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सुप्रीम कोर्ट ने ‘यादव जी की लव स्टोरी’ पर प्रतिबंध लगाने की याचिका की खारिज, कहा – ‘क्या हिंदू लड़की के मुस्लिम से शादी करने से बिगड़ रहा ताना बाना?’

सुप्रीम कोर्ट ने यादव जी की लव स्टोरी पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने अपने फैसले को घूसखोर पंडत के आदेश से अलग बताया।

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फोटोः आईएएनएस

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (25 फरवरी) को ‘यादव जी की लव स्टोरी’ पर प्रतिबंध लगाने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका विश्व यादव परिषद द्वारा दायर की गई है।

इस याचिका में आरोप लगाया गया कि फिल्म का शीर्षक यादव समाज के खिलाफ एक प्रत्यक्ष और आपत्तिजनक रूढ़िवादिता को जन्म देता है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस बी वी नागरत्ना और उज्ज्वल भुइयां की पीठ कर रही थी। पीठ ने याचिकाकर्ता के तर्क को खारिज कर दिया।

यादव जी की लव स्टोरी में याचिकाकर्ता ने क्या बताया?

याचिकाकर्ता द्वारा आगे यह भी दावा किया गया था कि फिल्म में यादव समुदाय की एक हिंदू लड़की को मुसलमान लड़के से प्यार करते हुए दिखाया गया है।

अदालत ने पूछा कि “क्या हिंदू लड़की का मुस्लिम लड़के से शादी करना राष्ट्रीय ताने-बाने को बिगाड़ रहा है?” अदालत ने आगे कहा कि फिल्म के नाम में यादव समुदाय के लिए कोई विशेषण या शब्द नहीं है जो गलत तरह से प्रस्तुत किया गया हो।

पीठ ने कहा कि “हमने रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री का अध्ययन किया है। मुख्य शिकायत यह है कि आगामी फिल्म का नाम यादव समुदाय का समाज में गलत चित्रण करता है। इसलिए फिल्म का नाम बदलने की मांग की जा रही है। हमें यह समझ नहीं आ रहा है कि फिल्म का शीर्षक किस प्रकार समुदाय को खराब छवि में दर्शा सकता है। फिल्म के शीर्षक में कहीं भी ऐसा कोई विशेषण या शब्द नहीं है जो यादव समुदाय को अपमानजनक दर्शाता हो। ये आशंकाएं पूरी तरह निराधार हैं।”

सुप्रीम कोर्ट ने ‘घूसखोर पंडत’ से अलग बताया

अदालत ने इस दौरान हाल ही में ‘घूसखोर पंडत’ के संबंध में हालिया आदेश से अलग बताया। पीठ ने कहा “हम अपने आदेश को घूसखोर पंडत से अलग रखेंगे। घूसखोर का अंग्रेजी में मतलब करप्ट (भ्रष्ट) है। इसलिए यह समुदाय के लिए एक नकारात्मक भाव को दिखाता है। इस मामले में यादव समुदाय के प्रति ऐसी कोई नकारात्मकता नहीं है। धारा 19(2) के तहत कोई भी उचित प्रतिबंध लागू नहीं होता। यह नाम किसी भी तरह से यादव समुदाय को गलत या नकारात्मक रूप में चित्रित नहीं करता है। इसलिए याचिका खारिज की जाती है।”

याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित होने का दावा करती है। इस पर पीठ ने जवाब दिया कि “बैंडिट क्वीन मूवी में गुज्जर समुदाय को गलत तरीके से दिखाया गया है, ऐसा कहा गया था। अदालत ने कहा था ‘नहीं’।”

पीठ ने आगे याचिका खारिज करते हुए कहा कि “कृपया सहनशील बनें। यह काल्पनिक कहानी है। एक हफ्ते में सब खत्म हो जाएगा। आजकल कोई सिनेमाघरों में नहीं जा रहा है। हर कोई फोन पर देख रहा है।”

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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