महिला कांग्रेस की अध्यक्ष और पार्टी के बांग्ला जननी प्रचार कार्यक्रम से जुड़ी भूमिकाओं सहित कई महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारियों को संभाला हुआ था।
घोष के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक बैठक में हिस्सा लेने के बाद कई तरह की अटकलों का दौर शुरू हो गया था। इस प्रशासनिक बैठक में घोष के अलावा उत्तरी 24 परगना जिले के तृणमूल के तीन विधायक भी मौजूद थे। इनमें तृणमूल के नवनिर्वाचित विधायक देगंगा से अनीसुर रहमान बिदेश, स्वरूपनगर से बीना मंडल और हारोआ से अब्दुल मतीन शामिल हैं।
इस घटनाक्रम के बाद, काकोली के तृणमूल कांग्रेस छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थी। हालांकि, सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की थी कि विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों को भी प्रशासनिक बैठकों में आमंत्रित किया जाएगा। भाजपा सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री के आदेश पर काकोली सहित तृणमूल के प्रतिनिधियों को बुलाया गया था।

