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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला- ज्यादा नंबर लाने वाले रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवार भी ‘जनरल’ सीट के हकदार

राजस्थान हाईकोर्ट ने कुछ पदों की भर्ती के दौरान यह व्यवस्था की थी कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार, भले ही वे सामान्य श्रेणी के कटऑफ से ज्यादा अंक हासिल करें, उन्हें सामान्य श्रेणी के पदों पर नहीं लिया जाएगा। इसी फैसले को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में पहुंची थी।

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण और मेरिट को लेकर एक अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) का कोई उम्मीदवार जनरल कैटेगरी के कट-ऑफ से ज्यादा नंबर लाता है, तो वह जनरल सीट पर नियुक्ति पाने का पूरा हकदार है।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने यह फैसला 1992 के इंद्रा साहनी मामले के ऐतिहासिक निर्णय के आधार पर दिया, जिसमें ओबीसी को सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। बेंच ने राजस्थान हाईकोर्ट की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को, ज्यादा अंक लाने के बावजूद, सामान्य श्रेणी की सीटों पर नियुक्त नहीं किया जा सकता।

हाई कोर्ट की ‘डबल बेनिफिट’ वाली दलील खारिज

दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट ने कुछ पदों की भर्ती के दौरान यह व्यवस्था की थी कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार, भले ही वे सामान्य श्रेणी के कटऑफ से ज्यादा अंक हासिल करें, उन्हें सामान्य श्रेणी के पदों पर नहीं लिया जाएगा। इसी फैसले को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में पहुंची थी।

मामले में हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने पहले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के पक्ष में फैसला दिया था। इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि अगर आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी के पदों पर भी माना गया, तो यह उन्हें दोहरा लाभ देने जैसा होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया।

फैसला लिखते हुए जस्टिस दत्ता ने कहा कि “ओपन” शब्द का सीधा अर्थ खुला होता है। यानी जिन पदों को ‘ओपन’ या अनारक्षित के रूप में भरा जाना है, वे किसी भी श्रेणी में नहीं आते। ऐसे पदों पर योग्यता के आधार पर किसी भी वर्ग का उम्मीदवार चुना जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि आरक्षण की उपलब्धता, आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार को योग्यता के आधार पर अनारक्षित यानी सामान्य श्रेणी में विचार किए जाने से नहीं रोकती।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और साक्षात्कार दोनों शामिल हों, उसमें अगर कोई आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार सामान्य श्रेणी के लिए तय कटऑफ से अधिक अंक हासिल करता है, तो उसे साक्षात्कार के लिए सामान्य श्रेणी का उम्मीदवार माना जाएगा। हालांकि, अंतिम यानी कुल अंक सामान्य श्रेणी के कटऑफ से कम रह जाते हैं, तो ऐसे उम्मीदवार को उसकी मूल आरक्षित श्रेणी के तहत माना जाएगा।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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