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चुनावी हार के बाद TMC में दरार! सांसद काकोली घोष और 2 विधायकों ने भाजपा सरकार की बैठक में लिया हिस्सा

TMC सांसद काकोली घोष भाजपा की बैठक में शामिल हुईं। उनके साथ पार्टी के दो विधायकों ने भी इस बैठक में हिस्सा लिया।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में दरार और मनमुटाव देखा जा रहा है। सांसद काकोली घोष ने टीएमसी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद मंगलवार (26 मई) को वह मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा आयोजित सरकार की एक बैठक में शामिल हुईं। इस दौरान उनके साथ टीएमसी के दो विधायक भी शामिल हुए।

बैठक में शामिल होने से पहले उन्होंने कहा ” यह किसी पार्टी का कार्यक्रम नहीं है। यह एक प्रशासनिक कार्यक्रम है, और प्रशासन सभी के लिए होता है। ” वहीं भाजपा विधायक सजल घोष ने भी यही बात दोहराई। घोष ने कहा, “ यह सरकार सिर्फ भाजपा की नहीं है; यह सरकार सभी की है। इसलिए लोकतंत्र में विपक्ष को भी कुछ स्थान मिलना चाहिए। ”

काकोली घोष ने पहले भी अपनाए बागी तेवर

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बनने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा में घोषणा की थी कि विपक्ष के प्रतिनिधियों को सभी प्रशासनिक बैठकों में आमंत्रित किया जाएगा ताकि वे अपने अनुभव साझा कर सकें।

टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की सबसे पुरानी सहयोगियों में से एक बारासात सांसद काकोली घोष को हाल ही में पार्टी के लोकसभा मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) पद से हटा दिया गया। 24 मई को उन्होंने बारासात के लिए पार्टी के संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक (I-PAC) को नियुक्त करने के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसको लेकर कहा कि इसने पार्टी में “अराजकता” पैदा की और “बर्बाद” कर दी।

लोकसभा में कल्याण बनर्जी द्वारा मुख्य सचेतक के पद से हटाए जाने के एक दिन बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा: ” 1976 से परिचित यह सफर 1984 में शुरू हुआ। आज मुझे चार दशकों की वफादारी का फल मिला है। “

उनके हालिया बयानों से TMC में फूट की अटकलें

उनकी इस पोस्ट ने कई अटकलों को जन्म दिया। इसके नौ दिन बाद उन्होंने आधिकारिक तौर पर जिला नेतृत्व से इस्तीफा दे दिया। बारासात क्षेत्र में पार्टी के खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने ममता बनर्जी से बाहरी सलाहकारों के बजाय अनुभवी पार्टी कार्यकर्ताओं पर भरोसा करने की अपील की। गौरतलब है कि यह क्षेत्र टीएमसी का पारंपरिक गढ़ माना जाता रहा है। हालांकि, विधानसभा चुनाव में पार्टी इसे बचाने में असफल रही।

पश्चिम बंगाल के टीएमसी अध्यक्ष सुब्रता बख्शी को लिखे अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि “ नेता ममता बनर्जी से मेरी अपील है कि यदि आप पहले की तरह ही समर्पित और पुराने कार्यकर्ताओं के साथ काम करेंगी तो इससे पार्टी की छवि उज्ज्वल होगी। मुझे नहीं लगता कि कठिन काम अस्थायी एजेंसियों के माध्यम से पूरा किया जा सकता है।”

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इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल के शासन के माहौल पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि “ पश्चिम बंगाल में हाल ही में अपराध और भ्रष्टाचार की भयावह घटनाओं ने स्वाभाविक रूप से आम जनता के मन में सवाल और चिंताएं पैदा कर दी हैं। लोकतंत्र को और मजबूत करने के लिए, मूलभूत मूल्यों के साथ-साथ पारदर्शिता, जवाबदेही, प्रतिबद्धता, मर्यादा और जनता के प्रति उत्तरदायित्व को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए। ”

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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